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लोकसभा चुनाव में लगभग 9000 करोड के 2000 के नोट मतदाताओं को बांटे जाएंगे ?

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सनत जैन

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा जानकारी दी गई है, कि अभी तक रिजर्व बैंक में 8897 करोड मूल्य के 2000 रूपये के नोट रिजर्व बैंक के खजाने में वापस नहीं आए हैं। 19 मईं 2023 को रिजर्व बैंक ने 2000 रूपये के नोटों को प्रचलन से बाहर करने का निर्णय लिया था। 23 सितंबर 2023 तक सभी बैंकों को 2000 रूपये के नोट बदलने का निर्देश दिया गया था। उस समय रिजर्व बैंक ने कहा था, 23 सितंबर के बाद यह नोट प्रचलन से बाहर हो जाएंगे। रिजर्व बैंक ने अभी तक इन नोटों को प्रचलन से बाहर नहीं किया है। रिजर्व बैंक के नए निर्देशानुसार केवल रिजर्व बैंक की शाखाओं से ही कुछ सीमा तक 2000 रूपये के नोट बदले जा सकते हैं। सभी रिजर्व बैंक की शाखाओं में आज भी 2000 रूपये के नोट बदले जा रहे हैं। रिजर्व बैंक ने अभी भी इस पर रोक नहीं लगाई है। इसके बाद भी रिजर्व बैंक में अभी तक लगभग 9000 करोड रुपए के नोट वापस नहीं आए हैं। यह कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है।


राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा हो रही है। 8897 करोड रुपए के 2000 के नोट एक प्रमुख राजनीतिक दल और कई बड़े-बड़े पूंजी पतियों ने अपने पास सुरक्षित करके रखे हुए हैं। 2000 रूपये के नोट को अभी तक रिजर्व बैंक ने बंद करने का निर्णय नहीं लिया है। रिजर्व बैंक को इसकी अभी तक सरकार से 2000 के नोट बंद करने की अनुमति नहीं मिली है।

माना जा रहा है, 2000 के नोटों का उपयोग 2024 के लोकसभा चुनाव में किया जाएगा है। यह भी चर्चा है, लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को नोट के बदले वोट लेने के लिए 2000 रूपये के नोट दिए जाएंगे। इन नोटों को मतदाता रिजर्व बैंक की लाइन में लगकर बदल लेंगे। 2000 के कुछ नोट बदलने पर कोई पूछताछ नहीं होती है। इसी कारण से अभी तक रिजर्व बैंक ने 2000 रूपये के नोट पर रोक नहीं लगाई है। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है, 2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग 9000 करोड रुपए मतदाताओं को बांटे जाएंगे।

लोकसभा चुनाव समाप्त हो जाने के बाद रिजर्व बैंक और सरकार 2000 रूपये के नोट बंद करने की अधिसूचना जारी करेगा। तब तक रिजर्व बैंक से यह नोट सीमित संख्या में बदले जाते रहेंगे। रिजर्व बैंक ने 19 मईं 2023 को 2000 रूपये के नोट प्रचलन से बाहर किए थे। लगभग 9 महीने बीत चुके हैं। अब लोगों में इस बात की भी चर्चा है, कि जब 1000 और 500 रूपये की नोटबंदी हुई थी। उस समय ऐसा कोई समय नहीं दिया गया था। तत्काल प्रभाव से नोट प्रचलन से बाहर कर दिए गए थे। उसके बाद निश्चित समय सीमा पर बैंकों ने उन नोटों को वापस लिया था। जिसका पूरा हिसाब किताब, जिन्होंने बैंक में नोट जमा किए थे, उन्हें आयकर विभाग को हिसाब देना पड़ा। कई वर्षों तक उनकी आयकर विभाग में पेशी चलती रही। 2000 रूपये के नोट आमतौर पर चलन से बाहर हो चुके हैं। अभी तक उनके बदले जाने की प्रक्रिया रिजर्व बैंक के माध्यम से चल रही है। कहा जा रहा है, लोकसभा चुनाव होने तक यह प्रक्रिया चलती रहेगी। विपक्षी राजनैतिक दलों को तो चंदा ही नहीं मिल रहा है। ईड़ी और सीबीआई के डर से राजनैतिक विपक्षी दलों को कोई चंदा ही नहीं दे रहा है। विपक्षी दलों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं। चलन से बाहर किए गए 2000 केनोट से चुनाव लड़ने की यह तरकीब चर्चाओं में है। लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए 9000 करोड रुपए की यह रकम बहुत बड़ी है।
सरकार एवं संवैधानिक संस्थायें अपने अधिकारों का उपयोग राजनैतिक एवं निजी स्वार्थ के लिये करने लगे। यह स्थिति भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर आम नागरिक में जो विश्वास हैं, वह खत्म होगा। 2000 के नेट यदि प्रचलन से बाहर कर दिये गए है। लोगों को पर्याप्त समय देने के बाद भी रिजर्व बैंक 9 माह बाद भी 2000 के नोट बदल रहा है। इससे 2000 के नोट बंद करने के पीछे जो उद्देश्य था वह पूरा नहीं हुआ। जिन लोगों ने अवैध कमाई और रिश्वत के जरिये 2000 के नोट में काला धन जमा किया था। वह काला धन सफेद भी हो गया। वहीं चुनाव को प्रभावित करने के लिये यदि 2000 के नोटों का उपयोग राजनैतिक दलों द्वारा किया जाता है। इससे ज्यादा आपत्तिजनक बात कोई सभी राजनैतिक नहीं हो सकती है।

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