विश्वबंधु कमलगुप्ता
नगर निगम द्वारा हर के मुख्य मार्गों पर सड़क के एक तरफ या दोनों तरफ लोहे के एंगल ,पाईप लगाकर व रोड़ जेन्ट्री एवं बड़े बड़े भवनों पर विज्ञापन के कलर फुल व लाईट लगें साईन बोर्ड लगवाकर विज्ञापन एजेन्सीज से लाखों रुपया महिना किराये का व विज्ञापन शुल्क का लिया जाता है।इससे हर वर्ष नगर निगम करोड़ों रुपयों की आय करती है। बस यही से नगर निगम व शासन की निगाह में विज्ञापन से आमदनी का चस्का लग गया है। जरा गौर किजिये इन रोड़ साइड विज्ञापन को देखता कौन है,इन्हें अक्सर वाहन चालक वाहन चलाते चलाते देखते है। और विज्ञापन भी इस तरह से तैयार किये जाते हैं कि बरबस नजर पड़ ही जाती है, ऐसे में दुर्धटना होने की सम्भावना अधिक रहती है।
“नजर टिकीऔर दुर्धटना घटी”
आम जनता की जान बचाने के लिये ये रोड़ साइड विज्ञापन बंद होना चाहिए।नगर निगम व शासन ने विज्ञापन के नाम पर ज्यादति कर रखी है।आम जनता व व्यापारियों की दुकानो व व्यवसाय स्थलो की पहचान व विक्रय सामग्री व सेवा की जानकारी के बोर्ड लगाने पर भी टेक्स लिया जा रहा ।व्यापारी या सेवा दाता पहले से ही अत्याधिक टेक्स अदा कर ही रहा है। कल को नगर निगम कहेगा घर के बाहर लगी नेम प्लेट का भी टेक्स दो। शहर के विकास के लिये सात हजार करोड़ रपये कम पड़ रहे हैं क्या। आखिर इतने रुपये जाते कहां है।।फ्रांस के विश्व प्रसिद्ध शहर पेरिस के विकास में प्रतिवर्ष मात्र 300 करोड़ (भारतीय मुद्रा में) बजट खर्च होता है जबकि इन्दौर नगर निगम का वर्ष 2022-23 का बजट 7262 , करोड़ रुपयों का है।तुलना करके देखें कहां पेरिस और कहां इंदौर और बजट में जमीन आसमान का अंतर।
नगर निगम को सम्पत्ति कर के अलावा कोई टेक्स नहीं लेना चाहिये। सम्पत्तिकर भी सिर्फ इसलिये लिया जाता है कि नगर निगम शहर में सफाई रखें,जल मल की निकासी करें,सड़क व सुगम यातायात व्यवस्थित करें और रात्रि में सड़को पर स्ट्रीट लाइट जले। नगर निगम द्वारा शहर के नागरिको से सम्पत्ति कर के अलावा जल मल निकासीकर, व्याव्यापक स्वच्छताकर,शिक्षा व उपकर सम्पत्ति व वाहन के पंजीयन पर शुल्क व
पार्किंग शुल्क,बगीचो व जू पर शुल्क जल कर ,मकान का नक्शा दाखला स्वीकृति की फीस विवाह व जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र का शुल्क कचरा शुल्क मेले ठेले पर शुल्क,नर निगम के मार्केट व सम्पतियों का किराया।व्यवसाय पंजीन, फूड़ लायसेंस फीस ,लीज रेंट ,विज्ञापन शुल्क, हाल, संभागार का किराया, चालानी आय,दुकान लायसेंस गुमास्ता व स्थापना शुल्क, कालोनी व टाउनशीप विकास शुल्क, बेजटरमेंट चार्ज, शासन से आक्ट्राय की क्षतिपूर्ति, समय समय पर प्रदेश व केन्द्र की योजनाओं की मद में प्राप्त होने वाली राशी आदि,आदि।हद ही पार हो गई टेक्सों और शुल्कों की। यदि दुकानदारों व्यवसायियों और सेवादारों से बोर्ड लगाने का शुल्क नहीं लिया जाये तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।वे यूं ही बहुत टेक्स देते हैं।
“शासन व नगर निगम दुकानदारों, व्यवसायियों से साईन बोर्ड पर शुल्क वापस ले”
विश्वबंधु कमलगुप्ता एडवोकेट इंदौर

