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गणतंत्र का मतलब गनतंत्र नहीं है

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गणतंत्र दिवस आने से एक हफ्ते पहले से रेडियो और टीवी पर देश भक्ति के गाने और कार्यक्रम आने लगते हैं

ज्यादातर देशभक्ति  गीतों का संबंध सेना सिपाही उसकी वीरता बलिदान कुर्बानी युद्ध पड़ोसी दुश्मन देश के दांत खट्टे कर देना उसको हराने से जुड़े हुए होते हैं

वैसे तो अपने देश से प्यार करने के लिए किसी के दांत खट्टे करने या उस को हराने की कोई जरूरत नहीं है

आप अपने देश की मिट्टी पर्यावरण नदी समुंदर यहां के लोग यहां के दलित आदिवासी अल्पसंख्यक ईसाई मुसलमान भिखारी कोढ़ी वेश्या हिजड़े सब से प्यार कर सकते हैं उनका ख्याल रख सकते हैं उनके बेहतरी के लिए काम कर सकते हैं

इसके लिए आपको पाकिस्तान से नफरत करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है

पहली गलत चीज तो हमारे दिमाग में यह डाली गई है कि देश भक्ति का मतलब मारना काटना होता है और दूसरे को हराना होता है और अपने देश को दूसरे से जिताना होता है

इसलिए देश भक्ति का ख्याल आते ही हमारे दिमाग में बंदूक सेना सिपाही पड़ोसी देश की हार उसका मिट जाना आता है

दूसरी बात यह है कि असल में गणतंत्र दिवस का अर्थ है इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था

संविधान लागू होने का संबंध वीरता बहादुरी या मारकाट से बिल्कुल नहीं है

गणतंत्र दिवस का संबंध भारत के संविधान और उसके लागू होने से है

हमारी सरकार हम को मूर्ख बनाती है

क्योंकि इसको संविधान के हिसाब से चलना नहीं है

इसलिए यह नहीं चाहती कि जनता संविधान के बारे में बातें करे और इस बात की जांच करे कि क्या हमारे देश में हमारा संविधान पूरी तरह से लागू हुआ है या नहीं ?

क्या भारत का कोई भी नागरिक अपने दिल पर हाथ रख कर कह सकता है कि भारत का संविधान इस देश में सरकार के द्वारा पूरा पूरा लागू किया जा रहा है

सरकार बिल्कुल नहीं चाहती कि नागरिक यह सवाल उठाएं

अर्णव को एक हफ्ते में जमानत दी जाती है और सिद्धिक कप्पन मुसलमान होने की वजह से 2 साल से जेल में सड़ रहा है और यह सुप्रीम कोर्ट कर रहा है

भारत के नीति निर्देशक तत्व कहते हैं कि सरकार नागरिकों के बीच समानता बढ़ाने की दिशा में काम करेगी

लेकिन हमारी सरकारें आदिवासियों और किसानों की जमीन छीनकर बड़े-बड़े पूंजी पतियों को देती है लाखों लोगों को गरीब बनाकर एक आदमी को अमीर बनाती है जो संविधान का पूरी तरह से उल्लंघन है

पर्यावरण को नष्ट करने वाले पूंजी पतियों के उद्योगों को लगातार हरी झंडी दी जा रही है

धर्मनिरपेक्षता और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के ऊपर मुकदमें किए जा रहे हैं उन्हें जेलों में डाला जा रहा है

सरकार बिल्कुल नहीं चाहती कि जनता इस सब के बारे में सवाल उठाए

इसलिए सेना वीरता युद्ध पाकिस्तान उसकी हार हमारी जीत जैसे फर्जी मुद्दे 26 जनवरी के साथ जोड़ दिए गए हैं और पूरा टीवी और रेडियो इस काम में लगा हुआ है

आप सब अपनी सोच को सरकारी प्रचार से आजाद कीजिए 26 जनवरी को संविधान लागू करने की मांग के दिन के रूप में मनाना शुरू कीजिए

गणतंत्र दिवस का अर्थ सेना की वीरता नहीं है संविधान का लागू होना है

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