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शराबबंदी और शराब का अवैध व्यापार

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शैलेन्द्र चौहान

गुजरात में शराब पर प्रतिबंध के बावजूद शराब तस्करों का मजबूत तंत्र कार्य कर रहा है। कहा जाता है कि भारत में कालाधन पैदा करने के तीन प्रमुख स्रोत हैं- भूमि, खनिज और शराब। गुजरात में खनिज नहीं है लेकिन वहां शराब का कमाल का धंधा चल रहा है। राज्य में अवैध शराब की वजह से हर साल 3 हजार करोड़ रुपए के उत्पाद शुल्क का नुकसान हो रहा है। अगर आप 10 प्रतिशत की दर से उत्पाद कर को जोड़ें तो गुजरात में अवैध शराब का व्यापार 30 हजार करोड़ रुपए का है। राजस्थान के रास्ते होकर गुजरात को करोड़ों रूपए की शराब की तस्करी प्रतिदिन हो रही है। विगत वर्षों में राजस्थान में महीने में पांच दस ट्रक शराब कार्टन से भरे हुए पकड़े जाते रहे हैं, जिनके बारे में यही खुलासा हुआ है कि शराब गुजरात ले जाई जा रही थी। शराब तस्कर जो पकड़ में नहीं आ पाते उनकी संख्या काफी मानी जाती है। यानि कि करोडों रूपयों की शराब गुजरात हर रोज पहुंचने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह शराब पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से राजस्थान के रास्ते से गुजरात पहुंचती है। वहीं महाराष्ट्र के रास्तों से भी यह काला कारोबार चलता है। दमन और सिलवासा इसके मुख्य गढ़ हैं। छुट्टियों के दिनों में तो गुजरातियों की भारी भीड़ वहां देखी जा सकती है। गुजरात में यह सुविधा भी है कि आपके घर शराब आसानी से पहुंच जाती है। आप बस जेब ढीली कीजिये शराब आपके दरवाजे पर हाज़िर। शराब पहुंचाने वाले ये लोग बूटलेगर कहलाते हैं। यह सब पुलिस की मिलीभगत से चलता है। कितने ही लोग इस तस्करी की अवैध कमाई से मालामाल हो रहे हैं और गांधी के गुजरात में नशे के व्यापार में वे सरकारी तंत्र पर भारी पड़ रहे हैं। क्या गुजरात सरकार को शराब तस्करी और तस्करों के तंत्र का पता नहीं है? या फिर उनका सरकारी तंत्र इस अवैध कारोबार में शामिल है? उसकी शह के बिना तो अवैध कार्य हो नहीं सकता। अब शराब बंदी के कारण गुजरात सरकार को एक पैसे की आमदनी नहीं हो रही है लेकिन शराब तस्कर मालामाल हो रहे हैं? क्या गुजरात सरकार के पास इस बात के सही आँकड़े हैं कि कितनी शराब पकड़ी गई और कितने शराब तस्करों को पकड़ा गया व कितनों को कितनी कितनी सजा हुई? बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बडा काला कारोबार संभव ही नहीं है। क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है? गुजरात भ्रष्टाचार में किसी भी अन्य राज्य से कम नहीं है लेकिन वहां के लोग और शासन इसको भ्रष्टाचार मानते ही नहीं हैं। आर्थिक अपराध वहाँ सर्वस्वीकार्य हैं। रिश्वत वहाँ सुविधाशुल्क है जिसे लोग सौजन्यता मानते हैं।

संपर्क : 34/242, सेक्टर-3, प्रताप नगर, जयपुर -302033मो.7838897877

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