अग्नि आलोक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत की स्वतंत्रता !

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सुरैश खैरनार 

सोमवार दिनांक 13 जनवरी को इंदौर में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन की अध्यक्षता में आयोजित राममंदिर आंदोलन में भाग लिए हुए लोगों के सत्कार समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत ने कहा कि भारत को असली स्वतंत्रता 22 जनवरी 2024 के दिन मिली है ! इसी तरह बॉलीवुड सिनेमा की एक अभिनेत्री कंगना रणौत ( नई लोकसभा में वह हिमाचल प्रदेश से भाजपा के तरफसे सदस्य भी है. ) उसने भी अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार – बार कहा कि “भारत को असली स्वतंत्रता नरेंद्र मोदी प्रथम बार ( 26 मई 2014 ) प्रधानमंत्री बनने के बाद ही भारत स्वतंत्र हुआ है”. मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मनुस्मृति के दुसरे अध्याय के 250 वे श्लोक का उध्दरण देते हुए कहा कि

“एतद देश प्रसुतस्य सकाशाद आग्रजन!

स वंस्वंचरित्र शशक्षिप्नथ धृभवया !

सववमानवा “

                (जिसमें सिर्फ ब्राम्हण के श्रेष्ठत्व का महिमामंडन नहीं किया किया है . उसमे ब्राम्हण ही समस्त विश्व का सिर्फ मालिक ही नहीं है तो वह समस्त विश्व के सत्ता का अधिकारी भी है ) और मोहन भागवत यह श्लोक देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के उपस्थिति में बोल रहे थे जो कि दोनों भी गैरब्राम्हन जाति के हैं ! और उस दिन को एक साल के पश्चात वहीं मोहन भागवत उसी मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कह रहे हैं कि भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में अब 22 जनवरी इस दिवस को मनाना चाहिए ! भारत की स्वतंत्रता के 78 वर्ष के बाद ही सही संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत भी अपने पूर्व संघ प्रमुख जिन्होंने सौ वर्ष पहले ही संघ भारत की स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं था, इसी बात की पुष्टि कर रहे है.

 

              संघ की स्थापना भारत के स्वतंत्रता के बाईस वर्ष पहले हुई थी. और इन बाईस सालों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नितिगत रुप से तय करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन से दूर रहने का निर्णय लिया था. संघ के संस्थापक तथा प्रथम प्रमुख डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार 1925 से उनके मृत्यु 20 जून 1940 में होने तक थे. और उनके बाद श्री. माधव सदाशिव गोलवलकर की मृत्यु (1973) तक वह प्रमुख रहे. मतलब संघ के अबतक के सभी प्रमुख से सर्वाधिक समय प्रमुख रहे हैं . उन्होंने जब कार्यभार संभाला तब 50 शाखाएं थी और एक लाख स्वयंसेवक थे ! उनकी मृत्यु हुई उस समय दस हजार शाखाएं और दस लाख स्वयंसेवक थे. लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन से दूर रहने का सिलसिला गोलवलकर तक जारी रहा. इसलिए वर्तमान प्रमुख श्री. मोहन भागवत ने सोमवार को इंदौर में राममंदिर आंदोलन के लोगों के अभिनंदन समारोह में अपने भाषण में कहा कि 22 जनवरी 2024 के दिन अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिवस को भारत की स्वतंत्रता का दिवस मनाने की बात की है !

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