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बाबावाद के शिखर पुरुष रामदेव!

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सुसंस्कृति परिहार 

 यूं तो हमारा देश बाबाओं का आदिकाल से उपासक है आज भी बाबाओं की पूछ परख ज़्यादा है खासकर डरी हुई महिलाओं , तथाकथित उच्च पदों पर आसीन नेताओं, अधिकारियों तथा चमत्कार को भगवान स्वरुप माने वाले समाज में ।इनकी बदौलत आसाराम, राम-रहीम जैसे अनेक बाबा भारत भूमि पर ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूज्य और लोकप्रिय बने हुए । यहां तक कि बाबा और साध्वियां आजकल संसद की शान बनी हुई हैं। पिछले कुछ वर्षों से तो इन बाबाओं की उपस्थिति में मुख्यमंत्रियों की शपथें भी होने लगी हैं ।अब तो बाबाजी फलां फलां राजनैतिक पार्टी के नाम से जाने जाते हैं। हालांकि भारतीय राजनीति से पहले राजाओं के भी अपने बाबा होते थे जिनसे परामर्श लिया जाता था।अब इनका स्वरुप बदल गया है। कहने का आशय यह कि इस बदलते ज़माने में  बाबाओं में भी कई तरह के बदलाव देखने मिल रहे हैं।इस बदलाव में बाबा रामदेव ने जिस तरह से अपनी सरकार बनवाकर कारोबार बढ़ाया,फायदा लिया,कि आज अडानी- अंबानी से ज्यादा मुनाफा लेकर ज़मीन से निकला यह बाबा अडानी अबानियों के साथ तनकर खड़ा हो गया ।ज्ञात हो, मुकेश अंबानी के साथ पतंजलि संस्थान के बालकृष्ण शीर्ष दस भारतीय अमीरों में शामिल हो चुके हैं।यह रामदेव का ही प्रताप है। इस अमीर बाबा को काफी शोहरत योग और आयुर्वेद औषधियों के लिए मिली । 

      लेकिन आजकल अन्तर्राष्ट्रीय जगत में  योग की धूम मचाने वाले रामदेव बाबा को कोरोना में कारगर कोनोरिल टेबलेट मामले ने परेशान कर रखा है ।  उन्हें सारे जगत में झूठे ठग के रुप में देखा जा रहा है ।उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आ गई है क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय मामला बन गया है ।धसकी वजह योग गुरु बाबा रामदेव ने बीते 19 फ़रवरी को कोरोनिल नामक एक दवा लांच किया था। इस कार्यक्रम में बाबा रामदेव के साथ केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन और नितिन गडकरी भी मौजूद थे। बाबा रामदेव ने कोरोनिल को लेकर दावा किया था कि यह दवा विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित है। लेकिन WHO के द्वारा इस दावे को ख़ारिज किए जाने के बाद बाबा रामदेव की गिरफ़्तारी की मांग उठने लगी है। 

      इधर आयुष मंत्रालय की मंजूरी के बिना कोरोना वायरस की दवा ईजाद करने के आरोप में मुजफ्फरपुर  के अहियापुरवासी तमन्ना हाशमी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है। इसमें पतंजलि वि वि  शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव व पतंजलि संस्थान के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण को नामजद किया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि निर्धारित की है। वादी ने आरोप लगाया कि दोनों ने कोरोना की दवा को ईजाद किया। जबकि भारत सरकार की आयुष मंत्रालय ने दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है।मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में समाजसेवी और भिखनपुरा निवासी तमन्ना हाशमी ने एक परिवाद पत्र दायर कर पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव तथा पतंजलि संस्था के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण पर आरोप लगाया है कि इन दोनों ने कोरोना वायरस दवा बनाने का दावा कर देश को धोखा दिया है। कोरोना वायरस को ‘कोरोनिल’ दवा से ठीक करने के दावे को लेकर योग गुरू बाबा रामदेव की मुश्किलों थमने का नाम नहीं ले रही है।राजस्थान में इस दवा के दावे को लेकर बाबा रामदेव सहित पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण और तीन अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। कोरोना वायरस की दवा के तौर पर कोरोनिल को लेकर भ्रामक प्रचार करने के आरोप में बाबा रामदेव सहित चार लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

दरअसल पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण सहित बाबा रामदेव पर जिसने केस दर्ज करवाया है वो पेशे से वकील हैं जिनका नाम बलराम जाखड़ है बलराम जाखड़ ने कहा है कि बाबा रामदेव सहित जिन पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज कि गयी है वो कोरोनिल के भ्रामक प्रचार के मामले में और देशवासियों को गुमराह करने के आरोप में की गयी है। उनपर एफआईआर आईपीसी की धारा 420 सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही एफआईआर में योगगुरु रामदेव और बालकृष्ण के अलावा वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, निम्स के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह तोमर और निदेशक डॉ. अनुराग तोमर को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

इधर पतंजलि ने निम्स जयपुर में कोरोनिल दवा का परीक्षण करने का दावा किया था। जिसके बाद निम्स के अध्यक्ष और चांसलर डॉ. बीएस तोमर ने गुरुवार को कहा था कि हमारे पास मरीजों पर परीक्षण करने के लिए सभी आवश्यक अनुमति थी। परीक्षण से पहले CTRI से अनुमति ली गई थी, जो ICMR का एक निकाय है। मेरे पास इसके दस्तावेज हैं। साथ ही उन्होंने इस बात की पुष्टि भी कि थी कि निम्स जयपुर में 100 मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था। जिसमें 3 दिनों में 69% मरीज ठीक हो गए थे और 7 दिनों में 100% मरीज ठीक हो गए थे।

बता दें कि बाबा रामदेव ने दावा किया था कि इस दवा का जिन मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया, उनमें 69 फीसदी मरीज केवल 3 दिन में पॉजीटिव से निगेटिव और सात दिन के अंदर 100 फीसद रोगी कोरोना से मुक्त हो गए। दवा का प्रयोग 280 लोगों पर किया गया।इसके लिए बाबा ने हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘दिव्य कोरोनिल टैबलेट’ दवा लॉन्च की थी। पतंजलि का दावा है कि कोरोनिल कोरोना के इलाज में कारगर है। जिसके तुरंत बाद आयुष मंत्रालय ने इस दवा पर रोक लगा दी है ।

इधर बाबा रामदेव की कोरोनिल को झटका ये भी लगा है कि इसकी ब्रिकी पर महाराष्ट्र में रोक लगा दी गई है ।जबकि गृह मंत्री ने कहा  है  – इसे WHO, IMA प्रमाणपत्र के बिना बेचने नहीं देंगे”

     देखना यह है, बाबा रामदेव की कोरोनिल टेबलेट इतनी जोखिम के बीच अपना रुतबा कायम रखती है या नहीं।भारत सरकार को चाहिए कि इस मसले पर पहल कर टेबलेट को टेस्ट कर लांच कराए WHO और IMA से प्रमाणपत्र दिलाने में मदद करे।  और यह देशी औषधि आमजन को उपलब्ध कराए।

              दरअसल बाबा ने केन्द्रीय मंत्रियों को साथ लेकर WHO और IMAसे प्रमाणित बताकर जिस तरह कोरोनिल का कारोबार करने की कुचेष्टा की है वह यह सिद्ध करता है टेबलेट में निश्चित खोट है।वरना बाबा को झूठ का सहारा ना लेना पड़ता। लगता तो यही है बाबा का भी शीर्ष से ज़मीन पर आने का समय आ गया ।अब तक मिलावट के कई मामले सामने आए थे तब देश का मामला था और बाबा को सरकारी संरक्षण प्राप्त था अब की बार अंतररराष्ट्रीय मामला है और ऊंट पहली दफ़े पहाड़ के नीचे आया है। 

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