Site icon अग्नि आलोक

सलाम जस्टिस बी वी नागरत्ना

Share

4 पुरुषों के बीच में वह अकेली महिला थी मगर वह बोलीं जमकर बोलीं। आज चर्चा उन चारों जजों की नहीं हो रही जिन्होंने सत्ता के सामने सारी शर्म हया खो समर्पण कर दिया बल्कि जस्टिस बी वी नागरत्ना की हो रही जिन्होंने साफ- साफ कहा कि महज 24 घण्टे के भीतर बिना रिज़र्व बैंक को विश्वास में लिए नोटबन्दी जैसा फैसला कैसे लिया जा सकता है?

60 वर्षीय नागरत्ना जो कि 2027 में सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी वह जज हैं जिन्होंने 2012 में ही कहा था कि उस देश का मीडिया फर्जी ख़बरों से लोकतंत्र को खतरे के डाल रहा। स्वतंत्र मीडिया देश की जरूरत है लेकिन फर्जी ख़बरों पर लगाम के लिए भी ताकतवर सिस्टम होना चाहिए।

बीजेपी के लिए समस्या यह है कि अब वह इस फैसले का जश्न भी नहीं मना सकते। क्योंकि कम से कम सोशल मीडिया पर जस्टिस नागरत्ना के सवाल ही घूम रहे। निस्संदेह आज उन चारों जजों को नींद नहीं आएगी जिन्होंने जनता के हितों को दरकिनार कर आज का फैसला सुना फासीवादी सोच को सही ठहरा दिया। सलाम नागरत्ना।

Exit mobile version