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*सेक्स : खतरनाक है तन-मन-जीवन के साथ अति*

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     ~ रीता चौधरी

    सामन्य सेक्स तन – मन को थकाता है. जीवन को क्षीण करता है. स्वास्थ्य विज्ञान कहता है की सेक्स से बढ़िया कौई दवा नहीं, कोई शक्ति नहीं. लेकिन अति के लिए विज्ञान भी मना करता है. अति सर्वत्र वर्जयेत.

     स्त्री के लिए अक्सर सेक्स नुकसानदायक बनता है, क्योंकि वह क्लाइमैक्स पर पहुँचकर डिस्चार्ज नहीं हो पाती. पेनिस के आलावा अन्य किसी माध्यम से उसे डिस्चार्ज करना अप्राकृतिक है और जो अप्राकृतिक है, वह ज़हर है. 

     सभी महिलाएं स्वस्थ यौन जीवन का आनंद लेने की हकदार हैं। कई अध्ययन बताते हैं कि सेक्स स्वास्थ्य को कई तरीकों से फायदा पहुंचाता है।

      सेक्सुअल एक्टिविटी मानव जीवन का स्वाभाविक और स्वस्थ हिस्सा है, जो इमोशनल वेल बीइंग और इंटिमेसी में योगदान करती है।

   जीवन के किसी भी अन्य पहलू की तरह संतुलन जरूरी है। बहुत अधिक यौन गतिविधियों में शामिल होने से महिला के शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर गलत ढंग से प्रभाव पड़ सकते हैं। पुरुष भी कमजोर होकर तमाम रोगों का शिकार बन सकता है.

*1. शारीरिक थकावट :*

बार-बार सेक्सुअल एक्टिविटी से बहुत अधिक ऊर्जा खर्च हो जाती है। एनर्जी बर्न होने और प्रयास के कारण शारीरिक थकावट हो सकती है।

    इसके कारण थकान मांसपेशियों में दर्द और समग्र ऊर्जा स्तर में कमी हो सकती है।

*2. प्रजनन स्वास्थ्य को क्षति :*

     अत्यधिक परिश्रम और लगातार सेक्सुअल एक्टिविटी एक महिला के मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकती है।

    इसके कारण अनियमित मासिक धर्म, भारी रक्तस्राव, यहां तक की मिस्ड पीरियड भी हो सकता है।

*3. संक्रमण का खतरा :*

    यदि प्रोटेक्टिव वे में सेक्स नहीं किया जाता है, तो संक्रमण का भी खतरा बढ़ जाता है।

     बार-बार यौन गतिविधि से मूत्र पथ के संक्रमण के साथ- साथ यौन संचारित संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

*4. आत्म-सम्मान में गिरावट :*

   बहुत अधिक सेक्स करने वाली महिला को आत्म-सम्मान या सेल्फ रेस्पेक्ट में भी गिरावट का अनुभव हो सकता है।

   खासकर अगर यह मान्यता या स्वीकृति प्राप्त करने का साधन बन जाता है।

*5. घबराहट और तनाव :*

बार-बार यौन गतिविधियों में शामिल होने या कुछ अपेक्षाओं को पूरा करने का दबाव चिंता और तनाव को जन्म दे सकता है। यह मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

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*6. रिश्ते में खटास :*

    यौन संबंधों पर जरूरत से अधिक मात्रा में ध्यान देने पर पार्टनर के साथ भी तनाव हो सकता है।

    इससे गलतफहमी, ईर्ष्या या असंतोष पैदा हो सकता है।

*7. ऑर्गेज्म में कठिनाई :*

    लगातार यौन गतिविधि के कारण ऑर्गेज्म तक पहुंचने में भी कठिनाई हो सकती है। शरीर उत्तेजना के अनुरूप ढल जाता है।

*कितनी होनी चाहिए सेक्स की मात्रा?*

    महिलाओं को हमेशा अपने शरीर की बात सुननी चाहिए। यदि किसी प्रकार का दर्द है या थका हुआ महसूस कर रही हैं या योनि में पर्याप्त नेचुरली लयूब्रीकेंट नहीं है, तो इसका मतलब है कि शरीर सेक्स करने की मनाही कर रहा है।

    अगर सेक्स प्रेम पर आधारित है और स्त्री को सुपर आर्गेज्मिक तृप्ति देता है तो डेली किया जा सकता है. हर रात 3- 4 राउंड भी किया जा सकता है, लेकिन एक इंसान से ही. ऐसा सेक्स निश्चित रूप से आरोग्य, शक्ति, जिंदगी सब देता है.

    अन्यथा की दशा में सप्ताह में एक या अधिकतम दो बार सेक्स करना पर्याप्त है.  अगर महिला केवल सेक्स के बारे में ही सोचती रहती है, तो यह सामान्य बात नहीं है। उसे सेक्सोलोजिस्ट या थेरेपिस्ट से मिलकर अपनी समस्या सुलझा लेनी चाहिए। सेक्स की फ्रीक्वेंसी हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। यह उम्र, सेक्सुअल डिजायर और हेल्थ पर भी निर्भर करता है।

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