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*संघ और मोदी शाह आमने-सामने!*

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     -सुसंस्कृति परिहार 

आजकल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत फुल पावर में नज़र आ रहे हैं क्योंकि मोदीजी ने खुद के बनाए उसूलों की अवहेलना की है।शायद यही वजह है मोदीजी को 75वीं सालगिरह पर शुभकामनाएं भी संघ प्रमुख ने नहीं दी। उन्होंने दो बार इशारों इशारों में उनके  75वें साल पर याद दिलाया कि उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए।पर वे डटे हुए हैं और अपने पसंदीदा चुनाव प्रचार कार्य में बड़ी बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि कहीं से भी वे  अपने अंदर के दर्द को प्रकट नहीं होने दे रहे हैं। इस बीच बिहार में उन्होंने अपने को दी गई मां की गाली पर जो नारी सम्मान का स्वांग रचा वह आपरेशन सिंदूर की तरह चकनाचूर हो गया। हाल ही में मां के पिंडदान हेतु गया में नौटंकी की बात सामने आई थी वे जन्मदिन पर वहां जाने वाले थे किंतु भाजपा के मोदी विरोधी सांसदों और संघ की दनादन हो रही बैठकों की वजह से उपजी चिंता के कारण वे पिंडदान करने नहीं जा पाए।उधर गुजरात से आई ख़बर ने यह साफ़ बता दिया कि उनके बड़े भाई मां का पिंडदान गया में कर आए हैं यानि गया की उनकी नौटंकी फ्लाप हो गई।

आजकल नितिन गडकरी पर लगे आरोप की पोल खोलने का इल्ज़ाम मोदी शाह पर लग रहा है क्योंकि ख़बरें बता रहीं हैं कि संघ ने भावी प्रधानमंत्री के रुप में उनका चयन कर लिया है इसकी भनक मोदी शाह को हो चुकी है। नितिन गडकरी को नीचा दिखाने के मोदी-शाह के इस कदम से संघ को ठेस पहुंची है।

इसी तरह भाजपाध्यक्ष पद पर जबरिया डटे जेपी नड्डा की हालत भी खराब है संघ बार बार संजय जोशी के नाम पर अपनी अडिगता दिखा रहा है जो मोदीजी का शुरुआती राजनीतिक जीवन का नंबर वन शत्रु है। गुजरात मुख्यमंत्री बनने से मोदी ने उसे रोका था। यहां तक कि गुजरात से उसे बाहर कर ही दम लिया।आज उसी का नाम भाजपा अध्यक्ष पद पर संघ द्वारा चयनित हो चुका है।

ऐसी स्थिति में मोदी शाह जी जान से अपने को सही और योग्य साबित करने की चेष्टा में लगे हैं। उधर राहुल गांधी की वोट चोर गद्दी छोड़ नारे की धूम है।

मोदी शाह कई मामलों में फंसते नज़र आ रहे हैं। मोदीजी के चरित्र पर आक्षेप भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और सांसद कंगना रनौत खुल्लम खुल्ला लगा चुके हैं। फर्जी वाड़ा के शिरोमणि और अरबों की लूट का जीवंत किरदार तथा झूठ वा जुमलों का बादशाह अपने शाह के साथ बुरी तरह फंस चुका है।

इसलिए वह आज भी सत्ता के सम्मोहन में है क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है पद की शक्ति गई तो जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। इसीलिए लालकिले से संघ का यशगान किया झुक झुक सलाम किया।उनको खुश रखने स्वावलंबन का उद्घोष किया और मणिपुर भी बेमन से जाना पड़ा जहां सरासर अपमान झेलना पड़ा।अब तो वोट चोर गद्दी छोड़ नारे के साथ संघ ने भी उन्हें गद्दी से हटाने की योजना बना रखी है अब देखना यह है कि भागवत अपनी इच्छा पूर्ण कर पाते हैं या मोदी के सर पर ताज कायम रहता है। किंतु यह बात तय है कि संघ भले ही सत्ता  बचाने रहम कर दे किंतु आज नहीं तो कल गुजराती मोटा छोटा भाई  की जुगल जोड़ी को हटना ही होगा और जेल की शोभा बढ़ानी होगी।

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