Site icon अग्नि आलोक

महाविनाश की ओर जा रहा है रूस −यूक्रेन युद्ध

Share

अशोक मधुप

रूस – युक्रेन युद्ध को पचास से ज्यादा दिन हो गए। युद्ध का लंबा खिंचना  ठीक नही होता।इस युद्ध का तो बिल्कुल भी नहीं । ये युद्ध जितनी जल्दी समाप्त हो जाए,  उतना अच्छा है।युद्ध जितना लंबा खिंच  रहा है,  उतना गंभीर हो रहा है।संकेत से हैं कि ये युद्ध विश्वयुद्ध की और न चला जाए। इसीलिए इस युद्ध को  रोकने के लिए विश्व के सभी  देशों को ईमानदारी के साथ प्रयास करने होंगे। रूस के मित्र देशों को  इसके लिए प्रयास करने होंगे।

युद्ध ,युद्ध होता है,  वह न हो तो बहुत ही बढ़िया।  कभी मजबूर में हो तो बहुत संक्षिप्त।बड़ा युद्ध लड़ने वाले देश ही नही पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। रूस −यूक्रेन युद्ध  55 दिन से जारी है। वार्ता और मान− मनवल की कोशिश बेकार हो गईं। अब सा नही लगता कि जल्दी  युद्ध रूकेगा।रूस को  उम्मीद नही थी कि यूक्रेन इतनी मजबूती के साथ मुकाबला करेगा। युद्ध के चलते 55  दिन बीत गए। रूस ने यूक्रेन के शहरों  पर बमबारी करके लगभग  उन्हें तबाह कर दिया। वहां जरूरत के सामान का संकट है,फिर भी  यूक्रेन  युद्धरत है। उसने हथियार नही डाले। वहां की जनता हार मानने को तैयार नही है।अब तो  समाचार ये  आ रहे हैं कि रूस के हमलों से डरकर देश छोड़ने वाले यूक्रेनवासी वापिस लौट रहे हैं। देश छोड़कर जाने वाले यूक्रेन वालों की वापसी यह बताने के लिए काफी है, कि वे प्रत्येक परिस्थिति को  समझकर लौट रहे हैं।वह अपने देश और  देशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के लिए लौट रहे हैं।

 भारी बमबारी और मिजाइल हमले के बाद भी यूक्रेन पर विजय न मिलने  हालात से रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन परेशान हैं। वह  गुस्से में  हैं। युद्ध में उनके बड़ी संख्या में सैनिक तो मारे ही गए हैं। हाल में यूक्रेन ने काला सागर में एक रूसी युद्धपोत को भी तबाह कर दिया। बड़ी तादाद में रूस के विमान हैलिकाप्टर और टैंक आदि के पहले ही क्षतिग्रस्त होने की सूचनांए है। रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध कुछ ही दिनों में जीत लेने की उम्मीद थीलेकिन 55 दिनों बाद भी वह ऐसा नहीं कर सका हैं। उधर  अमेरिका और उसके मित्र देश यूक्रेन को लगतार अस्त्र− शस्त्र  उपलब्ध करा रहें हैं। 25 मार्च को जर्मनी से 1500 “स्ट्रेला” विमान भेदी मिसाइलों और 100 MG3 मशीनगनों की एक खेप यूक्रेन पहुंची है।  अमेरिका व उसके  अन्य मित्र देश भी शस्त्र भेज रहे हैं। यह सही है कि वह युद्ध में शामिल नहीं। उनकी सेनाएं युद्ध में भाग नही ले रहीं। उनके सैनिक नहीं लड़ रहे, किंतु यह भी सत्य है  कि उनके शस्त्रों  और आधुनिक युद्धक सामग्री की बदौलत यूक्रेन अभी युद्ध के मैदान में जमा है। मित्र देशों के प्रमुख युद्धरत यूक्रेन के दोरे कर रहे हैं। अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति के यूक्रेन दौरे की खबरे थीं, किंतु आज उनके कार्यालय ने इन्हें गलत बताया। यूक्रेन को समर्थन देने के लिए व्हाइट हाउस की तरफ से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के कीव जाने वाला है। इसके बाद बाइडेन या वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस के यूक्रेन जाने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नौ अप्रैल को कीव जाकर हालात का जायजा लिया था।

55 दिन से चल रहे युद्ध से रूस की सुपरपावर इमेज को धक्का लगा है।ऐसे में यूक्रेन को न जीत पाने की झुंझलाहट में रूस यूक्रेन के खिलाफ टेक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। यह भी हो सकता है कि वह शस्त्र लेकर आने वाले मित्र देशों के युद्धपोत को निशाना बनाए। वह बार −बार अमेरिका और मित्र  देशों को इसकी चेतावनी भी दे रहा है। यदि मित्र देशों के युद्धपोत  निशाना बने तो फिर मित्र देश युद्ध में सीधे   उतरने को मजबूर होंगे।

यूक्रेन के रूस के खिलाफ युद्ध में टिके रहने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और उसके मित्र  देशों से मिल रही हथियारों की मदद है। रूस शुरू से इसका विरोध करता रहा है। ऐसे में नाटों  को सबक सिखाने के लिए रूस यूक्रेन के खिलाफ टेक्टिकल परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। टेक्टिकल परमाणु हथियार  कम क्षमता के और सीमित एरिया में ही विनाश करते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए  के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स ने कहा है कि यूक्रेन में जीत हासिल करने के लिए रूस टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल कर सकता है। युद्ध  शुरू होने के  बाद ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा था कि उन्होंने अपने न्यूक्लियर वेपन तैयार रखे हैं। अब एक बार फिर से न्यूक्लियर वेपन के इस्तेमाल की चर्चा शुरू होने से दुनिया की टेंशन बढ़ गई है। यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने से भी परमाणु हमले की आशंका बढ़ गई है।

इन सब हालात को देखते  हुए जरूरी हो गया है कि पूरी दुनिया इस युद्ध को रोकने के लिए एक बार फिर प्रयास करे। दोनों देशों को समझाए कि वह आमने सामने बैठें ।अपना – अपना अहम त्यागे और वार्ता कर समस्या का निदान निकालें ।

अशोक मधुप

( लेखक  वरिष्ठ  पत्रकार हैं)

Exit mobile version