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श्रीराम जय राम जय जय राम

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शशिकांत गुप्ते

सुबह की चाय पी ही रहा था। उसी समय सड़क पर एक भिखारी फुल वॉल्यूम में दोहा बोल रहा था।
राम नाम की लूट है,लूट सके तो लूट
अंत काल पछताएगा,प्राण जाएंगे
छूट
भिखारी लकड़ी के पटिए की गाड़ी पर बैठ कर हाथों में साइकल की ट्यूब के दास्तानें पहन कर गाड़ी चलाते हुए भीख मांग रहा था।
भिखारी पर मुझे बहुत क्रोध आया,इसलिए नहीं कि,वह भीख मांग रहा है,क्रोध का कारण भीख मांगने के लिए वह, राम के नाम का इस्तेमाल कर रहा था।
क्षमा करना इस्तेमाल शब्द गलती से लिखने में आ गया।
इस्तेमाल,शब्द के पर्यायवाची शब्द जब शब्दकोष में खोजे तो निम्न शब्द दिखाई दिए।
प्रयोग,उपभोग, सेवन, उपयोग, खपत,अमल, विनियोग, भोग
उक्त शब्दों में दो शब्दों का प्रयोग वाक्य करने का साहस किया।
एक उपयोग और दूसरा उपभोग।
भिखारी राम नाम का उपयोग अपने उपभोग के लिए कर रहा था।
संत कबीरसाहब ने अपने दोहे में लिखा है।
राम राम सब कोइ कहे ठग ठाकुर और चोर
जिस राम से ध्रुव,प्रह्लाद और मीरा तरे, वह राम कोई और
संत तुलसीदास रामनाम के महत्व को इस दोहे के माध्यम से यूँ समझातें हैं।
राम राम सब कोई कहे ठग ठाकुर और चोर,
बिना प्रेम के रिझत नाही तुलसी नंदकिशोर।

तुलसीदासजी द्वारा रचित इस दोहे का भावार्थ है राम भगवान को सिर्फ प्रेम चाहिए।
भगवान की आराधना मतलब ही भगवान के प्रति प्रेमभाव प्रकट करना है।
संत विवेकानंद जी ने राजयोग,कर्मयोग पर पुस्तक लिखी,लेकिन उनके चरित्र में लिखा है कि उन्हें संतुष्टि तब मिली जब उन्होंने प्रेमयोग पर लिखा।
रामभगवान को सिर्फ प्रेम चाहिए।प्रेम का इजहार करने के लिए किसी शस्त्र की कोई आवश्यकता नहीं होती है। सिर्फ अंतर्मन में प्रेम का भाव चाहिए। ऐसा संतो का कहना है।
राम की महिमा, रामभक्त हनुमान के बिना अधूरी है। इसीलिए राम के साथ हनुमानजी को याद किया जा रहा है।
हनुमानजी को याद किया जाना ही,सच्चें धार्मिकता का प्रमाण है। इसलिए हनुमानजी को याद करने वालों को प्रणाम है।
एक भजन की दो पंक्तिया याद आ गई।
मुक्ति मिले न श्री राम के बिना,
भक्ति मिले न हनुमान के बिना

जब से हनुमानजी का स्मरण सर्वत्र होने लगा है,निश्चित ही रामभगवान प्रसन्न होंगे।
रामभक्तों की तादाद दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही है।
आज सीतारामजी लेख पढ़कर बहुत खुश हुए। कहने लगे आपने पहली बार समझदारी का परिचय दिया है।
यह कहते हुए सीतारामजी ने विषयांतर किया और एक समाचार दुःखद सुनाया। वैसे भी इनदिनों कोई सुखद समाचार सुनने को मिलता ही कहाँ है?
दुःखद समाचार इसतरह का है।
एक किसान अपने खेत में भरपूर लहलहाती फ़सल देख बहुत प्रसन्न हुआ। लेकिन जब उसने खेत से फ़सल की कटाई की और देखा आधी से ज्यादा फसल खराब हो गई थी।
इसलिए सिर्फ Quantity देख कर खुश नहीं होना चाहिए,
Quality को परखना अनिवार्य है।
Quality खराब होने का कारण बेतहाशा Quantity बढाने के लिए अधिक मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल किया।
उर्वरक (Fertilizers) कृषि में उपज बढ़ाने के लिए प्रयुक्त रसायन हैं जो पेड-पौधों की वृद्धि में सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पानी में शीघ्र घुलने वाले ये रसायन मिट्टी में या पत्तियों पर छिड़काव करके प्रयुक्त किये जाते हैं।
इसतरह फसल खराब होने के लिए आजकल की भाषा में कहा जाता है,केमिकल लोचा। केमिकल लोचा का मतलब होता है,मानव के द्वारा दूषित शब्द रूपी उर्वरकों का इस्तेमाल करना।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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