अग्नि आलोक

गौरैयां प्रकृति की बेटी हैं ,प्रकृति में ही रहेंगी ! 

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देवेन्द्र देव

आज बहुत दिनों बाद गौरैया आई ?
और मेरे सामने चहचहाने लगी ,
जैसे मेरी राजी खुशी पूछ रही हो !
और पूछ रही हो अब उदास क्यूँ हो ?
अब तो तुम्हारी और तुम्हारे बच्चों
की सुबह की नींद भी अबाध है !
अब तो पेड़ के फल और पत्ते भी
गंदगी नहीं फैलाते !


तो फिर यूँ सुबह-सुबह उदास क्यूँ ?
मैंने कहा , तू मेरी छोड़,अपनी बता ?
तू अब जहाँ रहती है खुश तो है ?
तो वो बोली , हमारी खुशियां छोटी
होती हैं , तो मैं खुश हूँ ।
तुम बताओ , तुम्हारे बच्चे अभी भी
देर तक सोते हैं क्या ?
कोई दिखाई नहीं दिया ।
वे बच्चे जिनकी खातिर तुमने
हमें बेघर कर दिया !


गौरैया तू मानव की विवशता
कहाँ समझ पायेगी ?
मानव जैसा स्वार्थी हृदय कहां
से लायेगी ?
बच्चे बड़े हुए तो जरूरतें बढीं ,
जरुरतों को पूरा करने को नज़रें
आंगन में खड़े नीम के पेड़ पर अड़ी !
तेरा घर , मेरे घर की जरुरतों के
बीच आ गया !
फिर जरुरतों का दानव नीम और
तेरा घर खा गया !
बच्चे बड़े होकर कोई विदेश गया
तो कोई और चला !
हर कोई उड़ चला तेरी तरहा ।
और कटे पंख लेकर ,
मैं यहीं पड़ा रह गया !
अब देख में हर तरफ से कंक्रीट
में घिरा हूँ !
और कभी-कभी तो ऐसा लगता है,
मैं कंक्रीट हो चला हूँ ?
अब मेरे पास ना बच्चे हैं , ना नीम है,
ना गौरैयां है !
गौरैया बोली , अपना ये भविष्य तूने
ही तो चुना है ।
तूझे किसी और ने नहीं , तेरी उम्मीदों
ने छला है ।
‘देव ‘ सुनो , तुम पहले से ही कंक्रीट थे ,
बस , इंसान होने का दिखावा कर रहे थे !
जब तक तुम्हारी जरूरतों में हम और
हमारे घर आते रहेंगें !
तुम्हारे जैसे मानव उदासी ओढ़ कर
यूँ पछताते रहेंगे !
गमले में कैक्टस उगाकर नीम का
आनंद लेना चाहते हो ?
खाली डिब्बों में गौरेया का घर बसाना
चाहते हो ?
गौरैयां प्रकृति की बेटी हैं प्रकृति में
ही रहेंगीं !
उसकी हर खुशी प्रकृति में ही
फूलेगी फलेगी !
तुम आनेवाली पीढियों को गौरैया
की चहचहाहट किताबों में ही
पढ़ देना !
जब वो पूछे , अब गौरैया कहाँ गई ?
शर्म से सिर झुका लेना !
बता देना कि बुद्धिमत्ता के दंभ में
और आधुनिकता की होड़ में ,
ना जाने कितनी गौरैयाओं के घर खा गए !
तभी तो अब हम प्रत्यक्ष से…!
प्रतिमाओं पर आ गये !

        साभार - सुप्रसिद्ध लेखक,कवि, प्रगतिशील विचारधारा के व्यक्तित्व श्री देवेन्द्र देव प्रिंसिपल,शंभू दयाल इंटरमीडिएट कॉलेज, गाजियाबाद , उप्र, संपर्क - 98111 27822

        संकलन - निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र, संपर्क - 9910629632
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