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 व्यंग्य:हिंदी दिवस की शुभकामनाओं के साथ ……

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शशिकान्त गुप्ते

हिंदी दिवस पर बधाईयों की ओपचारिकता पूर्ण कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझने वाले हिंदी के हिमायतियों के प्रति अपनी कृतघ्नता प्रकट करता हूँ।मेरे मित्र राधेश्यामजी मुझसे मिलने आए,हिंदी दिवस की बधाई देने के बाद वह अपनीवाली पर आगए,हमेशा की तरह शिकायतों की झड़ी लगा दी।कहने लगे आज हिंदी दिवस पर कुछ लोगों ने अति कर दी।सुबह happy hindi divas,ऐसे आँग्ल भाषा मे संदेश भेजे।यहां तक तो ठीक एक मित्र ने तो मुझे हिंदी दिवस पर एक कार्यक्रम का chief guest बनाया।मुझे इनता cheap लगा।अब देखो हिंदी दिवस पर इतने programme orange किए हैं,जिसकी कोई limit ही नहीं है।
उनकी व्यथा सुनकर मैं बहुत क्रोधित होगया।तिलमिलाकर मैने कहा ऐसे लोगों को लानत भेजना चाहिए।मेरा क्रोध देखकर राधेश्यामजी कहने लगे,गुप्तेजी cool down, cool down, मुझे लगा अब तो सहन करने की पराकाष्ठा हो गई, फिर भी मैने अपना आपा नहीं खोया।राधेश्यामजी मुझसे चर्चा कर ही रहे थे,उसी समय उनकी श्रीमती अर्थात भाभीजी भी पधारी,मैने उनका शाब्दिक स्वागत किया,वह पूछने लगी भाभीजी हैं मेरे पत्नी के लिए पूछ रही थी,मैने श्रीमती को आवाज लगाई अजी सुनती हो तुमसे मिलने भाभीजी आई हैं।मेरी पत्नी जैसे बाहर आई दोनों ने
हाय हेल्लो करके एक दूसरे का अभिवादन किया।भाभीजी जल्दी में थी,सूचना देने आई थी,पता है न आज मेरे यहाँ हिंदी दिवस पर get together है।अपनी सभी friends आरही हैं।आज की विशेषता यह है कि श्रीमती शुक्लाजी का सम्मान करना है।अभी हाल ही उनका hindi language में एक novel publish हुआ है।सूचना देने के बाद bye bye करते हुए वह रवाना हुई।साथ ही राधेश्यामजी भी रवाना हुए।
मै हिंदी की दुर्दशा पर अफसोस कर रहा था।मुझे चिंताग्रस्त देख श्रीमती ने समझाया आपको इतना emotional नहीं होना चाहिए।देश-काल-स्थिति के नियमानुसार यह तो सब होना ही है।हमेशा practical approch रखना चाहिए।
मैं फिर भी हिंदी का सम्मान करता हु करता रहूंगा।

शशिकान्त गुप्ते इंदौर

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