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सरकार को सावधान करता राहुल का श्वेत पत्र !

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सुसंस्कृति परिहार
एक बार फिर राहुल गांधी ने कोरोनावायरस की तीसरी लहर आने से पूर्व एक पके हुए राजनीतिज्ञ की तरह जो श्वेत पत्र जारी किया है वह उनकी अहम जिम्मेदारी का परिचायक है। इससे पूर्व भी कई बार सरकार को वे महत्वपूर्ण सुझाव देते रहे हैं जिन पर तत्काल अमल तो नहीं हुआ पर देर सबेर उनके सुझावों पर  सरकार ने काम किया है भले उस पहल कदमी में राहुल का नाम नहीं लिया गया हो।याद होगा,कोरोनावायरस के आगमन से पूर्व जनवरी 2019 में वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कोरोनावायरस के दुष्परिणामों के प्रति सरकार को सचेत किया था पर उसे तवज्जो नहीं दी गई।नमस्ते ट्म्प और म०प्र०की कांग्रेस सरकार गिराने और अपनी बनाने की कवायद में कोरोनावायरस ने तब ज़ोर पकड़ा था और प्रवासी मजदूरों के जो हाल हुए उसे कौन नहीं जानता वे सदियों याद आएंगे? एक बात और इस दौरान स्पष्ट हुई है कि सरकार अपनी पब्लिसिटी और छवि निर्माण के लिए इतनी बेताब है कि उसे देश दुनिया में नए नए कोरोनावायरस के बढ़ते ख़तरे का आभास तो है पर वह टीकाकरण को ही  एकमात्र विकल्प मानकर काम कर रही है उसमें भी टीकाकरण की रफ्तार का प्रचार ज्यादा और काम कम है।सरकार का ध्यान बराबर लोग आकृष्ट कर रहे हैं लेकिन उस तरफ कोई ध्यान  नहीं ,पर्याप्त तैयारी की बात तो छोड़ ही दीजिए । ऐसे कठिन दौर में राहुल गांधी ने श्वेत पत्र जारी कर इस विषय पर जो सुझाव और  ज़रूरी परामर्श दिया है वह एक जागरूक विपक्ष की जिम्मेदारी बतौर ही है।
ज्ञात हो जिस दिन श्वेत पत्र  जारी किया गया उसी दिन दिल्ली में राष्ट्र मंच की बैठक थी जिसमें कई राजनैतिक पार्टियों के नेता और बुद्धिजीवी शामिल थे वे मंहगाई, बेरोजगारी और विपक्षी एकता पर बात करते रहे पर सरकार को कोरोनावायरस के प्रति सतर्क करने की कोई कारगर योजना पेश नहीं कर पाए।उन सबको इस श्वेत पत्र का समर्थन करना चाहिए।क्योंकि आगत चुनावों से पहले कोरोनावायरस की तीसरी ख़तरनाक लहर का सामना भी करना होगा।श्वेत पत्र जारी करने के दौरान राहुल गांधी ने बेबाक कहा कि इस श्वेत पत्र का मकसद उंगली उठाना नहीं है बल्कि हम गलतियों को इसलिए उभार रहे हैं ताकि समय रहते उन्हें ठीक किया जा सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल ने यह भी कहा कि तीसरी लहर आएगी ही, इससे पहले ही सरकार को पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि समय रहते वैज्ञानिकों ने दूसरी लहर की जो भविष्यवाणी की थी। सरकार ने कदम नहीं उठाए। एक बार फिर हम वहीं खड़े हैं, सब जानते हैं कि तीसरी लहर आएगी, इसलिए हम कह रहे हैं कि सरकार को तैयारी करनी चाहिए।    वे कहते हैं कि स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार करके और नागरिकों को युद्ध स्तर पर टीकाकरण करके तीसरी लहर की तैयारी करनी चाहिए ताकि वायरस को उत्परिवर्तित करने का ‘मौका’ न मिले।श्वेत पत्र पिछली लहरों के खिलाफ लड़ाई में “क्या गलत हुआ” यह पता लगाने के लिए एक COVID-19 मुआवजा कोष और एक आयोग का निर्माण होना चाहिए। हालांकि देश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े सवालों पर राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में क्या चल रहा है? उस पर बात कर कोरोना से ध्यान भटकाना नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि सरकार सभी राज्यों से समान व्यवहार करे. यह जिंदगी और मौत का सवाल है. सभी राज्यों को समान तरीके से टीका उपलब्ध करवाना चाहिए. इसमें पूर्वाग्रह नहीं आना चाहिए. बीजेपी सरकार-कांग्रेस सरकार में प्रतियोगिता नहीं करवानी चाहिए।उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए इनपुट है. अगर सरकार इसे पढ़ेगी तो उसे फायदा होगा. सरकार विपक्ष, विशेषज्ञ, लोगों की बात सुने. मनमोहन सिंह ने सुझाव दिया तो मजाक उड़ाया गया, बाद में वही कदम उठाए. खुले दिमाग से काम करना होगा, बंद दिमाग से नहीं. जो गलती हुई है उसे स्वीकार करना होगा. इसमें कोई दो राय नहीं कि सरकार आंकड़े छुपा रही है. मेरी राय में सरकारी आंकड़ों से 5 से 6 गुना ज्यादा मौत हुई 
कोरोना की दूसरी लहर पर पीएम के वक्तव्य पर राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना से मौत दो तरह की होती है. एक जिसे बचाया जा सकता था, लेकिन नहीं बचाया जा सका. दूसरा जिन्हें नहीं बचाया जा सकता था. 90 फीसदी ऐसे लोग मरे हैं, जिन्हें बचाया जा सकता था. इसका सबसे बड़ा कारण समय पर ऑक्सीजन की कमी थी, जबकि देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. प्रधानमंत्री के आंसू उन परिवारों के आंसुओं को नहीं मिटा पाएंगे. जिनके परिजनों की मौत हुई है, उन्हें पता है कि पीएम के आंसुओं ने उनके परिजन को नहीं बचाया, ऑक्सीजन बचा सकता था।

कुल मिलाकर राहुल की चिंता वाजिब है।श्वेत पत्र में दिए सुझाव बेशकीमती हैं उन पर भारत सरकार को अमल करना चाहिए तथा फर्जी आंकड़ों से अलहदा देश में मृत हुए तमाम लोगों के परिवारों के जीवन को बचाने उचित मुआवजा मिलना भी ज़रुरी है। टीकाकरण को प्रभावी बनाया जाए ।निजी और सरकारी के विभेद को खत्म कर सभी जगह नि:शुल्क टीके की व्यवस्था हो ।साथ ही नकली वेक्सीन पर नज़र रखी जाए क्योंकि दोहरी व्यवस्था ने कालाबाजारी को बेइंतहा बढ़ाया है ।महामारी की तीसरी लहर से निपटने इस व्यवस्था को समाप्त करना होगा वरना आपदा में अवसर का मूलमंत्र अपना काम करता रहेगा । निश्चित तौर पर राहुल की बात की अनदेखी मंहगी पड़ सकती है।उसे सुनना और अमल में लाना ही होगा।उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले ही मार्केटिंग शुरू कर दी थी। एक दो साल बाद जब देश कोरोना वायरस संक्रमण को हरा दे, तब जीत का ऐलान कीजिए। मैंने पहली और दूसरी लहर से बोला था, अब तीसरी लहर से पहले बोल रहा हूं। तैयारी शुरू हो जानी चाहिए।

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