Site icon अग्नि आलोक

*’ऑपरेशन सिंदूर’आतंकवाद के विरुद्ध मानक*

Share

अवधेश कुमार,

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो टूक और प्रखर, आक्रामक घोषणाओं को देखने के बाद सीमापार आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर देश के अंदर या बाहर जो भी भ्रम रहा होगा, वह दूर हो जाना चाहिए। प्रधानमंत्री अगर घोषणा कर रहे हैं कि आतंकवाद के साथ वार्ता और व्यापार नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते तो उसके संदेश स्पष्ट हैं। इसके बाद भी कोई कहे कि भारत की नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की पोस्ट के आधार पर तय हो रही है तो वह गलत है।

पांच खास बातें : प्रधानमंत्री ने कहीं भी अपने संबोधन में सीजफायर यानी युद्धविराम शब्द का प्रयोग नहीं किया। उनके वक्तव्य में मूल पांच बातें स्पष्ट थीं।

स्वदेशी हथियारों की ब्रैंडिंग : गौर से देखें तो अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को संदेश के साथ ही यह भारत की रक्षा सामग्रियों के अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बड़ी ब्रैंडिंग भी थी। यानी हम भी प्रतिस्पर्धा में उतर गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी घटना पर लंबी अवधि के नजरिये से विचार करते हैं। वह भविष्य के भारत के वैश्विक उद्देश्यों के आधार को ध्यान में रखकर, उस पर समग्रता से विचार करने के बाद ही अपनी राय रखते हैं। देखा जाए तो ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद प्रधानमंत्री के वक्तव्य के जरिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नेतृत्वकारी भूमिका वाले देश के रूप में खुद को प्रस्तुत किया है।

दुनिया के नेता को खतरा : 
अमेरिका की परेशानी यह भी हो गई है कि अगर भारत इस तरह साहसिक सैन्य कार्रवाई करता रहा तो दुनिया के नेता का उसका स्थान खतरे में पड़ सकता है। तभी डॉनल्ड ट्रंप की भाषा भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए समान थी। उन्होंने दोनों को महान देश बताया और दोनों के साथ सतत व्यापार करने की इच्छा व्यक्त की। अचानक चीन के साथ व्यापारिक टकराव दूर करने के पीछे भी यही रणनीति हो सकती है।

दिखाया आईना : प्रधानमंत्री ने अमेरिका और यूरोप को आईना दिखाते हुए यह भी कहा कि 2001 में हुआ 9/11 हमला हो या ब्रिटेन में ट्यूब का हमला, इनके पीछे भी बहावलपुर के जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके के लश्कर-ए-तैयबा केंद्रों की भूमिका थी। यह सच है कि तब वैश्विक आतंकवाद के केंद्र में ये स्थल थे। ओसामा बिन लादेन खुलेआम इन स्थानों में तकरीरें करता था।

भारत की चेतावनी : अगर प्रधानमंत्री कहते हैं कि उन्होंने हमारी माताओं-बहनों की मांगों के सिंदूर उजाड़े तो हमने उनके अड्डों को ही उजाड़ दिया और यह भी कि ऑपरेशन सिंदूर एक अखंड प्रतिज्ञा है, तो नहीं लगता कि इस समय विश्व का कोई भी नेता इतने खतरनाक पड़ोसी के खिलाफ इस प्रकार के विचार और तेवर सामने रख सकता है। अब न केवल आतंकवादियों बल्कि उनके प्रायोजकों को भी भारत की यह चेतावनी गंभीरता से लेनी होगी कि उन्हें आतंकवाद का इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त करना ही होगा। नहीं करेंगे तो फिर ऑपरेशन सिंदूर के विस्तारित प्रचंड हमले के लिए तैयार रहें।

बन गया नया मानक : वास्तव में, ऑपरेशन सिंदूर वैश्विक आतंकवाद से संघर्ष के लिए विचारधारा और रणनीति दोनों स्तरों पर एक विशिष्ट मानक भी बन गया है। यह बताता है कि नेतृत्व के पास इसके पीछे की संपूर्ण सोच और योजनाओं की पूरी समझ हो, प्रतिकार के लिए दीर्घकालिक रणनीति व उसे क्रियान्वित करने की संकल्पबद्धता हो तो पाकिस्तान जैसे दुष्ट देश को भी सबक सिखाया जा सकता है। इस तरह ऑपरेशन सिंदूर के साथ भारत एक ऐसे नए दौर में प्रवेश कर चुका है जहां उसकी स्वयं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता व वैश्विक शांति की उसकी अपनी दृष्टि सर्वोपरि है। क्या देश के अंदर मोदी सरकार का विरोध कर रहे लोग इस सच को स्वीकार करेंगे?

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और विचारक हैं)

Exit mobile version