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पिता के नक्श-ए-कदम पर बेटा…..1988 में पिता महेंद्र टिकैत ने राजीव गांधी को झुका दिया था, 21वीं सदी में बेटा मोदी सरकार के सामने डटा

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नई दिल्ली

दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को दो महीने से ज्यादा हो गए हैं। इस आंदोलन ने 32 साल पहले हुए एक और किसान आंदोलन की याद ताजा कर दी है। तब भारतीय किसान संघ के संस्थापक बाबा टिकैत (चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ) ने दिल्ली को एक तरह से ठप कर दिया था। उस वक्त राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। अब राकेश टिकैत मोदी सरकार से किसानों की मांगें मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। राकेश टिकैत उन्हीं चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं, जिन्होंने 1988 में केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था।

दरअसल, राकेश टिकैत को किसान नेता की पहचान विरासत में मिली। वे इसे कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों का एक बड़ा वर्ग राकेश पर भरोसा करता है। हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत हैं। वे राकेश के बड़े भाई हैं, लेकिन यूनियन से जुड़े ज्यादातर और बड़े फैसले राकेश ही लेते हैं।

फोटो 1988 में हुए किसान आंदोलन का है। इसमें राकेश टिकैत के पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत नजर आ रहे हैं।

झुक गई थी राजीव गांधी सरकार
राकेश के पिता बाबा टिकैत के नेतृत्व में किसानों के कई आंदोलन हुए। इन्हीं में एक आंदोलन ऐसा था, जिसके सामने तब की केंद्र सरकार को झुकना पड़ा था। इसकी शुरुआत 25 अक्टूबर, 1988 को हुई थी। आंदोलन में 14 राज्यों के किसान शामिल थे। करीब 5 लाख किसानों ने दिल्ली में विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक पर जैसे कब्जा कर लिया था। 7 दिन चले इस आंदोलन की वजह से राजीव गांधी सरकार दबाव में आ गई थी। उसने किसानों की मांगें मान ली थीं।

1993 में राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

राकेश ने छोड़ दी थी पुलिस की नौकरी
राकेश टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में 4 जून 1969 को हुआ। मेरठ यूनिवर्सिटी से MA किया। दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल बन गए। 1993-94 में लाल किले पर पिता स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में एक आंदोलन चल रहा था। अफसरों ने राकेश पर दबाव डाला कि वे पिता को समझाकर आंदोलन खत्म कराएं। इसी दबाव के चलते 1993 में राकेश ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद किसान आंदोलन में हिस्सा लेना शुरू किया। 1997 में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए।

44 बार जेल गए
राकेश किसानों की लड़ाई लड़ते रहने के कारण 44 बार जेल जा चुके हैं। BKU के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता आलोक बताते हैं- मध्य प्रदेश में किसानों के भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन करने पर उन्हें 39 दिन जेल में रहना पड़ा था। एक बार दिल्ली में संसद भवन परिसर के बाहर गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर फसल जलाई थी। इसकी वजह से तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था।

राकेश टिकैत ने दो चुनाव लड़े, लेकिन दोनों ही बार नाकाम रहे।

सियासत में नाकाम
राकेश ने दो बार चुनाव लड़ा। दोनों बार नाकाम रहे। पहला- 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय के तौर पर उतरे और हारे। दूसरा- 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़ा। यहां भी नाकामी हाथ लगी।

राकेश टिकैत का परिवार

राकेश टिकैत की शादी 1985 में बागपत जनपद के दादरी गांव में रहने वाली सुनीता देवी से हुई। तीन बच्चे हैं। बेटे का नाम चरण सिंह हैं। दो बेटियों के नाम सीमा और ज्योति हैं। तीनों बच्चों की शादी हो चुकी है।

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