Site icon अग्नि आलोक

सप्त-ऋषि मण्डल

Share

पुष्पा गुप्ता 

     _सप्तऋषियों को सौरमंडल में भी स्थान दिया गया है। रात के समय सप्तऋषि तारामंडल आसानी से दिखाई देता है। वैज्ञानिकों ने कई तारा मण्डलों की खोज की है. सप्तऋषि तारामंडल के विषय में हजारों साल पहले ही भारत द्वारा बता दिया गया था।_

चार वेद हैं : ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। 

     _इन वेदों के लिए मंत्रों की रचना इन सप्तऋषियों ने ही की है। वेदों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है और इन वेदों में मंत्रों की रचना करने वाले ऋषियों को इस महान योगदान के लिए सप्तऋषि तारामंडल में स्थान दिया गया है। ये मंडल उत्तर दिशा में दिखाई देता है।_

*ये हैं सप्त-ऋषि*

1. वशिष्ठ, 2. विश्वामित्र, 3. कण्व, 4. भारद्वाज, 5. अत्रि, 6. वामदेव और 7. शौनक। 

      _हम सब इन्ही सप्तऋषियों की ही संताने है । इन्ही के नाम पर हमारे गोत्र है । जिसका जो गोत्र है वही ऋषि उनके पुरखे हैं।_

       रात में सप्तऋषि तारामंडल से मालूम होती है दिशा पुराने समय में जब दिशा बताने वाले यंत्र नहीं थे, तब समुद्र यात्रा के समय दिन में तो सूर्य को देखकर दिशा का ज्ञान हो जाता था, लेकिन रात में ध्रुव तारे को और सप्तऋषि तारामंडल को देखकर दिशा का ज्ञान होता था। ये उत्तर दिशा में दिखाई देते हैं।

        _एक मिथकीय मान्यता के अनुसार जिसे यह तारामंडल दिखना बंद हो जाये, उसका देहांत निकट होता है._

       (चेतना विकास मिशन)

Exit mobile version