अपूर्व भारद्वाज
चौकिये मत आपने बिलकुल सही पढ़ा है ..राहुल को अध्यक्ष बनकर बीजेपी के खेल में नही पढना चाहिए ..राहूल को अब यूपीए चेयर पर्सन बनना चाहिए और कांग्रेस अध्यक्ष की कमान किसी ऐसे जुझारू ज़मीनी नेता के हाथ में दे देना चाहिए जो कांग्रेस संगठन का ढांचा पूरी तरह बदल सके पर आप सोच रहे होंगे इससे क्या होगा …
राहुल एक साफ्ट टारगेट है लेकिन मेरा मानना की जब वो एक नई यूपीए के टीम की रूप में लडाई लड़ेंगे तो वो बीजेपी समेत पूरे एनडीए पर भारी पड़ेंगे राहुल को प्रियंका, सुप्रिया, सचिन, आदित्य, अखिलेश, तेजस्वी, कन्हैया, जीतू ,जिग्नेश ,जगन , हार्दिक ,हुड्डा, और उनके जैसे 20 निडर और युवाओं की यूपीए की टीम बनाना चाहिए जो हर राज्य में एक वाइब्रेंट यंग अल्टरनेटिव प्रदान कर सके
राहुल को राज्यो के चुनाव पर ज्यादा फोकस नही करना चाहिए उन्हें सिर्फ 2024 लोकसभा के चुनाव को ध्यान रखकर रणनीति बनाना चाहिए उन्हें अगर मोदी को हराना है तो उनको उससे भी बेहतर रणनीति की आवश्यकता है 2013 से मोदी अभियान पुरुष बन गए है एक खत्म होता ही नही वो दूसरा शुरू कर देते है मोदी कोई नया काम नही कर रहे है वो बस महात्मा गाँधी की कॉपी कर रहे है इसे कम्युनिकेशन इंगेजमेंट कहा जाता है गाँधी भी एक आंदोलन खत्म होते ही दूसरे आंदोलन के रास्ते पर चल देते थे
राहुल को भी अपनी ऑडियंस के साथ लगातार इंगेजमेंट रखना होगा उन्हें लोगो मोदी सरकार की गलत नीतियों जैसे महँगाई , बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों को भूलने नही देना है राहुल को रघुरामन राजन जैसे अर्थशास्त्री को अपनी टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाकर मध्य वर्ग के साथ पॉलिटिक्स ऑफ होप करनी होंगी क्योकि भारत का वोटर केवल बेहतर कल के लिए वोट करेगा 2009 और 2014 का चुनाव इसका परफेक्ट यूजड केस है जँहा भारत के वोटर ने एक बेहतर कल के सपने को वोट दिया था
राहुल को बस एक अच्छी युवा टीम और एक बेहतर सपने के साथ सफर की शुरुआत कर देना चाहिए और विचारधारा से एक इंच भी समझौता नही करना चाहिए कांग्रेस एक आंदोलन से जन्मी पार्टी है कांग्रेस एक पार्टी नही ब्रांड है जो 100 साल से देश के हर आदमी के जेहन में है जिस दिन राहुल ने आज के युवा को यह विश्वास दिला दिया उनके पूर्वजों ने इस पार्टी को देश की बागडोर 65 साल तक क्यो सौपी थी उस दिन से बीजेपी फिर से सिर्फ व्यापारियों की पार्टी बनकर रह जायेगी
अपूर्व भारद्वाज

