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फेरबदल Shuffling

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शशिकांत गुप्ते

एक राजनैतिक दल प्रांतों में अपने मुखियाओं बदलता है तो यह उसका आंतरिक मामला होता है।दूसरें दल में यदि फेरबदल होता है तो,उसकी आलोचना करने में कोई भी कसर छोड़ी नहीं जाती है।राजनैतिकदलों के आंतरिक मामले सामाचारों माध्यमों के लिए प्रमुख समाचार बन जातें हैं।
प्रांत के मुखियाओं को बदलना राजनैतिक दलों का आंतरिक मामला है।
सत्ताकेंद्रित राजनीति के प्रचलन में यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
राज्यों में और केंद्र में मंत्री मंडल में फेरबदल होता रहता है। इसे राजनैतिक भाषा में Reshuffling कहतें हैं।Shuffle इस अंग्रेजी शब्द अनुवाद होता है,फेंटना।ताश के पत्तों को फेंटा जाता है।जब ताश के पत्तों को फेंटा जाता है, तब पत्तों में से जोकरों को बाहर निकाल दिया जाता है।
ताश के पत्तों के बारें कहा जाता है कि,पत्तों में जोकर होने का मतलब होता है कि, जो भी व्यक्ति निरंतर ताश खेलता रहता है।वह जोकर जैसा ही हो जाता है।
ताश के पत्तों में जोकर का महत्व सिर्फ इसलिए है कि, जब 52 पत्तों में जब कोई पत्ता घूम हो जाता है,तब उसकी जगह जोकर को रखा जाता है,मतलब जोकर को इस्तेमाल किया जाता है।आश्चर्य तब होता है, जब पत्तों में से कोई राजा घूम हो जाता तो उसकी जगह भी जोकर को रखा जाता है।पत्तों में स्त्री लिंग रानी की जगह भी जोकर का इस्तेमाल होना भी आश्चर्यजनक ही है।
पैसों से खेले जाने वाले लोग अर्थात जुआरी हार जीत के लिएखेलतें हैं।हरजीत के खेल में एक खेल होता है रमी। इस खेल में जोकर का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।
ताश के पत्तों में लाल और काले पान के पत्ते, हमेशा एक दूसरें के विरोधी होतें हैं।लाल पान के स्वभाव वाले के अंदर भावना, प्यार तथा विनम्रता होती है,इसीलिए लालपान के राजा का चित्र Clean shave क्लीन शेव होता है।बाकी तीनों राजाओं के चित्र दाढ़ी वालें होतें हैं।
मुख्य मुद्दा है, राजनैतिक दलों के आंतरिक मामलों को समाचार माध्यमो में इतनी तवज्जों देना उचित नहीं है?मंत्री मंडल के सवाल यह होना चाहिए कि,फेरबदल से आमजन की बुनियादी समस्याओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?
समाचार माध्यमों ने यह सवाल उठाना चाहिए कि, जिस मंत्री या मुख्यमंत्री को बदला गया है, या बदलना पड़ा है।क्या वह अयोग्य था?क्या उसमें प्रशासनिक प्रबंधन की क्षमता नहीं थी?यदि ये कारण थे,तो उसे मंत्री या किसी प्रांत का मुख्यमंत्री बनाया ही क्यों गया?
क्या मंत्री मंडल के फेर बदल अर्थात Reshuffling से आमजन के लिए बनी योजनाओं के क्रियान्वय में जो कठिनाइयां आएंगी उसके लिए जिम्मेदार कौन?
राजनैतिक दलों द्वारा आंतरिक मामलों का खामियाजा आमजन को क्यों और कबतक भुगतना पड़ेगा?
समाचार माध्यमों द्वारा ऐसे व्यवहारिक प्रश्न उपस्थित किए जाना चाहिए।दुर्भाग्य से कुछ समाचार माध्यमों का पक्षपातपूर्ण रवैय्या होने से ऐसे मीडिया हाउस पर गोदी मीडिया का आरोप लगना स्वाभाविक है।लेकिन यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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