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सिद्धार्थ ताबिश बहुत अच्छा लिखते हैं

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तुम अगर इस बात को लेकर दुखी होते हो कि उनके लोग कांवड़ ले कर जाते हैं, खूब जुलूस निकालते हैं, अब दिन रात सिर्फ़ धार्मिक त्योहार ही मनाने में लिप्त हैं और सरकार उन्हें खूब सपोर्ट करती हैं, तो ठीक से सोच कर देखो कि क्या ये दुखी होने की बात है? 

तुम्हें भी ऐसे जुलूस लेकर निकलना है और अपने ऊपर हेलीकॉप्टर से फूल बरसवाने हैं? और ये तुम्हारे साथ नहीं हो रहा है तो ये देखकर तुम दुखी हो? 

तुम भी चाहते हो कि तुम्हारे नौजवान महीनों ऐसे जुलूस लेकर चलते रहें और उन्हें पुलिस और प्रशासन सिर आंखों पर बिठाए?

तुम्हें भी ऐसे डीजे लगा के रोड पर चलना है जिस के शोर से लोगों के कान के पर्दे फट जाएं? 

तुम्हें भी ऐसे जा कर मंदिरों के आगे नाचकर उन्हें नीचा दिखाना है और उन्हें डराना है?

 ये सब करना है तुम्हें?

बस चैन से बैठो दो घड़ी… और सोचो कि इस तरह की छूट तुम्हारी क़ौम को भी मिल जाएगी तो इस से तुम्हारा और तुम्हारी क़ौम का क्या फ़ायदा होगा?

ये तुम्हारी क़ौम के लिए तरक्की की बात होगी या इस से तुम्हारी क़ौम कुछ ही सालों में पांच छह सौ साल पीछे चली जाएगी… सोच के देखो थोड़ा?

पाकिस्तान को इस सब की छूट मिली.. उन्होंने अलग देश ही इसलिए बनाया था कि वो ये सब कर सकें खुल के.. आज वहां सिर्फ़ मौलवी हैं और मदरसे हैं.. वही सारे देश का भविष्य तय कर रहे हैं.. और उनके तयशुदा भविष्य से पाकिस्तान कहां पहुंचा है, ये सब आपके और सारी दुनिया के सामने है आज… 

उनका भविष्य ये है कि आज हम भारतीय, भारत में बनी जिन लक्जरी गाड़ियों में घूमते हैं वो उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है… जहां आज भारत है वो अब उनके लिए एक सपना है… वो ऐसे ही जुलूस निकाल के जहां पहुंचे हैं, वो आप देख सकते हैं… इस लेवल की धार्मिक स्वतंत्रता, जो तुम्हें नहीं मिल रही है और तुम उसे चाह रहे हो, उसका उदाहरण पाकिस्तान है और ये तुम्हारे लिए एक सबक है

तुम्हें तो दरअसल अब पॉपकॉर्न लेकर घर बैठने की ज़रूरत है… और शो एंजॉय करो… सारे रास्ते खाली कर दो उनके लिए जो अब दिन रात जुलूस और धार्मिक यात्रा करना चाहते हैं… खूब सपोर्ट करो बागेश्वर महाराज से लेकर हर उस बाबा को जो बड़ी से बड़ी भीड़ को अपना मुरीद करता जा रहा है… तुम खुद फूल बरसाओ  इन पर… 

तुम खुश हो कि तुम्हारे धार्मिक स्थलों के आगे नाचने वालों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है… जिस लेवल का डीजे और जिस आवाज़ का डीजे ये बजा रहे हैं वो अफ्रीका जैसे गरीब देश में भी बज जाए तो वहां भी सरकार बैन कर देगी, विकसित और विकासशील देशों की बात ही क्या कहें… तुम्हारे चार घर हैं गिनती के जहां ये कान फाड़ू डीजे और धार्मिक स्थलों के शोर आते हैं, ज्यादातर तो 99% इन्हीं के कान फटते हैं… उन्हीं के लोग मानसिक रोगी हो रहे हैं, वही इस धार्मिकता का असली मज़ा चख रहे हैं.

तुम दुखी तब होना जब सरकार तुम्हें स्कूलों में जाने से रोके…जब वो तुम्हें यूनिवर्सिटी में पढ़ने न दे, जब वो तुम्हारे बच्चों को किसी कॉम्पटेटिव एग्जाम में बैठने से रोके, जब वो तुम्हारे बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी और वैज्ञानिक बनने से रोके… ये जब होगा तब मैं भी तुम्हारे साथ दुख मनाऊंगा और तमाम समझदार बहुसंख्यक भी दुख मनाएंगे.

मगर अभी तो दुख का कोई कारण कहीं नहीं दिखता है.., 

ये पॉपकॉर्न लेकर शो एंजॉय करने का दौर है… 

एंजॉय करो और देखो कैसे पूरी की पूरी एक नस्ल और क़ौम ख़ुद अपने बर्बादी की दास्तान लिखती है जो आने वाले कुछ ही सालों में ऐसी ‘असुरक्षित’ भीड़ होगी जिसे कोई भी आसानी से अपने ‘कब्ज़े’ में कर लेगा.

~सिद्धार्थ ताबिश

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