साल 2021 मुल्क के मशहूर ओ मारूफ़ शायर, नग़मा निगार साहिर लुधियानवी का जन्मशती साल था। इस मौके पर ‘जनवादी लेखक संघ’ के मुखपत्र ‘नया पथ’ मैगजीन (त्रैमासिक) का बहुत उम्दा नंबर पिछले दिनों निकला है। इस अंक की जितनी तारीफ़ की जाए, उतना ही कम है।
साहिर की नज़्मगोई, ग़ज़लगोई और नग़मा निगारी को समझने और उनकी मुक़म्मल शख़्सियत को बहुत अच्छी तरह से जानने के लिए इससे बेहतर कोई दूसरी किताब नहीं हो सकती। इसे मैगज़ीन के बजाए यदि मैं किताब कह रहा हूँ, तो इसके पीछे एक बड़ी वजह भी है। एक मैगज़ीन में इतना कुछ समेट लेना, वाकई सुलझी हुई संपादकीय दृष्टि और टीम वर्क का बेहतरीन नमूना है। इस नायाब नंबर का संपादन वरिष्ठ उर्दू लेखिका अर्जुमंद आरा और रविकांत ने किया है। एक लिहाज़ से कहें, तो पूरी मैगज़ीन मैं अर्जुमंद आरा की मेहनत, नज़रिया और सोच साफ़ नज़र आती है। मैगज़ीन में शामिल ज़्यादातर लेखों का अनुवाद उन्होंने ही किया है। अनुवाद भी पूरी तरह से बेदाग। तर्जुमे की ज़बान पूरी तरह से हिंदुस्तानी है। 360 पेज़ के इस विस्तृत अंक में साहिर लुधियानवी की ना सिर्फ मक़बूल नज़्में, ग़ज़लें और नग़में शामिल हैं, बल्कि उनकी कुछ ख़ास तस्वीरें भी शामिल हैं। अंक का एक और आकर्षण साहिर लुधियानवी के चुने हुए लेख हैं। जिसमें उनका मशहूर लेख ‘जंग और नज़्म’, साल 1948 में ‘सवेरा’ मैगज़ीन में लिखा हुआ संपादकीय और ‘तरक़्क़ीपसंद अदीब और देशप्रेम’, ‘तरक़्क़ीपसंद सत्यार्थी’ जैसे शानदार लेख और शामिल हैं।
इंटरव्यू कि यदि बात करें, तो इस मैगजीन में बलवंत सिंह और नरेश कुमार शाद के इंटरव्यू हैं, जो अपने समय में काफी चर्चित रहे थे। किसी भी लेखक को अच्छी तरह से जानने के लिए उसके समकालीनों की नज़र से देखना-जानना एक बेहतर विकल्प है। तरक़्क़ीपसंद तहरीक के हमसफ़र कैफ़ी आज़मी, अली सरदार जाफ़री, ख़्वाजा अहमद अब्बास, जांनिसार अख़्तर, राही मासूम रज़ा, महेंद्रनाथ वगैरह ने साहिर की बेजोड़ शख़्सियत पर दिल से कलम चलाई है। कमोबेश यह सभी लेख हमारा एक अनमोल सरमाया है, जिनका बड़ी होशियारी से तर्जुमा किया गया है। यही नहीं एक अलग खंड में अनवर ज़हीर अंसारी, अली अहमद फ़ातमी, शरद दत्त, गौहर रज़ा, लइक़ रिज़वी आदि जाने-माने अदीबों ने साहिर लुधियानवी की शायरी के अलग-अलग पहलू पर विस्तार से लिखा है। ‘ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी’ खंड के तहत रविकांत, सुनील भट्ट, अतहर फ़ारुक़ी, गीतकार हसन कमाल आदि ने साहिर लुधियानवी के फिल्मी गीतों पर बात की है। इस खंड में संगीतकार रवि का वह इंटरव्यू भी शामिल है, जिसमें उन्होंने साहिर लुधियानवी के फिल्मी लेखन पर विस्तार से बात की है। मैगज़ीन के आखिरी खंड में शायर हबीब जालिब, क़तील शिफ़ाई, रा’ना सहरी, नसीम अफ़ज़ल ने अपनी नज़्मों से साहिर लुधियानवी को शायराना खिराजे अकीदत पेश की है। साहिर की शायरी और उनके नग़मों के शैदाइयों के लिए ‘नया पथ’ का यह अंक, वाक़ई एक तोहफ़े की तरह है और यह तोहफ़ा उन्हें महज़ 100 ₹ दाम चुका कर आसानी से मिल सकता है। इस बेमिसाल और नायाब अंक के लिए साथी संजीव कुमार से इस मोबाइल नंबर 98185 77833 पर संपर्क किया जा सकता है। ज़ाहिर है कि जब यह अंक प्रेस से बाज़ार में आया, तो इसका जबर्दस्त ख़ैर-मक़दम हुआ। आलम यह है कि अब अंक की लिमिटेड कॉपी बची हैं। जो साथी इसे अभी तक अपने लिए नहीं मंगवा पाये हैं, वह तुरंत सम्पर्क करें। वरना उन्हें इस अंक की फ़ोटो कॉपी से ही काम चलाना होगा।

