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सचिन पायलट राष्ट्रीय महासचिव के साथ किसी राज्य के प्रभारी होंगे

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सुसंस्कृति परिहार
आज राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2023के चुनाव की सर्जरी राष्ट्रीय कांग्रेस की अनुमति की है जिसमें कई महत्वपूर्ण परिवर्तन यह दर्शाते हैं कि सरकार में उत्पन्न व्यवधान अब समाप्त हो जायेंगे। ख़ासतौर पर पायलट के साथियों को जिस तरह तरजीह देकर संतुष्ट किया गया है वह ज़रूरी था यह क्लेश मिटाने के लिए।रहा सवाल ख़ुद सचिन पायलट का तो समझा जाता है कि उन्हें प्रियंका की तरह राष्ट्रीय महासचिव के साथ किसी राज्य का प्रभारी बनाया जा सकता है जिसके लिए उनकी सहमति हो चुकी है और कभी भी उसकी घोषणा की जा सकती है।ज्ञातव्य हो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इसी तर्ज पर महासचिव और यू पी प्रभारी प्रियंका-गांधी के साथ पिछले चुनाव में बनाया गया था।वे दोनों तब कामयाब नहीं रहे। सिंधिया की नज़र मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर थी। लेकिन समीकरण अनुकूल होते ना देख उन्होंने अपने विधायकों के साथ भाजपा का दामन थामा था।अभी तक सचिन के बारे में भी यही कहा जाता रहा है वे भी भाजपा में जाने वाले हैं। भाजपा में प्रविष्ट हुए सिंधिया की खराब स्थिति से विचलित पायलेट ने अपना इरादा बदल लिया और कांग्रेस के प्रति निष्ठावान बने रहे।अब यह संयोग ही कहा जाएगा कि भाजपा की उलटी गिनती शुरू होने से पायलट जैसे बिखर रहे लोगों में एक विश्वास जागा है।

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में प्रस्तावित फेरबदल पर संतोष जताते हुए कहा कि यह बदलाव बहुत बड़ा संकेत है जिसका फायदा कांग्रेस को होगा उन्होंने कहा, ‘‘कोशिश यही की गई है कि इसमें किसी को छोड़ा नहीं जाए और हर तबके, हर समाज, हर क्षेत्रीय एवं भौगोलिक दृष्टिकोण को देखते हुए इसका गठन किया गया है.‘‘ आज बहुप्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल हो गया है। 15 विधायक मंत्रियों , इनमें से 11 कैबिनेट मंत्री  और 4 विधायकों ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली है इस फेरबदल की खास बात ये है कि सचिन पायलट के खेमे से पांच लोगों को नई कैबिनेट में शामिल किया गया है।मुस्लिम समुदाय की मेवात जाहिदा खान ने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। वो भरतपुर जिले से आती हैं. वो प्रदेश कांग्रेस में   कई पदों पर काम कर चुकी हैं. वो दूसरी बार कामां सीट से विधायक बनी हैं।  पहली बार चार दलितों को भी मंंत्री मंडल में लिया गया है।

इस पुनर्गठन में कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा, हरीश चौधरी और राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को हटाया गया है. इन तीनों मंत्रियों ने संगठन में काम करने की इच्छा जताते हुए अपना त्यागपत्र पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया था। डोटासरा राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। तो डॉ.  रघु शर्मा को कांग्रेस ने गुजरात और हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है ।

कुल मिलाकर मंत्रीमंडल गठन के बाद सारी कोशिशें इस तरह की हुई हैं कि कहीं असंतोष ना हो। जहां तक सचिन का सवाल है चूंकि वे राजस्थान के मोह को नहीं छोड़ पायेंगे। बराबर राजस्थान से जुड़े रहेंगे।ये सुकून दायक ख़बर भी है। क्योंकि मिशन2023चुनाव में सचिन और गहलौत दोनों बहुत ज़रूरी है।यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगला चुनाव कांग्रेस के जीतने की उम्मीद बलवती हो जाती है।

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