दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे से भाजपा की खुशियां सातवें आसमान पर है तो कांग्रेस भी मायूस नहीं है। उसकी खुशी इस बात पर है कि बला टल गई साफ है कि चुनाव परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में गया हो कांग्रेस भी अपना हित साधने में कामयाब रही। हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आए दिल्ली वालों ने खुले दिल से भाजपा को अपना प्यार और खेह दे दिया।
पिछले 15 वर्षों से दिल्ली की सियासत देख रही अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप को डेढ़ दशक से प्यार लुटा रही जनता का केजरीवाल की झाडू से मोह भंग हो गया और जैसी संभावनाएं जताई जा रही थी ठीक वैसा ही परिणाम भी सामने आया। इस चुनाव में कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं था यानी वह चुनाव लड़े तो ठीक ना लड़े तो ठीक। उसके लिए परिणाम उतनेमायने नहीं रखते थे जितना की केजरीवाल को जमीन पर ला खड़ा करना और इस काम में उसे जबरदस्त कामयाबी मिली मूलत दिल्ली मैं तीन चार तरह का बोट बैंक है एक पंजाबी बोट बैंक जो 1947 के विभाजन के बाद दिल्ली आया यह लोग विभाजन के लिए कांग्रेस को जि मेदार ठहराते रहे इस कारण भी वह कांग्रेस को पसंद नहीं करते दूसरा यूपी बिहार का वह तवका जिसे पुरचिया भी कहा जाता है सेकुलर राजनीति के साथ रहा तीसरा अल्पसं यक मतदाता जो चक्त और हालात के मध्य नजर अपना समर्थन राजनीतिक दलों को देता रहा दिल्ली का मुस्लिम वर्ग कभी किसी एक दल के साथ नहीं रहा कांग्रेस जब सत्ता में रही तो शाही इमाम बुखारी का उसे राजनीतिक लाभ मिला बाद में उसने इरादा बदलते देर नहीं लगे कांग्रेस कमजोर हुई तो अल्पसं यकों ने विकल्प के रूप में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आपको अपना लिया मजे की बात यह की ताजा चुनाव में भी उनका समर्थन केजरीवाल की पार्टी को ही मिला यह अलग बात है कि एक मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा में भाजपा का भी कमल खिल गया पूर्व मंत्री ओलंपियन असलम शेर खान का मानना है कि दिल्ली का चुनाब पहली बार हिंदू मुसलमान के मुद्दों के बगैर लड़ा गया लेकिन इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे शून्य हो गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह चुनाव आपदा के नाम पर लड़ा चुनावी रैलियां में वह दिल्ली वासियों से आपदा खत्म करने के लिए वोट मांगते नजर आए यह आपदा प्राकृतिक आपदा नहीं थी पीएम मोदी का इशारा अरविंद केजरीवाल की ओर था जो किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी पीएम मोदी दिल्ली वासियों को यह भरोसा
दिलाने में कामयाच रहेगी केजरीवाल के कारण दिल्ली का विकास रुक सा गया है या ठहर गया है आप पार्टी के दिल्ली की सियासत संभालने के 15 वर्षों बाद यह पहला मौका था जब केजरीवाल और उनकी पार्टी के नौजवान चेहरों को दिल्ली वासियों ने अपना समर्थन दिया, लेकिन शराब घोटाला शीश महल प्रकरण भ्रष्टाचार के मामलों ने दिल्ली वासियों को अपना इरादा बदलने के लिए मजबूर कर दिया पंजाबी जाट और पुरवाई लोगों के साथ भाजपा ने न केवल अपनापन दिखाए बल्कि भरोसा दिलाने में भी सफल रही की दिल्ली का विकास भाजपा ही कर सकती है भाजपा के रणनीतिकारों ने केजरीवाल के 15 साल के कार्यकाल की बुराइयों का
वर्णन जोरदार ढंग से किया की किस तरह खुद को नेक और ईमानदार साबित करने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता भ्रष्टाचार के मामलों में जेल गए। चाहे वह मनीष सिसोदिया हो सत्येंद्र जैन हो या फिर अमानुल्लाह खान भाजपा यह बताने में भी सफल रही की दिल्ली का विकास भ्रष्टाचार से नहीं हो सकता इसके लिए नीति और नियत की जरूरत है श्री शेर खान के मुताबिक यह चुनाव कांग्रेस के लिहाज से नुकसानदायक नहीं रहा वह इसलिए की उसका इस चुनाव से कोई वास्ता ही नहीं था उसका सिर्फ और सिर्फ एक मकसद केजरीवाल रुपी आपदा से पार पाना था जिसमें वह सफल रही इसका एक बड़ा फायदा कांग्रेस को यह होगा कि उसे दिल्ली में अपने पैर पसारने का मौका मिलेगा पिछले डेढ़ दशक से कांग्रेस केजरीवाल छाया में खड़ी हुई थी और उसे बाहर निकलने का मौका नहीं मिल रहा था गठबंधन की राजनीति कर
मजबूत बनने की कीमत उसे दिल्ली में बहुत महंगी पड़ी है और इसके चलते उसका अस्तित्व सुनने पर आकर ठहर गया वैसे भी दिल्ली में कांग्रेस को कोई बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं थी इसलिए अभी परिणाम का उसकी हैसियत पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है हां उसके लिए खुशी की बात यह है कि केजरीवाल से उसे छुटकारा मिल गया अब वह स्वतंत्र होकर दिल्ली में पैर पसार सकेगी इस चुनाव परिणाम में प्रधानमंत्री मोदी का कद और बढ़ गया है यह मान लिया जा रहा है कि कामयाबी का दूसरा नाम ही नरेंद्र मोदी है। डेढ़ करोड़ की आबादी वाले दिल्ली को विकास की बहुत आवश्यकता है और इसे मुमकिन बनाना पीएम मोदी के हाथों में ही संभव है दिल्ली वालों के लिए बड़ी खुशी की बात यह है कि उसे अब रोज-रोज के झगड़ों से छुटकारा मिल ही गया। भाजपा इसलिए खुश है कि उसने आपदा पर जीत हासिल की और कांग्रेस इसलिए खुश है कि मुसीबत से छुटकारा मिला।

