Site icon अग्नि आलोक

अक्षय तृतीया पर विशेष**इसलिए वे महात्मा है* 

Share

भारत दोसी*
जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने विवाह की उम्र बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को समर्थन दिया तो एक युवा ने संस्कृत निष्ठ हिन्दी में पत्र लिखा जिसमें धर्म की प्राचीन संहिता का उल्लंघन करने, राष्ट्रीय एकता की जड़ पर प्रहार करने और आस्था समाप्त करने के आरोप लगाए ।
ऋषिकेश का यह युवक नहीं जानता होगा कि 1 अप्रैल 1930 को लागू शारदा कानून से पहले ही गांधीजी अपने परिवार में विवाह की उम्र को बढ़ा चुके थे ।
स्वयं गांधीजी का विवाह 13 वर्ष की उम्र में 13 वर्ष की कस्तूर से हुआ था जिस पर उन्होनें अपनी आत्मकथा ” सत्य के प्रयोग ” में लिखा है कि ” मुझे अपने ऊपर दया आती है ।” वे इतनी कम उम्र मे विवाह के नुकसान, दुष्परिणाम पर अनेक बार विचार व्यक्त कर चुके हैं ।
जब वे अफ्रीका में थे और उनके बड़े पुत्र हरिलाल का विवाह भारत में 18 साल की उम्र मे भाई लक्ष्मीदास ने करवाया तब भी उन्होंने जल्द विवाह पर नाराजगी व्यक्त की थी ।
स्वयं बापू ने अपने दूसरे पुत्र मणिलाल का विवाह 35 वर्ष की उम्र में सुशीला से सन 1927 में करवाया । इसी तरह तीसरे पुत्र रामदास का विवाह 32 वर्ष की उम्र में सन 1928 में निर्मला से करवाया और चौथे पुत्र देवदास का 34 वर्ष की आयु में सन 1933 में लक्ष्मी से करवाया ।
समाज सुधारक की भूमिका बहुत ही कठिन होती है जो सुधार आप करना चाहते है वह स्वयं में और परिवार में करने होते है तभी समाज में आपकी बात का वजन रहता है महात्माजी ने सुधार को अपने जीवन में भी लागू किया वे कहते भी रहे की जो बदलाव आप दूसरों में चाहते हो वो पहले स्वयं में करो ।

Exit mobile version