कनाडा की रहने वाली रूपी कौर ने व्हाइट हाउस की ओर से मिले दिवाली सेलिब्रेशन को ठुकरा दिया है। भारतीय मूल की कवि रूपी कौर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बयान जारी कर कहा है कि मैं वैसे किसी भी संस्थान का आमंत्रण स्वीकार नहीं कर सकती जो सामूहिक हिंसा का समर्थन करता हो। दरअसल, उनका यह विचार इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध पर अमरीका के रूख को लेकर आया है। कवि ने यह भी इच्छा जाहिर की है कि अमरीका दक्षिण एशियाई लोगों के साथ पारदर्शिता बरते।
रूप कौर कौन है?
रूपी कौर कनाडा के टोरंटो में रहती हैं। वह लेखिका और रेखाचित्रकार हैं। रूपी की दिल की गइराईयों में उतर जाने वाली कविता की पहली किताब ‘मिल्क एंड हनी’ का पाठकों ने जोरदार स्वागत किया था। किताब का प्रकाशन वर्ष 2014 में हुआ था और इसकी 10 लाख से ज्यादा प्रतियां बिकी थीं। इस किताब को न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्टसेलर्स लिस्ट में जगह मिली थी। इनकी कविताओं की थीम प्रेम, अलगाव, विषाद, नारीत्व और अप्रवास रहे हैं। कवि को इंस्टाग्राम पर 40 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।
सोशल मीडिया पर इस वजह से चर्चा में आई
शुरुआती दौर में वह इंस्टापोएट के बतौर नोटिस की गईं लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उनके फॉलर्स की संख्या बढ़ती चली गई। रूपी पहली बार सुर्खियों में तब आईं जब उनकी एक तस्वीर इंस्टाग्राम ने हटाई। यह तस्वीर उनकी खुद की थी जिसमें वह माहवारी के खून से सने बिस्तर पर सोती हुई दिखाई दे रही थीं। उन्होंने इंस्टाग्राम के द्वारा तस्वीर हटाए जाने के खिलाफ मोर्चा लिया। इस मामले में उनका तर्क यह था कि इंस्टाग्राम दोहरा व्यवहार करता है। एक ओर वह स्त्रियों के सेक्सुअल फोटो लगाने की इजाजत देता है और वहीं दूसरी ओर स्त्रियों के सामान्य अनुभव से जुड़ी तस्वीरों को लगाने पर रोक लगाता है।
क्या है नया विवाद?
अमरीका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस 8 नवंबर 2023 को दिवाली समारोह का आयोजन व्हाइट हाउस में कर रही हैं और इस कार्यक्रम का निमंत्रण रूपी कौर को भेजा गया था लेकिन उन्होंने इसमें भाग लेने से मना कर दिया। उन्होंने यह तर्क दिया कि वह ऐसे किसी संस्थान के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होना चाहेंगी जो नागरिक हिंसा या सामूहिक सजा का समर्थन करता हो। रूपी ने अमरीका सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वह फिलीस्तीनियों के नरसंहार को उचित ठहरा रही है। मुझे बाइडन प्रशासन की ओर से दिवाली समारोह का न्योता मिला लेकिन मैंने उस कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया।
गाजा पर बमबारी को समर्थन दे रहा अमरीका
रूपी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि आज अमरीका न केवल गाजा में बमबारी के लिए फंडिंग कर रहा है बल्कि अमरीकी सरकार लगातार फिलीस्तीन में शरणार्थी कैम्पस, अस्पतालों और मंदिरों को बम से उड़ाए जाने का भी समर्थन कर रही है। अबतक इस युद्ध में 10 हजार से ज्यादा फिलीस्तीनी मारे जा चुके हैं। हम यह जानते हैं कि इजरायल इस युद्ध में जहरीले सफेद फॉस्फोरस बम का इस्तेमाल कर रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस बारे में कहा कि इसकी तहकीकात युद्ध अपराध की तर्ज पर अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मृतकों में 70 फीसदी से ज्यादा स्त्रियां और बच्चे शामिल हैं।

