चन्द्र भान पाल
अफवाह फैलाना यदि गुनाह है तो ये जो व्रत उपवास की पोथियां हैं वे अफवाह नहीं तो क्या हैं ? सत्यनारायण कथा,लक्ष्मी व्रत कथा, संतोषी व्रत कथा, सोलह गुरुवार कथा,सोलह शुक्रवार कथा,ग्यारह शनिवार कथा,हरतालिका व्रत कथा, गरूड़ पुराण कथा आदि जैसी अनेक भ्रामक और समाज को पथभ्रष्ट करने वाली ये कथाएं ये अफवाह नहीं हैं क्या हैं ? ये काल्पनिक बेसिक पैर की पुस्तकें छापकर लोगों में जो अफवाह फैलाई जा रहीं हैं यह गुनाह नहीं है तो क्या हैं ?

ऐसी ही अफवाहों के कारण दिल्ली के बुराड़ी में कुछ वर्षों पूर्व एक ही घर के 11 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी, अनेक लोग इस मोक्ष की अफवाह के कारण आत्महत्या कर चुके हैं ! गुप्तधन के नाम पर बलि दी जाती है ये अफवाहें नहीं हैं तो क्या हैं ? इसलिए इन छूठ पोथियों के लेखकों को भी गिरफ्तार करके कठोर दंड देना सुनिश्चित किया जाना चाहिए अथवा इन पोथी वालों से कहो कि किसी एक भी पोथी में दी गई जानकारी सत्य है यह सिद्ध करके दिखाओ ! यदि वास्तव में अफवाह विरोधी कानून अस्तित्व में है तो पहले इन पोथियों को बंद करो अथवा उन पोथियों पर लिखो कि “यह सब काल्पनिक है, इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है ” या ” यह अंधविश्वास फैलाना वास्तविक जीवन के लिए बहुत ही घातक है ! “
जबकि हकीकत यह है कि कथित आध्यात्मिकता के नाम पर कुछ बहुत ही कुटिल व धूर्त लोगों तथा धर्म,जातिवादी वैमनस्यता के नाम पर हिन्दू समाज में फूट डालने और बेवकूफ बनाने के लिए इस तरह के कुत्सित प्रयास करते रहते हैं इसी प्रकार सरकार में बैठे कथित सनातनी विचारधारा के पोषण करने वाले कर्णधारों को भी अपनी सत्ता की अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए हिन्दू समाज में अंधविश्वास और जाहिलता और पाखंड फैलाए रखना बहुत जरूरी होता है ! इसीलिए इस प्रकार की ‘भाग्यवादी ‘ और ‘ भगवान के आशीर्वाद से सबकुछ होगा ‘ जैसे विचार को समाज के हर व्यक्ति के दिलोदिमाग में हमेशा बनाए रखना चाहते हैं,ताकि भारतीय समाज का हर व्यक्ति भाग्यवादी और धार्मिक तौर पर कूपमंडूक बना रहे !
इसीलिए भारतीय समाज में पार्कों में या सार्वजनिक जगहों पर कुछ-कुछ समयांतराल पर कथित जागरण,चौकी,श्री मद्भागवत गीता,अखंड रामायण,सुंदर कांड आदि व्यर्थ का आयोजन किया जाता रहा है,ताकि भारतीय समाज के लोग भाग्यवादी, नियतिवादी,अकर्मण्य वाली,पाखंडी बने रहें ! और अब भारतीय युवा पीढ़ी को मूर्ख बनाने के लिए यहां के धर्म के शातिर ठेकेदारों ने कांवड़ यात्रा जैसी मूर्खतापूर्ण परंपरा की शुरुआत सरकारी संरक्षण भी खूब जोरदार ढंग से दिया जा रहा है ! क्या आपने दुनिया के किसी अन्य हिस्से में उस देश के युवाओं द्वारा कांवड़ यात्रा की बात सुनी है ?
यह कटु यथार्थ है कि भारतीय समाज को प्रगतिशील विचारधारा को पोषित करने वाले कोई आयोजन ही नहीं होते हैं,ताकि हमारा समाज भी इसी दुनिया के प्रगतिशील समाजों और देशों के साथ कदमताल करके चल सकें !
साभार -सुप्रसिद्ध जनवादी लेखक श्री चन्द्र भान पाल जी, मुंबई,संपर्क – 72082 17141
संकलन एवं संपादन – निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क – 9910629632