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इन जहरीली डिबेट पर लगाम लगाइए

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मैं हिंदुओं और मुसलमानों को बर्दाश्त कर सकता हूं, लेकिन चोटी वालों और दाढ़ी वालों को नहीं. चोटी हिंदुत्व नहीं है. दाढ़ी इस्लाम नहीं है. चोटी पंडित की निशानी है. दाढ़ी मुल्ला की पहचान है. ये जो एक दूसरे के बाल नोचे जा रहे हैं, ये उन कुछ बालों की मेहरबानी है, जो इन चोटियों और दाढ़ियों में लगे हैं. ये जो लड़ाई है वो पंडित और मुल्ला के बीच की है. हिंदू और मुसलमान के बीच की नहीं.
‘किसी पैगंबर ने नहीं कहा कि मैं सिर्फ मुसलमान के लिए आया हूं, या हिंदू के लिए या ईसाई के लिए आया हूं. उन्होंने कहा, ‘मैं सारी मानवता के लिए आया हूं, उजाले की तरह.’ लेकिन कृष्ण के भक्त कहते हैं, कृष्ण हिंदुओं के हैं. मुहम्मद के अनुयायी बताते हैं, मुहम्मद सिर्फ मुसलमानों के लिए हैं. इसी तरह ईसा मसीह पर ईसाई हक़ जमाते हैं. कृष्ण-मुहम्मद-ईसा मसीह को राष्ट्रीय संपत्ति बना दिया है. यही सब समस्याओं की जड़ है. लोग उजाले के लिए नहीं शोर मचा रहे, बल्कि मालिकाना हक़ पर लड़ रहे हैं.’

– नजरूल इस्लाम ( बंगलादेश के राष्ट्रकवि)

गिरीश मालवीय

सबसे पहले तो इन जहरीली डिबेट पर लगाम लगाइए. न ऐसी घटिया डिबेट आयोजित करवाते न्यूज़ चैनल, न यह सब हुआ होता, जिसके जो मन में आता है यहां बक कर चला जाता हैं. और एंकर ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वे स्वयं सत्ताधारी दल के प्रवक्ता हो. हमने सैकड़ों बार देखा है कि एंकर अपनी आवाज तेज रखने के लिए विपक्षी दल के प्रवक्ता का माइक म्यूट कर देते हैं, क्या उस बहस में नुपुर शर्मा का माइक म्यूट नहीं किया जा सकता था ?

किया जा सकता था ! बिल्कुल किया जा सकता था लेकिन नही किया गया इसलिए नहीं किया गया क्योंकि उस वक्त हर चैनल पर ऐसी बहस आयोजित ही इसलिए की जा रही थी कि नफरत फैलाई जा सके, ध्रुवीकरण किया जा सके, और नुपुर शर्मा के इस बयान से न्यूज़ चैनल अपने उद्देश्य में कामयाब रहे.

कल मिलोर्ड ने नुपुर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यूज चैनलों में होने वाले बहस पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने क्या किया ? हमें मुंह खोलने पर मजबूर मत कीजिए. टीवी डिबेट किस बारे में थी ? इससे केवल एक एजेंडा सेट किया जा रहा था. उन्होंने ऐसा मुद्दा क्यों चुना, जिस पर अदालत में केस चल रहा है.’

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘नुपुर शर्मा के लिए रेड कारपेट बिछाया जा रहा है.’ लेकिन असली रेड कार्पेट तो नाविका कुमार के लिए बिछाया गया था. क्या उन्हे सिर्फ इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि वे प्रधानमन्त्री मोदी का इंटरव्यू ले चुकी है ? उनके पीएम से घनिष्ठ संबंध है ? आप बताइए कि कोर्ट ने नाविका कुमार को क्यों छोड़ दिया ?

दो साल पहले सुदर्शन न्यूज चैनल ने एक बहस आयोजित की जिसमे यूपीएससी में मुस्लिमों के घुसपैठ पर चर्चा की जानी थी सुप्रीम कोर्ट में इस कार्यक्रम के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कुछ मीडिया ग्रुप के प्रोग्राम में आयोजित होने वाली डिबेट चिंता का विषय है। इन डिबेट में हर तरह की ऐसी बातें होती है जो मानहानि वाले हैं। जस्टिस केए जोसेफ ने इस दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रोग्राम को देखिये कैसा उन्माद पैदा करने वाली बात कही जा रही है कि एक समुदाय विशेष के लोग सिविस सर्विसेज में प्रवेश कर रहे हैं। प्रोग्राम में कहा जा रहा है कि एक समुदाय विशेष के लोग घुसपैठ कर रहे हैं और ये बयान उकसाने वाला है। जस्टिस जोसेफ ने टिप्प्णी की थी कि जिस तरह से न्यूज चैनल में डिबेट हो रहा है डिबेट में एंकर के रोल को देखने की जरूरत है।

एक अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में और स्पष्ट किया था कि किसी डिबेट शो में एंकर समान सह-प्रतिभागी के तौर पर चल रही बहस में भाग लेगा और ऐन्गिल्ड बहस कराएगा तो उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई हो सकेगी। ऐसा एंकर संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में बच नहीं सकेगा।

जब सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्णय दे चुका है तो आज इस मामले में नाविका कुमार की भूमिका को क्यों नज़र अंदाज किया जा रहा है देश के माहौल में जहर घोलने का काम तो ये न्यूज़ चैनल्स और ऐसी डिबेट के एंकर कर रहे हैं ये बात क्यो भूल रहे हैं

भारत का बिका हुआ मीडिया अपने हरामीपन से कभी भी बाज नहीं आएगा ……यह कल क्लिपिंग जी न्यूज़ का प्राइम टाइम प्रोग्राम DNA की है, नया एंकर जो आया है वो झूठ फैलाने में सुधीर चौधरी का भी बाप है कल इस एंकर ने राहुल गांधी का एक वीडियो चलाते हुए कहा कि उन्होंने उदयपुर हत्याकांड के आरोपियों को ‘बच्चा’ कहा है. चैनल ने इसे ट्वीट भी किया

जबकि यह बयान राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में कांग्रेस दफ्तर पर हमला करने वालो के संदर्भ में दिया था हमलावरों को लेकर पूछे जाने पर राहुल गांधी ने हिंसा का जवाब अहिंसा से देते हुए कहा कि मैं उन्हें बच्चा समझता हूं। उन्होंने कहा कि, ‘जिन लड़कों ने उनके ऑफिस में तोड़-फोड़ की वो बच्चे हैं। ये अच्छा नहीं है, लड़कों ने गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत की है।’

अभी खबर आई है कि जी न्यूज ने ऐसा वीडियो चलाने पर माफ़ी मांगी है, लेकिन अब माफी से क्या होगा. ऐसे ही आलू से सोना बनाने वाला वीडियो था.

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