-सुसंस्कृति परिहार
जैसा कि पूर्व विदित था कि प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी अपने इंडिया के साथियों के साथ सासाराम जिले के रोहतास से पटना तक सोलह दिनों में लगभग 1300 किमी की पदयात्रा के माध्यम से वोटर के वोट चोरी के ख़िलाफ़ 17अगस्त से शुरू आत करने जा रहे हैं। ठीक उसी दिन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने आपको दूध का धुला बताने प्रकट हो जाते हैं।इसी दिन एनडीए अपने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन की घोषणा करते हैं।इसकी गंभीरता हम समझ सकते हैं ताकि इस अधिकार यात्रा से लोगों का ध्यान हटे।
मगर आज वोटर अधिकार यात्रा को बिहार में जो समर्थन मिला है वह इंगित कर रहा है कि बिहार एक बार फिर जनक्रांति का जनक बनने वाला है। विदित हो यह 16 दिवसीय पदयात्रा तकरीबन 23 जिलों से गुजरेगी तथा 1सितम्बर को पटना के गांधी मैदान में समाप्त होगी।
कहा जा रहा है चुनाव आयोग ने जिस तरह की सफाई दी है उसमें प्रतिपक्ष नेता और आम जनता के बीच से पहुंची शिकायतों को झूठा और बेबुनियाद बताया गया। चोरी और सीनाजोरी वाले इस रवैए ने चुनाव आयोग की कटु आलोचना को बढ़ावा दिया है।सबसे बड़ा मज़ाक तो यह किया गया कि देश की बहू, बेटियों, मां-बहनों के सीसीटीवी फुटेज दिखाने को ग़लत बताया है।ज्ञानेश जी आप चुनाव आयुक्त हैं यदि किसी धांधली में इसकी ज़रूरत पड़ती तो आपत्तिजनक क्यों है?महिला भी तो आखिरकार स्वतंत्र भारत की सम्मानित वोटर हैं उसकी फोटो चुनाव आयोग और अधिकारी देख सकते हैं। अखबारों में और टीवी में वे दिखाई जा सकती है लेकिन उनके साथ हुए वोट चोरी के फोटोज़ नहीं देख सकते।अजी कब तक पर्दे में रहस्य रखोगे।मोदी की भाषा बोलोगो।शर्म करो,यह सफाई नहीं सरकार की चापलूसी है।सुप्रीम कोर्ट को क्या 65लाख लोगों की सूची भेजने का इरादा नहीं है।उसे सार्वजनिक भी तो करना है।कब तक झूठ का दामन पकड़े रहोगे।देश जाग रहा है संभावना है कहीं आप भी पूर्व चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की तरह भागने की तैयारी तो नहीं कर लिए हैं इसलिए उनका राग अलापे जा रहे हैं।
यह पहली बार हुआ है जब चुनाव आयोग जनता के आरोप वोट चोरी की जांच करने की जहमत ना उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस को अपने सीने सच्चे आचरण के बारे में बता रहा है।जबकि यह भली-भांति ज़ाहिर है कि ज्ञानेश कुमार गृहमंत्री अमित शाह की खोज है और मित्रों से बढ़कर हैं। जब चुनाव आयोग पर आरोप लगते हैं तो भाजपा को मिर्ची लग जाती है वे टूट पड़ते झूठे आरोप प्रतिपक्ष पर लगाने।यह तो वे ही करते हैं जिन्हें पोल खुलने का ख़तरा रहता है।उसकी निष्पक्षता के क्या कहने जो मोदी के भाषणों की समाप्ति के बाद ही चुनाव की घोषणा करता है।45दिन के अंदर चुनावी दस्तावेज नष्ट कर देता है। मेलजोल का चरम तो देखिए मोदी सरकार चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल से सीजेआई को अलग कर देता है।ताकि अपनी पसंद का आयोग बने। ज्ञानेश की मार ऐसे ही चयनित हुए हैं इसलिए तो उसकी उंगली पर नाचते हैं।
ये चुनाव आयोग और सरकार का व्यवहार शर्मनाक है। हमारे वोट के अधिकार की चोरी को छुपाने का प्रयास है। लेकिन इसके ख़िलाफ़ जन्मा आंदोलन रुकने वाला नहीं।
जनता जनार्दन को चाहिए सबसे पहले वह ईवीएम हटवाए,दूसरा चुनाव आयोग की नियुक्ति में सीजेआई को शामिल करवाए,वोटर लिस्ट सही बनवाए तथा चुनाव केंद्र में सतर्कता के साथ गिरने वाले वोट और वोटर पर नज़र रखें। चापलूस चुनाव आयोग भंग कराए। चुनाव में भले देर हो लेकिन अंधेर नहीं होना चाहिए। जागो,वरना लोकतंत्र के हत्यारे आपसे आपका जनप्रतिनिधि बनाने का अधिकार भी धीरे-धीरे ज़मींदोज़ कर देंगे। जनता की शक्ति बनी रहे। इसलिए न्याय पाने लड़ें बिना लड़े कुछ हासिल नहीं होगा। खासकर जब क्रूर और असंवेदनशील सरकार के साए में हम सब हों।

