हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! पार्लियामेंट के दोनों एवानों यानी राज्य सभा और लोक सभा में राष्ट्रपति के खुतबे (अभिभाषण) पर हुई बहस का असल सवाल यह था कि इस सरकार में दो भारत बन रहे हैं। एक जिसमें गरीब ज्यादा गरीब हो गया और दूसरा जिसमें चंद अमीरों ने देश की अस्सी फीसद से ज्यादा इमलाक पर कब्जा कर लिया। दूसरा अहम सवाल था बेरोजगारी और महंगाई का। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा और राज्य सभा दोनों में जवाब देते हुए बड़े पैमाने पर लफ्फाजी की और झूट का सहारा लिया। दोनों ही एवानों में उन्होने कांग्रेस को ही अपने निशाने पर रखा और देश में अब तक जितनी खराबियां आई हैं उन सबके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार करार दे दिया। उनके जवाब पर राहुल गांधी ने कहा कि मोदी कांग्रेस से बहुत डरे हुए हैं इसीलिए हर वक्त कांग्र्रेस के खिलाफ ही बोलते रहते हैं। पार्लियामेंट में मोदी ने दावा किया कि कोविड के दौरान उनकी सरकार ने दुनिया के देशों के मुकाबले सबसे अच्छा काम किया। साथ ही उन्होने यह इल्जाम भी लगा दिया कि कोरोना के दौरान कांग्रेस ने मुंबई में और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बड़़ी तादाद में लोगों को शहर छोड़कर अपने-अपने घर जाने के लिए उकसाया ताकि वह लोग अपने गांवों में जाकर कोरोना फैला सकें। मोदी ने कहा कि झारखण्ड में कांग्रेस पिछले दरवाजे से सरकार में शामिल हुई है। उन्हें शायद यह याद नहीं रहा कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में तो उन्होने जम्हूरियत लूट कर अपनी सरकारें बनवाई। बेरोजगारी पर जवाब देने के बजाए वह यह बताते हैं कि तमिलनाडु, मगरिबी बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसी रियासतों में कांग्रेस कितने सालों से सत्ता से बाहर है चूंकि वह झूट और लफ्फाजी का सहारा ले रहे थे इसलिए उन्हें यह ख्याल भी नहीं आया कि कांग्रेस के सत्ता से बाहर रहने वाली जिन रियासतों का नाम वह ले रहे हैं उनमें गुजरात के अलावा बाकी प्रदेशों में उनकी पार्टी भी कहीं दिखाई नहीं देती। केरल में तो उनकी पार्टी का एक भी एमएलए या एमपी नहीं है। इस हकीकत के बावजूद उन्होने महज लफ्फाजी में लोक सभा और राज्य सभा मिलाकर पार्लियामेंट का तकरीबन साढे तीन घंटे का वकत बर्बाद कर दिया।
मोदी ने कहा कि अगर कांग्रेस न होती तो देश को इमरजेंसी का दाग न लगता, सिखों का कत्लेआम न होता और वह तमाम ऐसे काम न होते जिससे देश का नुक्सान हुआ है। वह यह कहने की हिम्मत नहीं कर सके कि अगर महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चन्द्र बोस, वल्लभ भाई पटेल और डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद की कांग्रेस न होती तो देश शायद आज भी गुलाम होता क्योकि उनको पैदा करने वाले आरएसएस और हिन्दू महासभा ने तो आजादी की लड़ाई के दौरान भी अंग्रेजों का साथ दिया था और 1942 में गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की मुखालिफत करते हुए इन लोगों ने अंग्रेजों को खत लिखा था कि वह इस आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं और कम्पनी बहादुर का साथ देंगे। लोक सभा-राज्य सभा दोनों में ही मोदी ने बार-बार कहा कि वह आज कांग्रेस को सुनाने की ही तैयारी करके आए हैं।
मोदी ने दावा किया कि कोविड-19 के दौरान उनकी सरकार ने बड़ी तादाद में रोजगार फराहम किए। अगर सरकार ने रोजगार फराहम किए थे तो फिर देश के अस्सी करोड़ लोगों को उन्होने मुफ्त में गल्ला क्यों तकसीम कराया। उनके इस कदम से तो जाहिर होता है कि देश में अस्सी करोड़ लोग ऐसे हैं जो अपना पेट भी नहीं भर सकते और उन्हें मुफ्त के गल्ले के सहारे रहना पड़ता है। कोविड के दौरान मुंबई में कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी पर उन्होंने यह इल्जाम तो लगा दिया कि इन लोगों ने बड़ी तादाद में लोगों को उनके घर भेजने के लिए उकसाया, ट्रेन टिकट भी दिलवाए ताकि वह अपने गांव जाकर कोरोना फैला सकें लेकिन यह बात हज्म कर गए कि मुंबई बंगलौर चेन्नई कोलकाता और पंजाब के कई शहरों से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें किसने चलाई थीं जिसमें बैठकर लाखों लोग अपने-अपने वतन वापस गए थे। कांग्र्रेस लीडर राहुल गांधी ने काफी पहले सरकार को आगाह कर दिया था कि कोविड का खतरा बढ रहा है इससे निपटने की तैयारियां की जानी चाहिए लेकिन मोदी अपने दोस्त उस वक्त के अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प को गुजरात लाने और मध्य प्रदेश में कांग्र्रेस सरकार लूट कर अपनी पार्टी की सरकार बनवाने में मसरूफ रहे।
मोदी ने यह भी नहीं बताया कि 24 मार्च 2020 से पूरे देश में लाकडाउन लगाने का जो डिक्टेटराना फैसला उन्होने किया था उससे पहले कई बड़े शहरों में रह रहे मजदूरों की मदद का कोई इंतजाम क्यों नहीं किया था। क्या लाकडाउन लगाने से कम से कम एक हफ्ता पहले उन्हें मजदूरों से यह नहीं कहना चाहिए था कि 24 मार्च (2020) से लाकडाउन लगेगा, फैक्ट्रियां बंद हो जाएगी। अगर किसी को अपने वतन वापस जाना हो तो चला जाए। लाकडाउन लगने के बाद जब मजदूरों के भूकों मरने की नौबत आ गई तभी तो लाखों मजदूर अपने वतन जाने के लिए सड़कों पर निकले थे। सैकड़ों किलोमीटर के सफर पर लोग पैदल ही निकल पड़े थे। मोदी और उनकी सरकार की बेहिसी का आलम यह था कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकारें थीं। इसके बावजूद पैदल चल रहे मजदूरों के लिए पीने के पानी और दो वक्त की रोटी का इंतजाम भी वह नहीं कर सके। अब लम्बी-लम्बी बातें कर रहे हैं।
पार्लियामेट में मोदी ने ऐसी तकरीर की कि जैसे उनकी पार्टी बीस-पच्चीस साल से देश की सत्ता पर काबिज हो और आगे भी लम्बी मुद्दत तक रहने वाली हो। अभी तो उनको सत्ता में आए साढे सात साल ही हुए हैं। इससे पहले दस सालों तक देश में कांग्रेस की कयादत वाले यूपीए की ही सरकार थी। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि बेशुमार दौलत लुटाने और अपनी पार्टी के सैकड़ों लीडरान को दिन-रात दौड़ा कर भी वह मगरिबी बंगाल के लोगों का दिल नहीं जीत सके। उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पंजाब जैसे प्रदेशों में उन्हें और उनकी पार्टी को कोई पूछ भी नहीं रहा है। राजस्थान, छत्तीसगढ और झारखण्ड में उनकी सरकारें नहीं हैं। बिहार में पिछले दरवाजे से वह सरकार में शामिल हैं फिर इस पैमाने का गुरूर (घमण्ड) क्यों?

