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रूस~ यूक्रेन युद्ध : एक संवेदनशील मित्र का दर्द

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ज्योतिषाचार्य पवन कुमार (वाराणसी)

  _दशकों के नाटो उकसावे के बाद आख़िरकार रुस के यूक्रेन पर हमले के बाद से लगातार काफ़ी क़रीबियों के फ़ोन आ रहे हैं, कुछ के अपने ही रिश्तेदारों/दोस्तों के बच्चों के लिए, कुछ के हर हिंदुस्तानी के लिए। एक तो यूएन सिस्टम से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन में काम करता हूँ, दूसरे रिश्ते बहुत कमाए हैं तो पहले की माँगी मददों पर मिली भी हैं।_
     चीन के जिलिन में अचानक बीमार पड़ गयी हिंदुस्तानी बेटी से लेकर, दुबई में फँसे राजस्थानी श्रमिकों तक, कम्बोडिया में सड़क हादसे का शिकार हुए मित्र से लेकर मलेशिया में पॉम प्लैंटेशन में फँसे हुए दोस्तों तक मदद पहुँचाई है।
    _यहाँ बिलकुल साफ़ कहूँ कि अपनी भूमिका सिर्फ़ डाकिये की रही- काम ज़मीन वालों ने किया- जिलिन में शाहनवाज़ अख़्तर और सौरव राजपूत ने, दुबई में अनामिका वाजपेयी ने, कम्बोडिया में मेरे ही संगठन की सहकर्मी वहीं की नागरिक सोफ़िया ने, मलेशिया में संगठन के बांग्लादेशी सहयोगी वहीदुज़्ज़मा भाई ने।_
      इस बार भी कीव में संपर्क स्थापित हो गया था। एक समूह को खाना पहुँचा भी सका। फिर उन्होंने सीधे इंकार कर दिया। आस्क योर ऑल पॉवरफ़ुल प्राइम मिनिस्टर टू हेल्प के जवाब के साथ फ़ोन कट गया! 

तबसे आ रही खबरें हर पल ख़राब हो रही हैं। कल मैंने यूक्रेन के आम नागरिकों और सेना में भारतीयों के ख़िलाफ़ बढ़ रहे ग़ुस्से का ज़िक्र किया था। तब तक ये ख़बर किसी अख़बार में नहीं थी। आज इंडियन एक्सप्रेस से भास्कर तक सब में है।
हमारे छात्रों को यूक्रेन सेना द्वारा पीछे धकेलने की, रूसी सेना द्वारा रोके जाने की, लाठी चार्ज की, तमाम।

क्या हो इस बीच ऐसा?
अपनी मीडिया का कवरेज देखें- सिर्फ़ फलाने बचा सकते हैं यूक्रेन को से लेकर फलाने के डर से रुस के जनरल ने आदेश दिया है कि तिरंगा लगे घरों गाड़ियों आदि पर हमले नहीं किए जाएँगे तक।
उधर फँसे हुए छात्रों के भेजे वीडियो भयावह होते जा रहे हैं- अंडरग्राउंड शेल्टर्स में सैकड़ों छात्र, रोते हुए, घबराए हुए। बताते हुए कि भारत के दूतावासों के अधिकारी फ़ोन तक नहीं उठा रहे हैं।
लखनऊ की छात्रा गरिमा मिश्रा का वीडियो देखा. अब वहाँ रूसी सैनिकों के भारतीय छात्रों की गाड़ियों पर गोलीबारी और सिर्फ़ छात्राओं को उठा ले जाने की बातें भी फैल रही है।
और ठीक इसी वक्त में माननीय प्रधानमंत्री जी अपने ही मन की बात में भारतीय युवाओं को तंज़ानिया के भाई बहन की तरह भारतीय गानों पर लिप सिंक कर मशहूर होने की सलाह दे रहे हैं!
एक गाड़ी दिखाई जा रही है- बताया जा रहा है उसमें भारतीय छात्र हैं, इवैक्यूएशन के लिए सीमा पर जा रहे हैं और भारत का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं। बचा लीजिए। तमाम भले लोग भी साझा कर रहे हैं- दुःख के साथ।

  किसी को नहीं दिख रहा कि गरिमा के वीडियो में शेल्टर दिख रहा है. सैकड़ों छात्र कोविद के बीच ज़मीन पर लेटे बैठे हैं. हर तरफ़ बैकपैक्स बिखरे पड़े हैं. वहीं बचा लो वाली गाड़ी क्रूज़िंग स्पीड पर है!
    हमारे देश का एक नागरिक गिर चुका है- इसका मुझे विश्वास है। पर दूसरा इतना मूर्ख हो चुका है कि उसका कुछ भी मान ले रहा है- यह अकल्पनीय है मेरे लिए। 
 _ख़ैर- हर बीतते घंटे के साथ खुद के स्तर से कुछ कर पाने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं- फिर भी लगा हुआ हूँ।_

[चेतना विकास मिशन)

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