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बंगाल में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की यादों का ‘खंडहर’, बदहाली की दास्तां बयां करती तस्वीरें

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वेस्ट बंगाल में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की यादों का ‘खंडहर’, बदहाली की दास्तां बयां करती तस्वीरेंपश्चिम बंगाल की बात करते ही अगर किसी का चेहरा सबसे पहले ध्यान आता है तो हैं गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर। देश को राष्ट्रगान समेत सैकड़ों कविताएं देने वाले गुरुदेव की यादें पश्चिम बंगाल के अनेक हिस्सों में हैं। लेकिन कभी गुरुदेव की पसंदीदा जगह रही कालिमपोंग में उनकी यादें खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं।पश्चिम बंगाल के कालिमपोंग में बीके रॉय चौधरी का घर है। ये घर रवींद्र नाथ टैगोर की पसंदीदा जगह रही है। वो यहां आते थे, कई-कई दिनों तक रुकते थे और कविताएं लिखते थे। लेकिन आज ये घर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

गुरुदेव के दोस्त का है ये घर

पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाके कालिमपोंग में स्थित ‘गौरीपुर हाउस’ नाम का ये घर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस घर में चार पीढ़ियों से एक परिवार रहता है। उस परिवार की बेटी क्लाउडिना के मुताबिक, ये घर रवींद्रनाथ टैगोर के दोस्त बीके रॉय चौधरी का था।

​गर्मी की छुट्टियों में यहां आते थे गुरुदेव

क्लाउडिना के मुताबिक, ‘मेरी दादी बताती थीं कि ये घर रवींद्रनाथ टैगोर की पसंदीदा जगह हुआ करती थी। वो यहां गर्मी की छुट्टियों में आते थे, कविताएं लिखते थे। ऊपर के कमरे में रहकर वो बालकनी से पूरा शहर देखते थे।’

​टैक्स न दे पाने की वजह से सरकार ने ली जमीन

आपको बता दें कि टैगोर के दोस्त बीके रॉय चौधरी की यहां पर काफी जमीन थी। लेकिन टैक्स न दे पाने की वजह से इस जमीन का एक हिस्सा वेस्ट बंगाल सरकार ने अधिगृहित कर लिया और उसपर एक पॉलिटेक्निक कॉलेज बनवा दिया।

​चार पीढ़ियों से रह रहा क्लाउडिना का परिवार

क्लाउडिना कहती हैं कि उनका परिवार यहां चार पीढ़ियों से रह रहा है। दो साल पहले कुछ लोग आए थे, और कहा था कि वो इस घर की मरम्मत करके इसे म्यूजियम की तरह बनाएंगे, वो लोग मैप बनाकर भी ले गए थे लेकिन फिर वापस नहीं आए।

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