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सारस का मानव प्रेम और वन्य जीव संरक्षण

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सुसंस्कृति परिहार

हमारी संस्कृति जिसका मूलमंत्र रहा, वसुधैव कुटुंबकम् आज इस कुटुंबकम् पर वन्यजीव संरक्षण कानून का जिस तरह हमला हुआ है वह हर संवेदनशील इंसान को चुभ रहा है।हमने कुत्ता,घोड़ा,हाथी, गाय,ऊंट, बंदर, भेड़-बकरियां, बिल्ली,तोता और मोर को अपने परिवार में लंबे अर्से से शामिल किया हुआ है।हाथी ,कुत्ते और घोड़ों की मालिक भक्ति का इतिहास भरा पड़ा है।इसके अलावा चिड़ियों, कबूतरों को दाना चुगाना पानी रखना, पितृपक्ष में कौआ भोज आदि भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।पहली रोटी गाय और शेष बचा खाना कुत्ते के लिए दिया जाता रहा है। इनमें तोते के बेवफाई के किस्से भी मिलते हैं।एक कहावत भी अक्सर बुन्देलखण्ड में प्रचलित है सूजी(हुई)सुआ( तोता)और सुनार पर कतई यकीन नहीं करना चाहिए किंतु तोता मनुष्य की तरह बोलने की कोशिश करता है राम राम कह लेता है इसलिए उसे भी पालने का चलन है। यहां तक कि गर्दभ,सुअर और नाग भी हमारे पूज्य हैं उनके मंदिर बने हुए हैं। कुछ गाने बच्चों में बड़े लोकप्रिय हैं जैसे नानी तेरी मोरनी को चोर ले गए,बंदर मामा कहां चले वगैरह वगैरह। बिल्ली तो सबकी मौसी है तो गाय माता।वसुधा पर पाए जाने तमाम प्राणी,जल,थल, पेड़-पौधे सब हमारे कुटुंबकम् के सदस्य हैं। पृथ्वी बचाओ दिवस जो 22अप्रेल को मनाया जाता है उसका संदेश वसुधैव कुटुंबकम् में ही निहित है।

अब किसी का सारस दोस्त बन जाए तो वह बेचारा क्या करें ऐसे सारस को लेकर तीन प्रकरण सामने आ चुके हैं दो अमेठी जिले से और एक प्रयागराज जिले से हैं । खासियत यह है कि ये तीनों संयोग से मुस्लिम परिवार से हैं आरिफ,आमिर और अफ़रोज़ । सब उत्तर प्रदेश से हैं जिसका राज्य पक्षी सारस है।अभी सबसे ज्यादा प्रचारित मामला अमेठी के मंडुआ गांव के एक किसान आरिफ का है।उसका कुसूर इतना है कि उसने अपने खेत में पड़े एक घायल सारस मादा जिसके पैर की हड्डी में फ्रेक्चर था उठाया ।घर लाया लकड़ी वगैरह बांधी। देसी इलाज किया वह ठीक हो गई।इस बीच आरिफ की सेवासुश्रूषा से सारस इतनी खुश हो गई कि उसने उस घर से जाने का नाम नहीं लिया। आरिफ की थाली में साथ भोजन करती।वह खुली रहती जब तबियत होती तो खेत जंगल घूम आती या आरिफ की मोटरसाइकिल के साथ साथ उड़ती चलती रहती।गांव वाले इस प्रेम को कई महीनों से देख रहे थे और खुश थे।

अचानक फिर वीडियो बनने बनाने का दौर चला तो इस प्रेम के किस्से को देखने वालों की भीड़ शुरू हुई और जैसा कि कहा गया है भीड़ के कई ख़तरे होते हैं वहीं हुआ आरिफ़ उन नज़रों में भी आ गया जिसे राजनीति कहते हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब इस अजूबे सारस को देखने आए, साथ पत्रकार आए मामला सत्ता के गलियारों में पहुंच गया फिर क्या था बंगले में बंदर ,गाय पालने वाले योगी आदित्यनाथ सरकार ने तनिक देर नहीं की और तमाम वन महकमा तन्द्रा  से जाग उठा और सारस को ले गया।  वहां से सारस ने एक बार भागकर अपने प्रेमी आरिफ़ की खोज की किंतु वह असफल रही। उसने खाना पीना छोड़ दिया था क्यों कि वह तो आरिफ के साथ खाना खाती थी जो वह खाता था। यहां वैसा खाना भी दिया गया लेकिन उसने नहीं खाया  वहीं हाल यहां आरिफ़ का भी रहा।वह भूखा प्यासा उससे मिलने की कोशिश करता रहा पर उसे कामयाबी नहीं मिली। 

अंततः उसे इस क्षेत्र से बड़ी दूरी पर कानपुर अभयारण्य भेज दिया गया। जहां वह एक छोटे क्षेत्र में क्वारंटाइन है।उसने खाना अब तक नहीं खाया है।सारस का पसंदीदा भोजन मछली भी लाया गया पर वह भी उसने नहीं खाया।वन विभाग के अधिकारियों का कहना है  कुछ दिन में सब ठीक हो जाएगा तब उसे अन्य सारसों के बीच छोड़ दिया जाएगा।छोड़ने के बाद कहीं वह फिर आसिफ की तलाश शुरू कर देगी तो क्या होगा। कानपुर से आरिफ का घर दूर है उस भूखी सारस के साथ कोई दुर्घटना हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा है।

इधर सारस की कई प्रेम कथाओं के मुताबिक सारस अपने प्रेम को नहीं भूलता वह तिल तिल कर मर जाता है महर्षि बाल्मीकि ने भी इस बात को रेखांकित किया है।  अब प्रश्न यह उठता है कि जब सारस घायल हुआ तब वनविभाग कहां था वह लगभग एक साल से उसकी परवरिश कर रहा था सारस की सुधि किसी ने नहीं ली। अखिलेश का वीडियो यदि वायरल नहीं होता और योगी की अभिरुचि नहीं होती तो क्या सारस आरिफ से छिन सकता था। आरिफ ने उसे बंद कर पिंजड़े में रखा नहीं था।  वह तो आज़ाद था जंगल आता जाता था।हां अपने तीमारदार आरिफ के दर पर रात में हमेशा लौटता था। विचारणीय यह है ऐसे प्रेमी वन्य प्राणी को जबरिया अभयारण्य में छोड़ने की   एक ज़िद कहीं उस सारस की जान ना ले ले।संरक्षण के नाम पर यदि वह मौत का वरण करती है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?

सारस पालने वाले दो अन्य व्यक्ति भी जो सामने आए हैंअब उनको भी निश्चित सताया जाने वाला है लेकिन डिग्री ना दिखाने वाले साहिब जी भी  भी राष्ट्रीय पक्षी मोर को सरकारी आवास  पर पाले हुए हैं उसको भी क्या क्वारंटाइन होने भेजा जाएगा ?इतना ही नहीं वे फकीर हैं झोली उठाकर चल देंगे। आरिफ और अन्य दो तो सारस की दिल से परवरिश कर रहे हैं वे बंधन मुक्त हैं क्या पक्षियों द्वारा किए जा रहे इस प्रेम की सजा उन्हें मिलनी चाहिए।क्या इसे भी लव जिहाद की नज़र से देखना ज़रुरी है।इतना जबरदस्त संरक्षण क्या वनविभाग और उनका कानून देगा।जितना आरिफ और अन्य दो लोग दे रहे हैं।अच्छा हो नियमों को शिथिल करते हुए सारस को अपने प्रेमी के साथ रहने दिया जाए। इससे दो जवानों का संरक्षण होगा तथा वसुंधैव कुटुंबकम् की भावना को भी बल मिलेगा। 

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