कुजात सोशलिस्ट डा० फारुख अब्दुल्ला से मिलने गये
२३ जून को श्रीनगर में हम कुजात सोशलिस्ट डा० फारुख अब्दुल्ला से मिलने गये कि उन्हें अपनी यात्रा के नतीजे बता सकें । नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और फिलवक्त जैसी भी लंगडी लूली अधिकारहीन राज्य की सत्ता है उसके शीर्ष पर है ।

आजादी के तत्काल बाद कश्मीर के भारत में विलय के पूर्व ही पाकिस्तानी समर्थन से क़बीलाई गिरोहों का मुक़ाबला करने में मरहूम शेख़ अब्दुल्ला की साहसिक और राष्ट्रीय भूमिका से कोई इंकार नहीं कर सकता । भारतीय सेना तो विलय के बाद में आई । शेख़ अब्दुल्ला कश्मीर के सबसे बड़े वास्तविक किसान नेता थे और सत्ता में आते ही उन्होनें किसानों के पक्ष में ऐतिहासिक भूमिसुधार लागू कर दिये थे । यदि सत्य और सही अध्ययन हो तो नेशनल कांफ्रेंस ने कभी भी भारतविरोधी रुख अख़्तियार नहीं किया बल्कि शेख़ अब्दुल्ला के बाद से ही कश्मीर भारत के पक्ष और पाकिस्तान के विरोध में अपनी स्पष्ट राय रखी जिसके कारण कई बार उन्हें अलोकप्रियता को भी झेलना पड़ा। अब्दुल्ला परिवार की पंथिक उदारता और भारतीय राष्ट्र के प्रति समर्थन ने ही उन्हें अटल बिहारी सरकार तक में हिस्सेदार बनाया था। राजीव गांधी सरकार से भी अच्छे सम्बंध रहे । कांग्रेस ने हमेशा कभी समर्थन कभी विरोध की नीति अपनाई और कश्मीर को शेष भारत की नजर में खलनायक बनाकर ध्रुवीकरण की राजनीति की बुनियाद रखी ।
भारतीय इतिहास का यह दिलचस्प लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय है कि प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने भारतीय एकता व राष्ट्रीयता के प्रबल समर्थक और कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री शेख़ अब्दुल्ला को कब कैसे क्यों और इतनी लम्बी अवधि तक गिरफ़्तार व नज़रबंद कर रखा ? इस विषय पर आज नहीं पर कभी चर्चा ज़रूर होनी चाहिये।
मेरे द्वारा उठाये दो मुद्दों पर्यटन एवं राष्ट्रीय सामाजिक एकता पर डा ० फारुख अब्दुल्ला ने स्पष्टतया कहा कि उन्हें पर्यटन की चिंता नहीं है उसका जो होना होगा सो देखा जायेगा लेकिन असल मुद्दा है कि भारत का मूल विचार और बड़े बलिदानों से कमाई सामाजिक एकता ख़तरे में है और यही उनकी मूल चिंता है। राष्ट्र का संवैधानिक संघीय चरित्र खत्म होने से और पंथिक ध्रुवीकरण होने से देर सबेर कश्मीर में जनविस्फोट हो सकता है जिसे रोकने की हर संभव कोशिश करनी चाहिये । यह दुख का विषय है कि भारत के दोनों मुख्य राजनीतिक दल कश्मीर के प्रश्नों व मुद्दों को जानबूझकर नहीं देखना चाहते ।
डा० फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर की जनता व भारतीय राष्ट्रीय राजनीति के हित में डा० लोहिया और जे पी के महान योगदान को भी याद किया
क्या भारत माता का मुकुट कहा जाने वाला अभिन्न अंग कश्मीर हमेशा ही कभी कांग्रेस कभी भाजपा द्वारा शेष भारत में वोट बटोरने के लिये इस्तेमाल होता रहेगा ? धारा ३७० के रहने या हटने से आम कश्मीरियों को कोई फर्क नहीं पड़ा जम्मू कश्मीर राज्य के टुकडे कर उसे संघराज्य बना देने से असंतोष है और वह अंदर अंदर खदक रहा है लद्दाख में और जम्मू में भी ।
विषयांतर कर बता दूँ कि हमारा वाहन पहले गलती से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवासीय परिसर में चला गया जहॉं किसी भी राज्य के एक साधारण मंत्री से भी कम और बेपरवाह सुरक्षाकर्मियों को देख कर हमें आश्चर्य भी हुआ। लगभग सभी गार्डों नें न गाड़ी से कोई पूछताछ की और न ही उठकर हमारी ओर देखा ही! डा फारुख अब्दुल्ला ने तो शायद कहलवा दिया हो कि कोई सुरक्षा जॉंच न की जाये । फिर भी ऐसी लापरवाही और कम सुरक्षा कवर मुझे आशंकित कर रहा है।
रमाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश