अग्नि आलोक

*सच्चिदानंद सिन्हा नही चाहते थे कि सोशलिस्ट पार्टी जनता पार्टी में विलीन होकर अपना वजूद समाप्त करें*

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जैसा सच्चिदानंद सिन्हा जी ने बताया था –

21 फरवरी, 2019

जॉर्ज फर्नांडिस को गए हुए अभी तीन हफ्ते ही हुए थे। तब उनको श्रद्धांजलि देने के क्रम में अनेक लोगों ने दावे किए थे कि बस उन्हीं के सुझाव पर तो जॉर्ज साहब ने तिहाड़ जेल में रहते लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए मुजफ्फरपुर को चुना था।

21 फरवरी, 2019 की शाम बड़े भाई Achyutanand Kishore Naveen  की लड़की की शादी में देश के शीर्ष समाजवादी चिंतक आदरणीय सच्चिदानंद सिन्हा जी आए हुए थे। (तस्वीर संलग्न है।) तब मौका तलाश कर मैंने यह प्रसंग उनके समक्ष रख दिया था। वह निर्मल हंसी बिखेर कर रह गए थे। लेकिन मेरे जोर देने पर जो जानकारी उन्होंने दी थी, वह ऐतिहासिक थी।

अब जब सच्चिदा बाबू भी इसी 19 नवंबर को चले गए, उस जानकारी को फिर से आप सबके  समक्ष रखना उचित  होगा :

जॉर्ज फर्नांडिस बड़ौदा डायनामाइट केस में तिहाड़ जेल में बंद थे। जब भी तारीख पड़ती, उन्हें अदालत में लाया जाता। सच्चिदा बाबू, जिन्हें मित्रता में जॉर्ज सच्ची कहकर बुलाया करते थे, प्रायः हर तारीख पर अदालत में उनसे मिलने जाया करते। तब इनका मुख्य मकसद होता लंदन के अखबारों में प्रकाशित बड़ौदा डायनामाइट केस, जॉर्ज फर्नांडिस और भारत संबंधी खबरों को जॉर्ज तक सफाई से पहुंचा देना। ऐसी सभी खबरें हिंदी के ख्यातिप्राप्त लेखक श्री निर्मल वर्मा लंदन के अपने संपर्कों के माध्यम से जुटाते और पूसा स्थित उनके घर से सच्चिदा बाबू इन्हें तारीख के दिन अदालत में जॉर्ज साहब को सफाई से सौंप देते। रास्ता यह होता कि अखबार के इन्हीं पन्नों में लपेट कर फल आदि दे दिया जाता, जिससे पुलिस का ध्यान उधर नहीं जाता।

जब इमरजेंसी उठा ली गई और चुनाव का बिगुल बज गया, तो जॉर्ज की तीव्र इच्छा थी कि वे बड़ौदा से लड़ें। लेकिन मोरारजी देसाई इस पर तैयार नहीं हुए, क्योंकि बड़ौदा सीट वह अपने संगठन कांग्रेस के खाते में चाहते थे। तब जॉर्ज के सामने अन्य आठ-दस नाम रखे गए। जॉर्ज ने यह सूची सच्चिदा बाबू को दिखाई और उनकी राय मांगी। इस सूची में मुजफ्फरपुर भी शामिल था। सच्चिदा बाबू ने उन्हें सलाह दी कि उन नामों में सबसे सही मुजफ्फरपुर रहेगा। आगे ऐसा ही हुआ।

इसी से जुड़ा एक और प्रकरण। तब 1977 के चुनाव में हथकड़ी लगा जॉर्ज फर्नांडिस का पोस्टर बहुत लोकप्रिय हुआ था और वोटरों को छुआ था। इस पोस्टर का आइडिया सच्चिदा बाबू का ही था और दिल्ली से इसकी पहली खेप वही मुजफ्फरपुर लाए भी थे।

बातचीत के क्रम में सच्चिदा बाबू ने बताया कि वे और उनके जैसे कई लोग इसके एकदम खिलाफ थे कि सोशलिस्ट पार्टी जनता पार्टी में विलीन होकर अपना वजूद समाप्त करे। लेकिन जॉर्ज मजबूर हो गए थे। उन्होंने एक दिन सच्चिदा बाबू से कहा- सच्ची, तुम ठीक कहते हो, लेकिन जेपी का दवाब इतना अधिक है कि विलय को मानने के अलावा कोई उपाय नहीं है।

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