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लूली लंगड़ी पार्टी को पोलियो ड्रॉप पिलाए प्रियंका

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विजयकांत दीक्षित

देश को पोलियो मुक्त कराने में चार दशक से अधिक का समय लगा था। आज भी पोलियो का दंश देश-विदेश में देखने को मिल जाता है। तब आबादी भी आज की तुलना में करीब आधी थी। चेचक और हैजा जैसी बीमारियों से लाखों लोग को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हर दिन 1000 लोग पोलियो के शिकार वर्ष 1980 के दौरान हो रहे थे। भारत में अपंगो की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही थी। सत्तापक्ष और विपक्ष इस आपात समय में कोई राजनीति ना करके पीड़ितों के सेवा भाव में लगा था। लेकिन इस बार कोरोना काल के दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने आपात धर्म को भूलकर कुर्सी पाने के लिए देश को बदनाम करने मैं कोई कसर नहीं छोड़ा*।

*क्या यह सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की कांग्रेस की छटपटाहट सत्ता पाने के प्रति दिखाई नहीं दे रही है? कोरोना के प्रथम चरण के दौरान देशभर मैं लौट रहे मजदूरों और किसानों के साथ कांग्रेस ने राजनीति का दांव खेला था। सरकार को सैकड़ों गाड़ियों की सूची दी थी कि हम इन वाहनों से मजदूरों एवं किसानों को उनके गांव ले जाना चाहते हैं। हमें अनुमति दे। यूपी सरकार ने जांच कराई तो मालूम पड़ा कि अधिकतर वाहनों के नंबर स्कूटर आदि के हैं। बड़ी फजीहत हुई कांग्रेस की। कांग्रेस के चाटुकार की टीम गांधी परिवार को गुमराह कर रही है। समय पीड़ितों की मदद करने का था और आज भी है। पूरी गुंजाइश बनी हुई है और कांग्रेश खाली पड़े विपक्षी मैदान मैं अपना मजबूत झंडा आसानी से लहरा सकती है*।*उसे तो चाहिए कि वह मोदी-योगी जी से यह लिख कर यह बोले कि आप हमारी जहां जरूरत हो वहां ड्यूटी लगाने की कृपा करें।अस्पतालों में जिम्मेदार वर्करों को भेजकर नगद धनराशि पीड़ितों को दे। कम से कम छत्तीसगढ़ व पंजाब जैसे कांग्रेश शासित राज्यों में यह काम कांग्रेश कर सकती है। इससे उसका जनाधार और उसकी मंशा पूरी हो सकती है किंतु आलोचना करने से कांग्रेस की भूमिका विलेन जैसी नजर आती है। प्रियंका जी बोल रही हैं कि केवल 3% लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है। आंकड़ा तो कम से कम होमवर्क करके ठीक किया जा सकता था*।*कांग्रेस को वैक्सीनेशन ग्लोबल टेंडर और मॉडर्न, फाइजर जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों के मसले पर इस समय बोलना क्या उचित था? इस समय लड़ाई कोरोना के खिलाफ चल रही है।  यह लड़ाई थम जाती तो उस वक्त सिलसिलेवार तरीके से यह मामला कांग्रेसका उठाना चाहिए था। निगाहें किसी पर और निशाना किसी पर। *भारत यदि “वैक्सीन” नहीं बना पाता तो निश्चित रुप से “विदेशी वैक्सीन” की कीमत 2 हजार से कम नहीं होने वाली थी । अमेरिका हमें दो तीन हजार रूपये का हार्ट में लगने वाला स्टेन्ट को पचास हजार में बेचता आया है*।*इसी वजह से एक बात उभर रही है।

विदेशी दवा कंपनियों के भारत से 4 लाख करोड़ रु लूटने की मंशा धराशाई हो जाने पर अब ये कंपनियां बौखलाकर नए नए पैंतरों से देश को नीचा और असफल बताने के प्रपंच में जुटी है। कुछ तो नासमझ लोग चिताओं की तस्वीरें अमेरिकी अखबारों में छपवाकर मन ही मन मुदित है,पर शायद उन्हे ये पता नहीं है कि न्यूयार्क जैसे शहरों में 700 लाशें डीप फ्रीजर में अंतिम संस्कार के इंतजार में महीनों से पड़ी रही। गनीमत है कि कांग्रेस ने कोरोना की दवाई 2DG (DRDO) का मुद्दा नही उठाया है*।*प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी का मोर्चा संभाल चुकी हैं। इसके बावजूद यूपी में कांग्रेसी सो रहे हैं। स्पष्ट कारण है कि यूपी का संगठन पूरी तरह से आलाकमान के सामने सक्रिय है और पब्लिक के बीच निष्क्रिय हैं। गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई लाभ नहीं। दोष केवल मुंगेरीलाल जैसा सपना देखने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का है। कांग्रेस के वर्करों का दुर्भाग्य है कि इतनी महान नेता इंदिरा गांधी की पोती यह बात समझ नहीं पा रही है। बुजुर्ग पत्रकार श्याम कुमार और राजेश राय के बीच कथित सेक्स के गंदे संवाद का स्क्रीनशॉट, इंदिरा जी के प्रति अमर्यादित टिप्पणी, लल्लू जी आदि गतिविधियों की कटिंग फेसबुक में कांग्रेसी नेता सुशील दुबे ने पोस्ट की है। क्यों नहीं प्रियंका पोलियो से पीड़ित लंगड़ी लूली अपनी पार्टी के नेताओं का वैक्सीनेशन करवा रही हैं*।*

*लेखक-विजयकांत दीक्षित नई दिल्ली

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