शशि कांत गुप्ते
सियासत में अभीतक तो सिर्फ बाग़ियों का शोर था। अब तो दागियों का शोर भी सुनाई देने लगा है।
इस मुद्दे पर प्रख्यात शायर वसीम बरेलवी का यह शेर मौजु है।
शोर होता था तो कानों से,सुना जाता था
अब तो ये हाल हुआ है कि,नजर आता है
जब से राजनीति में हो Horse Trading मतलब अश्व व्यापार शुरू हुआ है,तब से आवाम की मजबूरी हो गई है कि, नागनाथ या साँपनाथ में से किसी एक को चुनना है?
राजनैतिक दलों में दागियों की संख्या सर्वेक्षण एजेंसियों द्वारा ज्ञात होती है।
प्रत्येक राजनैतिक दल में दागियों के प्रतिशत की संख्या,सांख्यिकी (Statistics) के माध्यम से सार्वजनिक होने पर चाल,चरित्र,और चेहरा वाला स्लोगन थोथा साबित होता है।
नागनाथ और साँपनाथ को समझने के लिए।आवाम को डिस्कवरी (Discovery) चैनल जरूर देखना चाहिए और सर्पों की प्रजातियों के बारे में जानना चाहिए।
सर्पो की कुल कितने प्रजातियां होती है?इनमें कौन सी प्रजाति के सर्प ज्यादा विषैले होतें हैं? विषैले सर्पो में कम विषैले सर्प कौन सी प्रजाति में है?
हाँ आवाम को दो मुँह वाले सर्प की प्रजाति के बारे में जरूर जानना चाहिए? ऐसा कहा जाता है कि, यह दो मुँह वाली प्रजाति सिर्फ भारत में ही पायी जाती है? इस दो मुँह वाले सर्पो की प्रजाति की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी बहुत है। इस प्रजाति के बारे में ऐसा कहा जाता है कि, इस दो मुँह वाले प्रजाति के सर्प वर्ष भर में,पहले छः महीनों एक मुँह से खातें हैं,और दूसरे छः महीनों में मुँह बदलतें है।
सर्प प्रजाति में एक भारी भरकम सर्प होता है,इसे अजगर कहतें हैं। यह खाता नहीं सीधे निगल लेता है।यह तो हुई सामान्यज्ञान की चर्चा हुई।
बहरहाल मुद्दा तो राजनीति में दागियों का है। सर्वेक्षण एजेंसी के साहस को धन्यवाद देना चाहिए। जिन दागियों की संख्या सांख्यिकी के माध्यम ज्ञात हो रही है। वे तो On Paper दागी हैं। बहुत से जिलाबदर होकर कानूनी दांवपेंचों का बखूबी इस्तेमाल कर बरी हो गए हैं। ऐसे लोगों कों तो महत्वपूर्ण पद को सुशोभित करने में भी कोई संकोच नहीं होता है?
राजनीति में तबतक कोई भी व्यक्ति आरोपी होता है जबतक उसपर कोई उंगली नहीं उठती है। यदि कोई अपराधी भी है और उसपर मुकद्दमा कचहरी में विचाराधीन है।ऐसा व्यक्ति भी चुनाव में उम्मीदवार हो सकता है।
आजकल राजनैतिक दल के पास एक विशेष तरह की वाशिंग मशीन है। यह मशीन सन 2014 के बाद बहुत प्रचलन में आई है। यह वाशिंग मशीन मैले कपड़े नहीं धोती है। यह वाशिंग मशीन अपराधियों के दागों को समूल नष्ट कर देती है।
सर्वेक्षण एजेंसियों का सर्वेक्षण सिर्फ सार्वजनिक रूप से दागियों की संख्या प्रस्तुत करने तक का महत्व रखता है।
कारण ‘राज’नीति में सलग्न लोगों की स्वयं की सर्वेक्षण एजेंसी होती है। जो सच को झूठ और झूठ को सच साबित करने की क्षमता रखती है।
सन दो हजार चौदह के बाद प्रचलन आई वाशिंग मशीन तो विपक्ष में रहते भ्रष्ट्रतम व्यक्ति के सारे पाप धो देती है। और उसे पाक साफ कर देती है। लेकिन जो विरोधी हमेशा विरोध करता है, उसे पडौसी देश पाक भेजने की धमकी भी दी जाती है?
राजनीति में चुनाव की घोषणाओं के बाद बागी होने का मौसम शुरू हो जाता है। दागियों के लिए यह मौसम बारह मासी होता है।
सम्भवतः अब राजनैतिक दलों के मुख्यालयों पर एक सूचना संदेश बोर्ड पर स्थाई लगा रहेगा।
इस सूचना बोर्ड पर एक गाने की पैरोड़ी लिखी होगी।
सन 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म पूरब पश्चिम का गीत है। इसे लिखा है गीतकार इंदिवरजी, ने।
कोई जब तुम्हारे पर हो संगीन आरोप
तुम्हे कोई भी दल से बाहर कर दे
तब तुम हमारे दल आना निःसंकोच
हमारे दल के द्वार खुले हैं खुले ही रहेंगे तुम्हारे लिए
अभी तुम्हारी,हमें ज़रूरत है बहुत
दर्पण तुम्हें जब डराने लगे
कानूनी जांच का डर सताने लगे
कोई शर्त होती नहीं सियासत में
जब अपनी नज़र में ही गिरने लगो
भ्रष्ट्राचार के अंधेरों में ही घिरने लगो
तब तुम हमारे दल आना निर्भय होकर
हमारे दल के द्वार खुले हैं खुले ही रहेंगे
इसीतरह एक धार्मिक स्थल के सभगृह के द्वार पर हमेशा के लिए
एक सूचना पढ़ने को मिलती है।
मेरा घर सभी के लिए खुला है
जो चाहे वह आ सकता है
शशिकांत गुप्ते इंदौर

