(राजेन्द्र के.गुप्ता )
सुशासन की तरफ बढ़ते कदमदो अफसरों के प्रकरण की अनुमति जारी करके, एक की अनुमति के लिए PS ने तीन मंत्रियों की कमेटी को भेजा था प्रस्ताव
जिनको मंत्रालय की दबंग अफसर माना जा रहा था, उन्होंने दो भ्रष्ट आबकारी अफसरों पराक्रम सिंह चंद्रावत (DEO) और जगदीश राठी (AC) के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति लोकायुक्त पुलिस को जारी कर दी थी, किन्तु DC नवलसिंह जामोद के विरुद्ध अनुमति जारी नही करते हुए, अनुमति का प्रस्ताव तीन मंत्रियों की कमेटी को भेज दिया था । *आज दिनांक 02/02/2021 को हुई शिवराज केबिनेट की बैठक में, अन्य मामलों के साथ आबकारी DC एन.एस.जामोद के विरुद्ध कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति पर भी केबिनेट ने मोहर लगा दी है*। अब वाणिज्यिक कर मंत्रालय को अनुमति जारी करना है, जो सम्भवतया केबिनेट निर्णय की प्रति मिलते ही जारी कर दी जाएगी ।इसके पहले जामोद ने दिनांक 18/06/2018 को लोकायुक्त पुलिस की जाँच पर सवाल उठाते हुए, अपनी और अपनी दोनो पुत्रियों के साथ पत्नी की सरकारी नौकरी से हुई आय से अर्जित की सम्पत्ति बताते हुए, लोकायुक्त पुलिस की आय गणना को साफ गलत और भेदभाव पूर्ण बताते हुए अपनी सभी सम्पत्ति को वैध बता, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर के समक्ष अभ्यावेदन दे कर, उनके अनुसार सभी सम्पत्ति की गणना करके, अभियोजन स्वीकृति नही देने की माँग की थी । पाठकों को यह जानकर आश्चर्य होगा की जामोद लोकायुक्त छापे के समय इंदौर डीसी थे, वर्तमान में आबकारी मुख्यालय ग्वालियर में पदस्थ है और कई महत्वपूर्ण कार्य देख रहे है, जिनमे भ्रष्ट अफसरों की जाँच का ज़िम्मा भी देखते है । । चंद्रावत के मामले में भी PS वाणिज्यिक कर दीपाली रस्तोगी द्वारा जारी अभियोजन स्वीकृति में गलत धारा(एक्ट) का उल्लेख कर दिया है, लोकायुक्त कार्यालय भोपाल ने सुधार हेतु वापस भेजा था, किन्तु पीएस ने सुधार करने से इंकार कर दिया है । भ्रष्ट अफसर के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस को शासन द्वारा कोर्ट चालान पेश करने की स्वीकृति नही देने के मामले में एक जनहित याचिका में, हाईकोर्ट की डीबी बेंच PS विधि और PS GAD को तलब कर चुकी है, उसके बाद एक साथ 182 भ्रष्ट अफसरों के विरुद्ध शासन ने अभियोजन स्वीकृति जारी की थी, किन्तु उस समय भी आबकारी के ये बड़े भ्रष्ट बच गए थे …

