
,मुनेश त्यागी
पुराने जमाने के ज्योतिषियों ने सूर्य और चंद्र को भी ग्रह मान लिया था। इसके अलावा उन्होंने दो ऐसे ग्रहों की भी कल्पना की थी जिनका आकाश में कोई अस्तित्व नहीं है। ये दोनों काल्पनिक गृह थे राहु और केतु। हमारे देश में सबसे प्रचलित ग्रंथ ऋग्वेद में बृहस्पति शुक्र और मंगल के नाम हैं पर उनमें राहु केतु का कोई उल्लेख नहीं है। राहु केतु की कल्पना बाद में की गई। आज हम जानते हैं कि राहु और केतु आकाश के दो काल्पनिक बिंदु हैं। इनका स्वतंत्र कोई अस्तित्व नहीं है।
हमारे देश के प्राचीन ग्रंथों में नौ ग्रह के नाम मिलते हैं। पुराने जमाने के ये नौ ग्रह इस प्रकार हैं,,, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इन नौ ग्रहों को देवता मानकर धार्मिक लोग आज भी इनकी पूजा अर्चना करते हैं।
लेकिन आज हम जानते हैं कि सूर्य ग्रह नहीं है। यह एक तारा है। चांद भी ग्रह नहीं है, यह पृथ्वी का उपग्रह है। राहु और केतु कोई ग्रह नहीं हैं, बल्कि ये दोनों काल्पनिक बिंदु हैं। आज हमारी जानकारी के अनुसार सौर मंडल के असली नौ ग्रह हैं,,,,,,,, बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति शनि, यूरेनस, नेप्चून और प्लेटो। इनमें से अंतिम तीन ग्रह यूरेनस नेप्चून और प्लेटो हम से बहुत दूर हैं। इन्हें केवल दुरबीन से ही देखा जा सकता है। लेटेस्ट जानकारी के अनुसार प्लेटो एक छोटा ग्रह है, इसलिए इसे एक छुद्र ग्रह की संज्ञा दे दी गई है।
इस प्रकार हम देख रहे हैं किस सूरज चांद राहु और केतु कोई ग्रह नहीं हैं, सूरज एक तारा है, चांद पृथ्वी का उपग्रह है और राहु और केतु कोई ग्रह नहीं हैं, बल्कि यह दो काल्पनिक बिंदु हैं जिन्हें पंडे और पुजारी अपनी उदर पूर्ति के लिए प्रयोग कर रहे हैं और लोगों को लगातार डरा रहे हैं।
कोपरनिकस, ज्यार्दन ब्रूनो और गैलीलियो ये दुनिया के आधुनिक श्रृषि हैं। इन्होंने ही सबसे पहले सूरज, चांद और ग्रहों के बारे में जानकारी दी और उन्होंने बताया कि सूरज पृथ्वी के चारों तरफ नहीं घूमता है बल्कि पृथ्वी समेत पूरा सौरमंडल सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाता है। हमारी पृथ्वी का व्यास 12700 किलोमीटर है। इसका वजन 66 खराब दिन है।
सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास से 109 गुना अधिक है। सूर्य इतना बड़ा है कि इसमें हमारी पृथ्वी जैसे 13 लाख पिंड समा सकते हैं। सूरज पृथ्वी से 3 लाख 30 हजार गुना भारी है। सूर्य की सतह का तापमान 6000 डिग्री सेंटीग्रेड है सूर्य हमसे 14 करोड़ 90 लाख किलोमीटर दूर है।
सूरज में लगातार हाइड्रोजन के विस्फोट होते रहते हैं जिस कारण उसकी गर्मी हमारी पृथ्वी तक पहुंचती है। हमारी पृथ्वी एक साल में सूर्य का चक्कर लगाती है। सूरज की किरण 8 मिनटों में हमारी पृथ्वी पर पहुंचती है। सूर्य की बहुत थोड़ी सी उर्जा हमारी पृथ्वी पर पहुंच पाती है जो हमारे लिए पर्याप्त है। सूरज अपने ग्रहों और उपग्रहों को साथ लेकर प्रति सेकंड 220 किलोमीटर के वेग से आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा कर रहा है।
पृथ्वी का एक उपग्रह चांद है जिसे लेकर पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है। चांद भी पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जब चांद पृथ्वी के चक्कर काटता काटता सूरज और पृथ्वी के बीच में एक लाइन में आ जाता है तो अमावस्या के दिन, कुछ समय के लिए पृथ्वी पर सूरज की रोशनी नहीं आती, जिसे चांद ढक लेता है। पृथ्वी पर पड़ रही चांद की छाया को सूर्यग्रहण कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक और खगोलीय घटना है। इसमें किसी देवी-देवताओं का कोई रोल नहीं है।
25 अक्टूबर को हमारे देश में सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया और अखबारों में ज्योतिषियों और पुजारियों ने हाय तौबा मचा रखी है। लोगों में एक तरह का डर और खौफ पैदा कर दिया है। इससे डरने की जरूरत नहीं है यह केवल और केवल एक खगोलीय और प्राकृतिक घटना है। हमारी जनता को इस प्राकृतिक घटना को इसी तरह लेना चाहिए और पुजारियों और पंडों के छल फरेब में नहीं आना चाहिए। इस मौके पर हम आपको एक बात बता देना चाहते हैं कि आज जब ग्रहण पड़ेगा, उस समय हम अपने यारों दोस्तों को बुलाकर, अपने घर में चाय पार्टी करेंगे। चाय पिएंगे, नमकीन और मिष्ठान खाएंगे और ग्रहण के बारे में चर्चा करेंगे। हमें इसे डरना नहीं है बल्कि इस प्राकृतिक और खगोलीय अद्भुत घटना का आनंद लेना है।
सात आठ साल पहले भी एक सूर्य ग्रहण दिन में लगभग 11:00 बजे शुरू हुआ था तो उस समय भी इन ज्योतिषियों ने और पुजारी पंडों ने अखबारों में हाय तौबा मचा दी थी और लोगों को डरा दिया। उन्होंने कहा था कि सूर्य ग्रहण में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, कुछ खाना नहीं चाहिए, कुछ पीना नहीं चाहिए, गर्भवती स्त्रियों को बाहर नहीं निकलना चाहिए, लोगों को सब काम बंद कर देने चाहिएं। मगर जब मेरठ के बुद्धिजीवियों ने, वैज्ञानिकों ने और लेखकों ने मिलजुल कर मंत्रणा की और आम जनता का आह्वान किया कि वे सब सूर्य ग्रहण को, ग्रहण के चश्मे से और एक्सरे प्लेट को लगा कर देखें। खूब खाएं पिएं, मौज करें, बाहर निकलें, अपना काम करें, घर में रहने की जरूरत नहीं है।
और गजब की बात यह है कि जब सूर्य ग्रहण पड़ रहा था तो लोग सूक्ष्म दर्शी चश्मे और एक्सरे प्लेट से सूर्य ग्रहण को देख रहे थे, तो वहीं पर चाय का बिस्कुट का इंतजाम किया गया था। जब ग्रहण पड़ रहा था तो लोगों ने प्रेस के सामने चाय पी, बिस्कुट खाए और सब काम किये और ज्योतिषियों और पुजारी पंडों के डर को, खौफ को, अंधविश्वास को और धर्मांधता को, वहीं धराशाई कर दिया। लोग यह सब देख कर खुशी से नाच रहे थे और इसे एक अचंभा मान रहे थे और जब यही रिपोर्ट अगले दिन अखबारों में आई तो लोगों के दिमाग से सूर्य ग्रहण का खौफ निकल गया, नदारद हो गया।
ऐसी ही जानकारी आज से लगभग 20 साल पहले भी भारत के महान वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल ने टेलीविजन पर दी गई थी और सूर्य ग्रहण का आंखों देखा हाल पूरी दुनिया को बताया और दिखाया था। उसमें सूर्य ग्रहण के समय सुबह के समय दिन में अंधेरा हो गया था पक्षी अपने घोंसलों की तरफ लौटने लगे थे, मगर इसका भी वैज्ञानिक प्रचार प्रसार किया गया और सारी दुनिया के सामने सूर्य ग्रहण की स्थिति बताई गई। लोगों ने उस घटना को टेलीविजन पर अपनी आंखों से देखा था और अपनी अज्ञानता और अंधविश्वास को दूर किया था।
यहां पर हम कहना चाहते हैं कि हमारे देशवासी अंधविश्वास में न रहें, ज्योतिषियों और पंडे पुजारियों की अफवाह और डर को नजरअंदाज कर दें। सूर्य ग्रहण को वैज्ञानिक ज्ञान विज्ञान के सिद्धांतों और नजरिए से, तरीके से देखें, उसका अध्ययन करें, उसके बारे में अपने बच्चों को जानकारी दें। यह कोई काल्पनिक घटना नहीं है, यह कोई देवी-देवताओं द्वारा रची गई कोई घटना नहीं है। बल्कि यह एक खगोलीय और प्राकृतिक घटना है जिससे डरने की, खौफ खाने की, कोई जरूरत नहीं है और हमें इस प्राकृतिक और खगोलीय नजारे का आनन्द लेना चाहिए। यह प्रकृति का एक बड़ा अद्भुत दृश्य है, एक अद्भुत नजारा है।