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 भाजपा को सजा दो, सत्ता से बाहर करो

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मुनेश त्यागी

  संयुक्त किसान मोर्चा ने उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव के मद्देनजर एक अपील जारी की है।इसी के साथ-साथ पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस मेरठ से शुरू की गई और कहां गया कि उत्तर प्रदेश के पूरे चुनाव में इस तरह की अपील जारी की जाएंगी।अपील में कहा गया है कि सरकार जो किसान विरोधी तीन काले कानून लाई थी वे किसान हित में नहीं थे, जनहित में नहीं थे, आम जनता के हित में नहीं थे। वे केवल पूंजीपतियों के हितों को बढ़ाने के लिए, कारपोरेट जगत को खुश करने के लिए और उनकी आमदनी और उनका मुनाफा बढ़ाने के लिए लाए गए थे। उनका जनता की समस्याओं से , उनके कल्याण से कोई मतलब या लेना-देना नहीं था।
  इस मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से लिखित में एक अपील जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि यही नियत किसान विरोधी कानूनों के पीछे थी जो हमारी फसलों को ही नहीं हमारी नस्लों को भी नष्ट करने वाली थी। पहले बीजेपी सरकारों ने इन कानूनों का विरोध कर रहे किसानों पर आंसू गैस चलाई, वाटर कैनन बरसाया, लाठीचार्ज किया और झूठे मुकदमे लगाते, आंदोलनकारियों को दलाल, आतंकवादी, देशद्रोही, कम्युनिस्ट, माओवादी, मार्क्सवादी, टुकड़े टुकड़े गैंग बताया, चीन के दलाल बताकर किसानों का अपमान किया। फिर जब लगा कि चुनावों में हार सकते हैं तो सरकार ने तीनों काले कानूनों को वापस ले लिया और हमें आश्वासन देकर मोर्चा उठा लिया और अब सरकार अपने लिखित वादों से मुकर गई है।
अपील में आगे कहा गया है कि हम किसानों के अपमान करने वाली बीजेपी को सबक सिखाने के लिए मैदान में है। बीजेपी सरकार झूठ की भाषा समझती है, अच्छे बुरे का भेद नहीं समझती, संवैधानिक अर्थ और सिद्धांतों की बात नहीं जानती, बस यह पार्टी एक ही भाषा समझती है और वह है वोट, सत्ता और सीट। उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी 2017 के विधानसभा चुनाव में किसानों से किये गये अपने वादों से पलट गई है। वादा था कि सभी किसानों का सारा लोन माफ होगा, लेकिन हुआ, सिर्फ 44 लाख का और वह भी सिर्फ ₹ 1,00,000 तक का, वादा था कि गन्ने की पेमेंट 14 दिन के अंदर दिलाया जाएगा, बकाए पर ब्याज दिलाया जाएगा मगर वह नहीं किया गया, वादा था पर्याप्त और सस्ती बिजली देने का, लेकिन देश की सबसे महंगी बिजली उत्तर प्रदेश में कर दी गई, वादा था फसल का दाना दाना खरीद का, लेकिन धान की पैदावार का तिहाई और गेहूं  की पैदावार का छटांस भी नहीं खरीदा। वादा था गोवंश की रक्षा का लेकिन आज पूरे प्रदेश के किसान छुट्टे और आवारा पशुओं  की मुसीबत से बेहाल हैं। आज प्रदेश में पलायन करता मजदूर है, भटकता बेरोजगार है और बेहाल किसान है। सौ बातों की एक ही बात है ,,,,किसान विरोधी बीजेपी सरकार को चुनाव में सजा देने की जरूरत है, सत्ता से बाहर करने की जरूरत है।
  इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की गई जिसमें कामरेड हन्नान मोल्ला, योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत ने संबोधित किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि बीजेपी सरकार झूठों गद्दारों की सरकार है, इस को सजा देना जरूरी है। चुनाव में बीजेपी को सजा दो, सरकारी वादा खिलाफी का विरोध करो। हमारी राजनीति किसानों की राजनीति है एसकेएम कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है। किसान की पारिवारिक आमदनी जो पहले ₹20000 महीना थी वह अब ₹10000 महीना हो गई है, बिजली का रेट 75 से 175 हो गया है, 6 घंटे बिजली काट दी गई है, एक भी थर्मल पावर नहीं लगाया गया है। सबसे ज्यादा लूट मंडियों में जारी है, खेतों को पशु खा रहे हैं, मंडी में भाव नहीं है, आमदनी माइनस में चली गई है, किसानों को मूर्ख बनाया जा रहा है।
 प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा गया की 2022 तक दुगनी आए करने का वादा किया था मगर आज किसान लगातार घाटे में हैं। आज भाजपा को सजा देना जरूरी है। किसान विरोधी भाजपा को सजा देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि आज हमारा संघर्ष दो मोर्चों पर है,,, केंद्र सरकार से और राज्य सरकार से। हम दोनों स्तर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसान विरोधी और जनविरोधी नीतियों का विरोध करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा गया है कि एम एस पी के लिए समिति नहीं बनी, किसानों के खिलाफ मुकदमें वापस नही लिए गए, शहीद किसानों के परिवार को कोई मुआवजा नहीं दिया गया, लखीमपुर खीरी के मुख्य साजिशकर्ता के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। देश में सबसे महंगी बिजली यूपी में है। पशुओं की जगह गौशाला में है, खेतों में नही है।
   भाजपा को सजा और संघर्ष के अलावा, कोई भाषा समझ में नहीं आती। किसान मजदूर नौजवानों को क्या करना है, उनको देखना है कि जिस सरकार ने उनके लिए काम नही किया है, उनके विरोध में काम किया है, उनकी समस्याओं को बढ़ाया है, ऐसी सरकार को वोट नहीं देनी है। फसलों का वाजिब दाम इसलिए नहीं मिला है ताकि सरकार के व्यापारी मित्रों को लाभ पहुंचाया जा सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि जनता उम्मीदवारों से सवाल-जवाब करें, मुजफ्फरनगर को हिंदू मुसलमान का अखाड़ा और स्टेडियम नहीं बनने दिया जाएगा, 80-20 और जिन्ना के मैच नहीं खेलने दिए जाएंगे। जनता विकास, अस्पताल, रोजगार और शांति चाहती है भाईचारा और अमन चाहती है।
 प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा गया है कि आज जनता को अनपढ़ बनाने की कोशिश है, शिक्षा नीति पर हमले हैं, शिक्षा का बजट कम किया जा रहा है। हमारी लड़ाई सस्ती मजदूरी के खिलाफ लड़ाई है, किसान मजदूर हो गया है, वह अपने  घरों को छोड़कर, अपने प्रदेश छोड़कर, दूसरों के यहां मजदूरी करने को मजबूर है। जमीन को हड़पने का षड्यंत्र अभी भी जारी है। लोग पहले से ही सवाल कर रहे हैं, अब उनको वाणी और जवान मिली है, उन्होंने उम्मीदवारों से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं जो बीजेपी और आरएसएस को रास नही आ रहे हैं। यह संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन की सबसे बड़ी देन है।
 प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि हम खेती किसानी को बचाएंगे, जनता किसानों नौजवानों को बचाएंगे, किसान बचेगा तो देश बचेगा, खेत-मजदूर और दुकानदार बचेंगे। मुजफ्फरनगर को हिंदू मुसलमानों की नफ़रत, दंगों और हिंसा का स्टेडियम नहीं बनने दिया जाएगा। हम भाजपा की जन विरोधी, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, रोजगार विरोधी और कारपोरेटपरस्त नीतियों को परास्त करेंगे, जनता बीजेपी को सजा दे और उसे सत्ता से बाहर करे।
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