–सुसंस्कृति परिहार
चुनावी संग्राम के भाषण वीर साहिब जी ने अब तक लालकिले से जो कुछ बोला उसमें सबसे लचर और बेअसर भाषण आज का था। याद रखें संघ ने भाषणों की बाजीगरी के कारण और गुजरात नरसंहार से खुश होकर ही प्रधानमंत्री घोषित किया था।इस बार भी आगत लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता को पहली बार देशवासियों और भाईयों बहनों ना कहकर परिवारजनों शब्द से सम्बोधित कर नई रंगत देने की कोशिश की।यह शब्द एक तरह से कटु व्यंग्य की तरह गांधी जवाहर परिवार पर था। विदित हो संसद में वापसी के बाद जब राहुल संसद पहुंचे थे तो उनका 9 अगस्त भारत छोड़ो की तर्ज़ परिवारवाद भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार भारत छोड़ो और तुष्टिकरण भारत छोड़ो की तख्तियां दिखाकर स्वागत किया गया। यह एक बड़ी पीड़ा उनके मन में खोल रही थी उसी का गुबार आज लालकिले पर निकला।

वे शायद सोच रहे थे कि यह तीर निशाने पर लगेगा किंतु जनता में इसका कोई असर नहीं देखा गया बल्कि राहुल की मेहनत, नफ़रत को मोहब्बत में बदलने की कठिन यात्रा भारत जोड़ो , निचली अदालतों के फैसले ,संसद से निकाला जाना और बंगला छीनना दिल को छूता नज़र आया। जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल था इस परिवार पर लगभग दस साल में एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर पाए।राफेल से लेकर विधायकों की खरीद फरोख्त के जैसा अरबों का भ्रष्टाचार आज तक नहीं हुआ।बड़ी बात तो ये एक कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भ्रष्टाचार में लिप्त सांसदों और विधायकों को भाजपा में शामिल कर उनके पाप धोने में भी आपने रिकार्ड बनाया।ताज़ा मामला महाराष्ट्र का सामने है आपने अजीत पंवार पर 70हजार करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दूसरे दिन उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया इतना ही नहीं उन्हें उपमुख्यमंत्री भी बनाया। अपराधियों से लेकर तमाम भ्रष्टाचारी और देशद्रोही लोगों को पार्टी का संरक्षण मिला हुआ। मणिपुर का मुख्यमंत्री कितना बड़ा गुनहगार है किंतु आपने उसका बाल बांका भी। नहीं किया क्यों? यह स्वत: सिद्ध करता है कि आप कितने गहरे पानी में है।
रहा सवाल तुष्टिकरण का तो गौर कीजिए नागालैण्ड में असंतुष्टों को तुष्ट करने जो घिनौनी चाल चली वह देशद्रोही निर्णय था। नागालैण्ड में आज उनका झंडा फहराया है पासपोर्ट पर भी उन्हें एकाधिकार प्राप्त है।जबकि याद करिए नेहरु जी के समय में करार के समय शेख अब्दुल्ला कश्मीर का झंडा फहराते थे और वे प्रधानमंत्री कहलाते थे। कांग्रेस ने आगे चलकर उस समझौते को बातचीत के ज़रिए सुलझाया उसे राज्य बनाया तथा प्रधानमंत्री की जगह उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया।आपने हिंदुओं को खुश करने तुष्टिकरण की जो राह अपनाई वह असंवैधानिक है जिस 370धारा को हटाया। तुष्टिकरण के ज़रिए आपने लोकतांत्रिक गणराज्य में गलत इबारतें लिखीं।राम मंदिर फैसला भी ग़लत हुआ ये निर्णय में लिखा गया किंतु बहुसंख्यकों की आस्था के मद्देनजर यह मामला विजित जान पड़ता है।यह भी तुष्टिकरण का एक उदाहरण जिस पर नाज़ किया जाता है। मणिपुर नरसंहार भी ईसाईयों के विरुद्ध तुष्टिकरण का मामला हो सकता है।
कहने का आशय यह है कि जिनसे भारत छोड़ने की बात की गई उन सबके गुनहगार तो स्वयं आप है क्योंकि मंत्रीमंडल में मोटा भाई को छोड़कर किसी के पास कोई अधिकार है ही नहीं।सदन में विपक्ष की बात अनसुनी होती है।जो कुछ हैं आप ही आप हैं।
बहरहाल, लालकिले का भाषण पर देश दुनिया की नज़र रहती है। दुनिया में इसे चुनावी भाषण की तरह ही देखा गया।देश के विकास का जो ज़िक्र आया भी उसमें 2047तक का वक्त मांगा।साहिब जी जनता इतनी बेवकूफ़ नहीं है कि वह अब इतने लंबे काल तक प्रतीक्षा करेगी। फिर आने की बात जिस अहंकार से कहीं गई वह लोकतंत्र पर सीधे सीधे हमला है। संभव है जीत के लिए नई तकनीक चीन से प्राप्त कर ली हो। लेकिन साहिब आपका चेहरा बता रहा है कि आप ना केवल देश को खतरनाक मोड़ पर ले आए हैं बल्कि अब ख़तरे की घंटी जनता बजाने की तैयारी कर चुकी है। यह बात संसद के भाषण और लालकिले के भाषण के सर्वे से सामने आ चुकी है।पहली बार लालकिले से मोदी मोदी की गूंज करवाना, पसीना पोंछना ,पानी पीना, ज़बान लड़खड़ाना तो यही संकेत दे रहे हैं कि देश को अब इंडिया की ज़रूरत है। आपका आखिरी भाषण है।संघ ने भी अब गुजरात लाबी से दूरी बना ली है।