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*सैया भए कोतवाल तो अब डर काहे का…तुम्हारी छवि अब तालिबानियों जैसी बन रही है*

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वैसे तो पूरे देश में मूर्खता फैली है लेकिन हृदय प्रदेश के हृदय में तो कुछ ज्यादा ही साम्प्रदायिकता का धुंआ भर गया है। आजकल जो भी युवा नेता ऊपर जाना चाहता है वो अपने ऊपर भारी दबाव ले लेता है खुद को कट्टर बिंदू साबित करने का। 

कट्टर बिंदू साबित करने का सबसे आसान तरीका है अब्दुल को टाइट करो। कल बीबीसी पर एक न्यूज पढ़ी इंदौर के एक कपड़ा मार्केट में मुस्लिमों को व्यापार करने और सेल्समैन बनने पर रोक लगा दी गयी। 

वहां पर 20-20 सालों से  मुस्लिम काम कर रहे हैं जो अब बेरोजगार हो गए हैं। ये जो फरमान आया है वो कोई सरकारी फरमान नही है बल्कि एक विधायक के लौंडे का का जिसका नाम एकलव्य है। 

भाई, वो किस आधार पर ऐसा कर रहा है ,किस संवैधानिक अधिकार के अंतर्गत उसने ये फरमान जारी किया। 

इस तरह की घटनाएं बहुत ही विभाजनकारी है। इसका बहुत बड़ा दुष्परिणाम इंटरनेशनल लेबल पर होता है। आप लाख व्योमिका सिंह और सोफिया कुरैशी को साथ बिठाओ लेकिन दुनिया इन खबरों से भी अंजान नही है तुम्हारी छवि अब तालिबानियों जैसी बन रही है। 

आप बताओ पाकिस्तान का कोई नेता खिलाड़ी अगर इन घटनाओं के आधार पर कहे कि भारत की सरकार और लोगो ने मुस्लिमो को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है तो आपके पास क्या जवाब होगा?

इस तरह की घटनाएं तो जिन्ना को ही सही साबित करेंगी। अपना घर ठीक नही करोगे तो किस मुंह से तुम दूसरों पर उंगली उठाओगे। किसी भी गुंडे को इतना अधिकार कैसे मिल जाता कि वो संवैधानिक अधिकार को भी कुचल देता है और शहर का शहर मूकदर्शक बना रहता है।

 बात वही है सैया भए कोतवाल तो अब डर काहे का। उन लोगों को क्या ही कहूं जिन्हें लगता हिंदुत्व गोवर्धन पर्वत है और उसे ये जाहिल नेता ही अपनी उंगली पर उठाए हैं। कायदे से सोचोगे तो समझोगे कि जिन्हें तुम हिंदुत्व का रक्षक समझ रहे हो वो रोज उसकी सहिष्णुता और उदारता जैसे मूल्यों  को तार-तार कर रहे हैं।

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