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*सीकर के सतीश कुमार… मजदूर से लेकर मसाला मैन बनने तक का सफर*

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सीकर के सतीश, जिन्हें लोग “मसाला मैन” कहते हैं, विदेश में मजदूरी करने के बाद भारत लौटे और अपनी मसाला कंपनी शुरू की. आज वे न सिर्फ खुद सफल उद्यमी बने बल्कि दर्जनों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है.

कहते हैं इंसान में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो वह क्या कुछ नहीं कर सकता, वह अपनी मेहनत और लगन से हर मुकाम हासिल कर सकता है. कुछ ऐसा ही सीकर के छोटे से गांव टोड़ी माधोपुरा निवासी सतीश कुमार कुमार ने कर दिखाया है. एक समय विदेश में मजदूरी करने वाले सतीश आज खुद की एक मसाला मैन्युफैक्चरिंग कंपनी चला रहे हैं, वे अपने इस काम में दर्जनों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
छोटे से गांव से आने वाले सतीश कुमार ने बताया कि खुद की कंपनी बनाने से लेकर इसे मुनाफे तक पहुंचने में हुए सालों की मेहनत लगी है. यह आसान नहीं था, शुरुआती दिनों में घर घर जाकर अपने द्वारा बनाए गए मसलों को बेचता था. लेकिन, बहुत कम बिक्री हो पाती थी, पर मैने हार नहीं मानी. मैं मेहनत करता रहा आज मैने खुद की कंपनी बना ली है. उन्होंने बताया कि वे ऑनलाइन माध्यम से भी अपने मसालों को बेचते हैं.
घर की आर्थिक स्थिति खराब तो विदेश गए
सतीश कुमार ने बताया कि शादी के बाद जब जिम्मेदारियां बढ़ी तो खर्चे भी बढ़ने लगे. जिससे आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे खराब होने लगी. जिसके चलते 2009-10 में सऊदी अरब मजदूरी करने के लिए जाना पड़ा. लेकिन, वहां पर भी लगातार मेहनत करने के बाद भी कोई खास कमाई नहीं हो थी. घर का खर्च चलना भी मुश्किल हो रहा था. इसके बाद कुछ साल विदेश में मजदूरी करने के बाद घर आकर खेती करने का प्लान बनाया. घर वालों से बात कि तो उन्होंने भी साथ दिया. इसके बाद वे सऊदी अरब से मजदूरी का काम छोड़कर अपने घर वापस आ गए.

घर आकर उन्होंने गेहूं, बाजरा, चना, मिर्ची की पारंपरिक खेती शुरू की, लेकिन उसमें भी कोई खास फायदा नहीं हो रहा था. 6 महीने कड़ी मेहनत करने के बाद कुछ पैसे बचते, वो भी दोबारा फसल लगाने में खर्च हो जाते. कभी-कभी मौसम की मार और भाव भी मिलने पर नुकसान भी होता. इससे परेशान होकर सतीश ने खेती के अलावा कुछ खुद का काम शुरू करने की सोची. परिजनों और घर वालों से बात करने पर सभी को राय से उन्होंने मसाले का व्यापार करने का मन बनाया.
बाइक से कार तक का सफर
उन्होंने बताया कि, मार्केट में लगातार अशुद्ध मसाले बढ़ रहे हैं. थोड़े से मुनाफे के लिए लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. सभी मसालों में मिलावट आ रही है. ऐसे में मैने खुद मसाले घर पर ही बनाकर उन्हें बेचने का निर्णय लिया. इसी सोच के साथ सतीश ने 2017 में कुछ पैसे कर्ज लेकर अपनी खुद की मसाला प्रोसेसिंग यूनिट लगाई. शुद्ध मसाला तैयार करने के लिए वे किसानों से कांटेक्ट करके कच्चा माल लेकर आते.
उन्होंने बताया कि शुरुआत में मेरे परिवार के सदस्य और मैं एक दिन पूरे मसाला तैयार करते और उन्हें पैकिंग करते. उसके बाद अगले दिन में बाइक से आसपास के गांवों के अंदर घर-घर जाकर उन्हें बेचने जाता. शुरुआत में एक महीने में केवल 10 से 12 हजार रुपए की ही बिक्री हुई. इससे प्रोसेसिंग यूनिट का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा था. ऐसे में मैने लोगों को अपने शुद्ध मसाले की जानकारी भी लोगों को देने लगा. जब धीरे-धीरे मुनाफा पढ़ने लगा तो कोरोना आ गया.
कोरोना कल के दौरान मसाले की बहुत कम हो गई. लेकिन इस दौरान लोगों को समझ में आया कि शुद्ध चीज खाने में ही फायदा है. कोरोना खत्म हुआ तो फिर से मेरे मसाले के डिमांड बढ़ने लगी. 2023 में डिमांड बड़ी तो मैने भी काम बढ़ा दिया और लोगों को काम पर रखा. उन्होंने बताया कि अब उन्होंने अपनी खुद की कार खरीद ली है. काम अच्छा चलने लगा है. सरकार की लोकल फॉर वोकल और अशुद्ध के खिलाफ अभियान से लोग जागरुक हो रहे हैं. इससे स्थानीय स्तर के व्यापारियों का मुनाफा बढ़ रहा है.
सीकर में मसाला में के नाम से प्रसिद्ध
सीकर में सतीश कुमार को अपने शुद्ध मसाले के चलते मसाला मिल के नाम से जाना जाता है. इनकी नोखवाल मसाला के नाम से कंपनी है. ऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से भी अपने मसाले को आसपास के जिलों में भेज रहे हैं. हजारों से शुरू हुआ व्यापार अब लाखों तक पहुंच गया है. अब उनकी कंपनी में दर्जनों लोग काम करते हैं. उन्होंने बताया कि अगर जीवन में एक ही लक्ष्य रखा जाए तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है.

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