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एक कविता:बलात्कार

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बलात्कार के बाद
बाहर फेंक दी गई
वह
जूठी पत्तल की तरह
और बाहर
खड़े कुत्तों ने
नोंच डाला था
उसे
उस रात

न्याय के लिए
उसने
दरवाज़ा खटखटाया
पुलिस का
संसद का
न्यायालय का
और
धर्म का

मगर
अफ़सोस !
हर दरवाज़े पर
बंधे थे वही कुत्ते
जिन्होंने
नोंच डाला था
उसे
उस रात ।

                          -अशोक कुमार
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