-सुसंस्कृति परिहार
सखी,17नवम्बर को वोट देने ज़रुर जाना है ये हक हमारे संविधान ने हमें दिया है और संविधान भारत की प्रथम सरकार जिसके मुखिया पंडित जवाहरलाल नेहरू थे ने दिया है।पहले 21वर्ष की आयु में वोट देने का अधिकार था उसे 18वर्ष करने का फैसला भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार ने लिया था। आज बच्चों को छोड़कर तमाम युवा मतदान करने का अधिकार रखते हैं।यह हमारी लोकतांत्रिक ताकत है।हमारा सबसे बड़ा हथियार है।इससे हमने बड़ी बड़ी सरकारों को पटकनी दी है।
संविधान की ताकत देखिए जिसमें हर वर्ग की महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया हुआ है लेकिन इसका उपयोग सोच समझकर करने से हम मज़बूत होंगे। वर्तमान सरकार को मालूम है कि आज भी महिलाओं की आस्था धर्म में ज़्यादा है जिससे आत्मिक शांति के सिवा कुछ नहीं मिलता बहुसंख्यक महिलाएं साक्षर भी नहीं है ताकि अपना भला बुरा समझ सकें। इसलिए घर का बड़ा या पति जिस तरफ इशारा कर देता है वह भेंड़ बकरियों की तरह उस ओर चल देती हैं ये ग़लत है उसे अपना भला बुरा समझना चाहिए।वह सदियों से दासता का जीवन जी रही है। मर्दों ने ही उसे शिक्षित होने से रोका है घर का जिम्मा सौंप उसे हर तरह से कमज़ोर किया है।यह बात अच्छी तरह समझनी होगी।जो मिलेगा वह अपने काम से मिलेगा।
याद करिए भारत देश को आज़ादी मिलने के बाद जितनी तेजी से विद्यालय खुले उतनी ही तेजी से महिलाओं के लिए शिक्षा और नौकरी के दरवाज़े खुले हैं उन्हें राजनीति में सक्रिय करने पंचायत और नगर निकाय चुनावों में 50% आरक्षण दिया गया। संसद में भी 33%आरक्षण का बिल पास हुआ है लेकिन वह दूर की कौड़ी है तकरीबन एक दशक के बाद यह मुनासिब हो। क्योंकि इसे जनगणना जैसे मसले से जोड़ा गया जबकि इसे पिछली जनगणना के आधार पर संभव किया जा सकता था। वर्तमान सरकार ने इसका जुमला की तरह इस्तेमाल किया ताकि बहनें खुश हो जाएं कांग्रेस से जैसे राज्य में तत्काल लागू किया वैसा क्यों नहीं। कांग्रेस सरकार से ही अब जनगणना और जाति गणना की उम्मीद है।
भारत सरकार या कहें मोदी सरकार ने आपसे कितने विश्वास से पासबुक खुलवाई थी 15लाख आएगा।वह तो नहीं आया बल्कि उसकी चाहत में आपकी जमा राशि भी हड़प ली गई।महिला अत्याचार और बलात्कार के मामले में मध्यप्रदेश अव्वल है और मोदी जी ने मणिपुर ना जाकर यह बतला दिया कि उनका पीड़ित महिलाओं से कोई वास्ता नहीं है उत्तरप्रदेश में बलात्कारी नेताओं के साथ घूमते हैं तो गुजरात में सम्मानित होते हैं । मध्यप्रदेश में तो कथित मामा ने लाड़ली बहना योजना चुनाव आते ही खोल दी बहनें खुश हो गई।यह राशि घरों में विवाद का कारण बन गई वहीं हज़ारों महिलाएं कतार में हैं उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है। मोदीजी से झूठ में मामा आगे निकल गया। वितरित बहना राशि क़र्ज़ में ला के बांटी गई। चुनाव बाद सब ठंडे बस्ते में चले जाना है। पहले साड़ियां,कंबल बंटते रहे हैं चोरी चोरी और अब सीनाजोरी कर बहनों को चुनावी रिश्वत दी जा रही है।
इस कथित बहना योजना के परोपकार को समझिए महिलाओं के हाथ में रुपए पैसे नहीं रहते सदियों से महिलाएं अपने खर्चे से बचाकर कुछ बचत करती रही हैं उसे भी मोदी सरकार ने नोटबंदी के बहाने छीन लिया याद है ना। मोदी तो महिलाओं से नफ़रत की मिसाल है वो हितैषी नहीं हो सकते।घर हो या मंत्रीमंडल में वे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण,और स्मृति ईरानी के सिवाय किसी को महत्व नहीं देते।उनसे और संघ के पटु शिष्य शिवराज से महिला उत्थान की कल्पना भी नहीं की जा सकती।संघ तो महिला विरोधी है उनके चेले कैसे महिला उत्थान के पक्षधर हो सकते हैं। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती का साथ संघ और भाजपा का क्या हाल कर रखा है। महिला पहलवानों को भी विस्मृत नहीं कीजिए। उनसे अभद्र व्यवहार करने वाला बृजभूषण आज भी सुरक्षित है।इधर शिवराज सरकार का आचरण देखिए एक एस डी एम निशा बांगरे को गृहप्रवेश कार्यक्रम में जाने की अनुमति नहीं दी गई।उसने नौकरी से इस्तीफा मांगा वह भी बड़ी मुश्किल में तब दिया जब चुनाव के टिकिट आवंटित हो चुके थे।एक पढ़ी लिखी अधिकारी महिला को जब इतना परेशान किया जाता है तो आम औरत की बात तो पूछिए नहीं।
वे औरत को नोट देकर खरीदना चाह रहे हैं यदि आपने मदद ली है तो यह आपने मांगा नहीं है मिला है। इसे वोट से जोड़कर मत देखिए।इससे बेहतर तो यह होता वे हर क्षेत्र में महिला कल्याण हेतु उद्यम खोल देते।बेराजगार युवक-युवती को रोजगार देते। बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा और सबको नि: शुल्क स्वास्थ्य की सुविधाएं देते। निजी स्कूलों और निजी अस्पतालों के शोषण पर रोक लगाते।
बहनों अपने हक हासिल करने आगे बढ़ो संघर्ष करो अपने और परिवार के कल्याण का पथ चुनो।हजार दो हजार से कुछ नहीं होने वाला।अपने हाथ को जगन्नाथ समझो उसका साथ दो।आप वोट बहुत कीमती है उसे ज़रुर देकर प्रदेश और देश को मज़बूत करें।लूट और झूठ का दान कभी फलीभूत नहीं होता।

