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*त्वरित टिप्पणी…एयरपोर्ट रोड़ पर हादसे में जिसकी भी मौत हुई वे थे बेगुनाह नागरिक..* 

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*आखिर क्यों नहीं मरता* गैर जिम्मेदार अफसरान.. नकारा नेतृत्व व नपुंसक नागरिक आखिर क्यों नहीं मरता।.. 

क्यों कभी बावड़ी लील जाती है अनेक बेगुनाह अधकचरी जिंदगियां.. कभी बायपास पर बस खा जाती है स्कूली मासूमियत.. तो कभी वीआईपी रोड़ पर कोई ट्रक रौंद देता है राहगीर।.. नवजात भी कहां रहते यहां सुरक्षित.. अस्पतालों में चूहे कुतर लेते है तो कभी कुत्ते ले जाते हैं उठा।.. मक्कार है जो आखिर वो मरता क्यों नहीं..गैर जिम्मेदार अफसरान.. नकारा नेतृत्व व नपुंसक नागरिक।.. 

कान्ह और सरस्वती नदियां महज जलस्रोत नहीं, इंदौर की पहचान और विरासत हैं

अभ्यास मंडल ने कान्ह-सरस्वती नदी के पुनर्जीवन हेतु किया मौन धरना – प्रदर्शन।

इंदौर : कान्ह और सरस्वती नदियों के पुनर्जीवन की मांग को लेकर सामाजिक संस्था अभ्यास मंडल द्वारा मौन धरना – प्रदर्शन कृष्णपुरा छत्री के गेट पर आयोजित किया गया।  दो घंटे से अधिक समय तक चले इस धरना – प्रदर्शन में अभ्यास मंडल के पदाधिकारियों के साथ शहर के सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद और अनेक गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

धरने के जरिए संदेश दिया गया कि इंदौर को उसकी नदियाँ चाहिए, क्योंकि यहीं उसकी रगों का पानी और सांस्कृतिक विरासत हैं। अभ्यास मंडल के सदस्यों ने कहा कि नदियाँ सिर्फ जलस्रोत नहीं हैं, बल्कि इंदौर की पहचान और भविष्य की आधारशिला हैं। जब तक कान्ह और सरस्वती का पुनर्जीवन नहीं होगा, तब तक शहर का पर्यावरणीय संतुलन भी अधूरा रहेगा।

धरने के माध्यम से यह मांग उठाई गई कि प्रशासन, समाज और नागरिक मिलकर नदी पुनर्जीवन अभियान को प्राथमिकता दें और इसे एक जन-आन्दोलन के रूप में आगे बढ़ाएं। अभ्यास मंडल का यह प्रयास केवल नदियों की रक्षा का आह्वान नहीं, बल्कि शहर की आने वाली पीढ़ियों के जीवन और सांसों की सुरक्षा का संकल्प है।

मौन धरना – प्रदर्शन में गौतम कोठारी, अशोक जायसवाल, ओपी जोशी,कृपाशंकर शुक्ला, श्यामसुंदर यादव , सुरेश मिंडा, फादर लाकरा, प्रदीप नवीन, नूर मोह कुरैशी, पीसी शर्मा, जीवन मंडलेचा, रामस्वरूप मंत्री, अरविंद पोरवाल, दिलीप वाघेला,मनीष भालेराव, मुरली खंडेलवाल, श्याम पांडे,देवीलाल गुर्जर,सुशीला यादव, माला सिंह ठाकुर, वैशाली खरे, प्रणिता दीक्षित आदि उपस्थित थे। अंत में आभार अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने माना।

कोर्ट हेलमेट पहनाने पर अड़ी है.. पुलिस चालान बनाने खड़ी है..निगम तोड़फोड़ पर आमादा है और..प्रशासन राजस्व वसूली को डटा है.. नेता बेशर्मी से अकड़ा खड़ा है और नपुंसक नागरिक उसके चरणों में पड़ा है।..हमारे टैक्स का करोड़ों रुपया बगैर काम हुए ही भ्रष्ट नेता, अफसर और ठेकेदारों में बट गया और हम खामोश है.. कमाल यह है कि ऐसा हर दिन हो रहा और हो रहा उजागर भी.. बिगड़ता किसी का कुछ नहीं.. क्योंकि नेता को डर अफसर फसेगा तो खोलेगा पोल.. वो ही उसे बचा ले जाते है ओर हम हाथ मलते खड़े रह जाते हैं।..

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महंगाई बेरोजगारी पर छाई खामोशी है..वो तो होंगे ही हमने भी होंठ सी लिए..और तो क्या कहें इन्हें जिताकर खुद ही जहर के घूंट पी लिए।..वो हमारे पूरी तरह से वैध बेशकीमती घर-दुकान मुफ्त में हमसे छीन ले रहे और हम अपनी तबाही पर आंसू पी रहे।.. क्योंकि हमने जुल्म ज्यादती सहना सीख लिया है.. हम लड़ना भूल चुके.. सत्य है कि हम सब तो वैसे ही मर चुके।..

गोविंद शर्मा *गोविंद* 

पत्रकार व यथार्थवादी चिंतक

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