आरती शर्मा
सात लाख रूपये दीजिये तो राधे माँ (श्रीमती जसबिंदर कौर) आपको गोद में बैठाकर आशीर्वाद देंगी और पन्द्रह लाख रूपये दीजिये तो आप धूर्त ठग राधे माँ को किसी फाइव स्टार होटल में डिनर के साथ आशीर्वाद ले सकते हैं ! तब भी वो देवी है हम मूर्ख हिंदुओं की।
निर्मल बाबा है जो लाल चटनी और हरी चटनी में भगवान की कृपा दे रहा है ! रात दिन पूजा जा रहा है।
रामपाल भक्त हैं जो उसे कबीर और कबीर को पूर्ण परब्रह्म परमात्मा मानते हैं ! वह अपने नहाए हुए पानी को अपने भक्तों को पिला कर कृतार्थ करता है।
ब्रह्मकुमारी मत वाले हैं जो दादा लेखराज के वचनों को सच्ची गीता बताते हैं और परमात्मा को बिन्दुरुप बताते हैं ! इन्होंने श्री कृष्ण जी की भगवद गीता भी फेल कर दी। पति पत्नि को भाई बहन बना देते हैं.
राधास्वामी वाले अपने गुरु को ही मालिक परमेश्वर भगवान ईश्वर मानते हैं । उनके अनुसार वो साक्षात ईश्वर का अवतार है और वेद गलत है।
ओशो के भक्तों के लिए समाधी का रास्ता सम्भोग से होकर जाता हैं। उनके लिए सदाचार और व्यभिचार में कोई अंतर नहीं हैं. जबकि सारे नामर्द हैं, समाधि किसे मिली इनके जरिये सेक्स से – एक भी उदाहरण नहीं।
रामरहीम वालों के लिए उनके गुरु भगवान से भी बढ़कर हैं। चाहे वह गुफ़ा में साध्वियों का योन शोषण करे, चाहे साधुओं को हिजड़ा बनाये, चाहे डिस्को गाने गाये, चाहे अजीबोगरीब कपड़े पहन कर फिल्में बनाये। उसे भगवान् ही मानेगे।
बहुतेरे चाँद मियाँ ऊर्फ साई बाबा को भगवान बनाने पर तुले हैं. बाकि मजार-मरघट-पीर-फकीर मर्दे कलंदर न जाने कहाँ कहाँ धक्के खा रहे हैं।
आसाराम के भक्त तो और भी महान है सब पोल खुल जाने पर भी सड़को पर भक्त बनकर आसाराम को ईश्वर मान रात दिन उसके गुण गाते है।
अब पर्ची वाले बाबाओं का सैलाब है. सौ के पार हैं ये. करोड़ों- अरबों में खेलने वाले कथावाचकों की तो बात ही छोड़ो.
हिन्दुस्तान में रहने वाले जैन, बौद्ध, कबीरपंथी, अम्बेडकरवादि, मांसाहारी, शाकाहारी, साकारी, निरंकारी सब मूलतः हिन्दू हैं : लेकिन हिंदु सच में है कौन? खुद इन हिन्दुओ को नहीं पता.
हिंदुओं तुमने स्वयं ही वैदिक सनातन धर्म की सबसे ज्यादा हानि की है. कोई विदेशी इसका जिम्मेदार नहीं है. यह है हिंदू जिन्हें जिसने जैसा बेवकूफ बनाया वैसे बन गये। जिसने अपनी दुकान ज्यादा सजायी वो ही उतना बड़ा परमेश्वर हो गया। आज सत्ता से भी ऐसे ही हिन्दू धर्म को पोषण मिल रहा है.
सच में, हिंदुत्व का ऐसा विकृत रूप देखकर दुःख होता है। शर्म आती हैं ऐसे हिन्दू धर्म पर.

