
–-सुसंस्कृति परिहार
जुम्मा जुम्मा एक माह ही हुआ था राजस्थान में भारी बहुमत से जीती सरकार के एक्स मंत्री को कांग्रेस प्रत्याशी ने 12570वोटों से शिकस्त देकर यह सिद्ध कर दिया कि यहां कांग्रेस की लुटिया ईवीएम ने ही डुबाई है।दो चैनलों को छोड़कर मोदी मीडिया भी कांग्रेस की वापिसी की बात कह रहा था तब ये उल्टी गंगा कैसे बह गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए यह हार शर्मनाक है।जब मोदीजी का जादू सर चढ़कर बोल रहा हो तब ऐसी हार !वे कैसे सभी संसदीय सीट जीत पायेंगे। मोदीजी को तत्काल ऐसे मुख्यमंत्री को हटा देना चाहिए।दूसरे ये वही शर्मा जी जिन्होंने अपने भाषण में अटल जी की जगह मोदीजी को श्रद्धांजलि दे दी थी।जो उन्हें नागवार गुजरा। राजस्थान में ही शपथ के दौरान मोदीजी को मुख्यमंत्री कहा गया। शायद वे उन्हें माफ़ नहीं कर पाएंगे।
इस हार को भाजपा का वसुंधरा खेमा अपनी ताकत बता रहा है संभव है कि मंत्री सुरेन्द्र पाल को हराने इस खेमे ने भी कोशिश की हो किंतु कांग्रेस प्रत्याशी की जीत इस बात को पुख्ता करती है कि प्रदेश में कांग्रेस की हार की वजह मोदीजी की ईवीएम ही है जो इस इकलौते चुनाव में हैक नहीं हुई।
बहरहाल यदि कांग्रेस और भाजपा के रुष्ट खेमे के कारण भी यदि जीत हुई है तो यह भाजपा की नींद उड़ाने वाली है क्योंकि जिन स्थितियों में भाजपा राजस्थान में बंटी हुई है वैसी ही परिस्थितियां कमोवेश मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश में भी निर्मित हो चुकी है।ये क्षेत्र बड़े संसदीय क्षेत्र हैं। यहां भाजपा में असंतुष्ट धड़ा कहीं खुलकर तो कहीं चुप चुप बगावत पर उतारू है। सत्ता मद में डूबे अहंकारी दो लोग इससे अप्रभावित नज़र आते हैं उन्हें ईवीएम और चुनाव आयुक्त पर पूरा भरोसा है।यही वजह कि वे 400पार की बात कर रहे हैं।
इसीलिए समय रहते उनके भरोसे के इन साथियों पर मिलजुल कर प्रहार करने होंगे इसलिए ही उन्होंने तीन राज्यों की जीत को भाजपा की जीत ना मानते हुए अपने मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री मंत्रीमंडल बनाए है यहां तक उनके विभागों का वितरण भी साहिबों की इच्छा के मुताबिक हुआ है।कहने का मतलब ये कि राज्य के तमाम अधिकार छीन लिए गए हैं।ऐसे राज्यों का मुख्यमंत्री बनने का कोई मतलब नहीं। फलस्वरूप ज़िद करिए सब मिलकर, चुनाव निष्पक्ष हों इसके लिए ईवीएम पर वोटिंग प्रतिबंधित हो बैलेट से मतदान की व्यवस्था हो। इक्के दुक्के चुनाव जीतकर हर्ष ना मनाएं। स्वस्थ लोकतंत्र की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।