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*राम राज्य vs आधुनिक लोकतंत्र —एक  दृष्टि* 

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 – तेजपाल सिंह ‘तेज’   

आखिर में सवाल यही है: क्या हमें राम जैसा राजा चाहिए या राम जैसे नैतिक मूल्य? लोकतंत्र कहता है कि राजा चाहे कोई भी आए, मूल्य कायम रहने चाहिए। राम राज्य कहता है कि मूल्य राम में थे। लोकतंत्र कहता है कि मूल्य संविधान में होने चाहिए। और शायद इसी के बीच आज का भारत खड़ा है—राम की मर्यादा और संविधान की सर्वोच्चता, दोनों को साथ लेकर। लेकिन दिशा वही सही होगी जहाँ राम राज्य का सपना नारा न बने, बल्कि न्याय और संवेदनशीलता की निरंतर जिम्मेदारी बन जाए। यही लोकतंत्र को आदर्श बनाएगा—राजा नहीं, जनता की भागीदारी से।

(https://youtu.be/3kjCOseRGps?si=OH3aelpP3TvkC4ZR)

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