विश्व युद्ध की आहट : चीन ने बनाया खतरनाक सिंथेटिक वायरस
Ramswaroop Mantri
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सनत जैन
चीन के रासायनिक वैज्ञानिकों ने एक खतरनाक वायरस तैयार किया है। इस वायरस के संपर्क में आने के बाद 3 दिन के अंदर व्यक्ति की मौत होना तय है। साइंस डायरेक्ट पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार यह नया सिंथेटिक वायरस इबोला वायरस की तरह काम करता है बल्कि यह इबोला वायरस से ज्यादा खतरनाक है। शोध में दी गई जानकारी के अनुसार हैवई मेडिकल विश्वविद्यालय चीन के वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस की कुछ जीन से एक नया सिंथेटिक वायरस तैयार किया है। यह वाइरस इबोला वायरस की तरह शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है। चीन के वैज्ञानिकों ने 10 हमस्टरों को वायरस का इंजेक्शन लगाया। टीका लगाने के 3 दिन के अंदर ही हमस्टरों में बीमारी के लक्षण उत्पन्न हो गए। यह लक्षण इंसानों में इबोला वायरस से होने वाली बीमारी के समान थे। इस वायरस के संपर्क में आने के बाद शरीर कमजोर पड़ना शुरू हो गया। 3 दिन के अंदर शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया। उसके बाद सभी 10 हमस्टरों की मौत हो गई। चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस उन्होंने इबोला की रोकथाम के लिए तैयार किया है। इबोला की रोकथाम के लिए नई दवाइयां और टीका बनाने में इससे मदद मिलेगी। किसी भी शोध का उपयोग जब शुरू होता है। तब इसी तरह की बात की जाती है। इसके दुष्परिणाम समय-समय पर सामने आते रहे हैं। हथियारों का निर्माण भी सुरक्षा के लिए हुआ था, लेकिन यही हथियार अब मानव जीवन के लिए विध्वंस का कारण बन गए हैं। दवाओं को तैयार करने के लिए भी यही उद्देश्य बताया जाता है। युद्ध के लिए जो हथियार बनाए जाते हैं उसमें जो कारोबार होता है। उसी के समकक्ष अब दवा का कारोबार भी सारी दुनिया में हो रहा है। कोरोना वायरस से सारी दुनिया के देश भयाक्रांत थे। दुनिया के देशों में लाखों लोगों की इस वायरस के कारण मौत हो गई। अभी तक यह पता नहीं लगाया जा सका है, कोरोना वायरस का जन्मदाता कौन है। कोरोना वायरस आने के बाद खरबों रुपए की दवाओं और टीका (वैक्सीन) का कारोबार पिछले तीन वर्षों में सारी दुनिया के देशों में हुआ है। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। यह वायरस किस तरह से दुनिया के देशों में फैला। 3 बरस बीत जाने के बाद भी इसका पता नहीं लगाया जा सका है। अमेरिका और इराक के बीच 2003 में रासायनिक हथियार तैयार करने की आशंका को लेकर एक बड़ा युद्ध हुआ। हजारों लोगों की इसमें मौत हुई, लाखों लोग इससे प्रभावित हुए। अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ा दिया। इराक के पास किसी तरह के रासायनिक हथियार होने का पता आज तक दुनिया को नहीं लगा। इस युद्ध की कीमत सारी दुनिया के देशों को चुकानी पड़ी। दुनिया के देशों में जिस तरह के हालत वर्तमान में बने हुए हैं, उससे तृतीय विश्व युद्ध की आशंका उपजी है जिससे सारी दुनिया भयाक्रांत है। इजराइल, संयुक्त राष्ट्र संघ सहित किसी की बात को नहीं मान रहा है। गाजा पर उसके हमले लगातार जारी हैं। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के रूप में करीब 50000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं। वहां पर बच्चे, महिलाएं और पुरुष भूख से मर रहे हैं। युद्ध को रोकने की जो भी कोशिश की गई। वह आज तक सफल नहीं हो पाई। इसी तरह से रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से युद्ध चल रहा है। जो विकास युद्धरत देशों में पिछले कई दशकों में हुआ था, वह सब नष्ट हो गया है। युद्ध में घोषित रूप से हजारों लोग मौत के मुंह में चले गए हैं। लाखों लोग घायल और विकलांग हुए हैं। इसके बाद भी दुनिया के सभी देश मिलकर युद्ध को नहीं रोक पाए। अमेरिका का, चीन और रूस के साथ तनाव बना हुआ है। इस तनाव को देखते हुए चीन और रूस के बीच में एक ऐसी सुरक्षा संधि हुई है, जो अनलिमिटेड है। इसका मतलब यह हुआ, चीन और रूस मिलकर किसी भी स्तर तक जाकर एक-दूसरे का साथ देंगे। इसमें उत्तर कोरिया भी शामिल है। कोरोना वायरस की महामारी के रूप में लाखों लोगों की मौत दुनिया के देशों में हुई है। कोरोना वायरस का निर्माण चीन में ही हुआ था। चीन के माध्यम से यह वायरस सारी दुनिया के देशों में फैला। चीन ने अब जो नया सिंथेटिक वायरस बनाया है। मानवीय त्रुटि या रासायनिक हथियार के रूप में यदि इस वायरस का उपयोग युद्ध के रूप में हुआ तो ऐसी स्थिति में यह सिंथेटिक वायरस हवा के सहारे भी दुनिया के सभी देशों में फैलाया जा सकता है। जो मानव जीवन के साथ-साथ पशुओं और अन्य जीवों के लिए भी खतरनाक साबित होगा। इबोला वायरस का एंटीडोज बनाने के लिए जो नया सिंथेटिक वायरस तैयार किया गया है। यह इबोला से भी ज्यादा खतरनाक है। इस तरह के प्रयोग और रासायनिक सिंथेटिक वायरस के निर्माण को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह सारी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित होगा।