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*कहानी : उसे मेरा चेहरा पसंद नहीं

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पुष्पा गुप्ता

 उसने पहले मेरा नाम बदला, फिर उसने मेरा पहनावा बदल दिया। फिर उसने मेरा मोहल्ला बदल दिया। मेरा खाना पीना बदल दिया।_
    अब वह मुझसे कई बार कह चुका है- मैं तुम्हारे चेहरे को बदल डालूंगा। तुम्हारा चेहरा मुझे अच्छा नहीं लगता ।'

मेरे चेहरे पर उसको कई बातें बहुत बुरी लगती है। वह कहता है कि तुम्हारा चेहरा वैसा नहीं है जैसा मैं चाहता हूं । वह कहता है-
मेरा चेहरा गंदा लगता है।
मेरा चेहरा झूठा और मक्कार लगता है।
मेरा चेहरा शातिर बदमाश जैसा लगता है। मेरा चेहरा इनकम टैक्स चोर का चेहरा लगता है।
मेरा चेहरा जमाखोर और मुनाफ़ाखोर का चेहरा लगता है।
मेरा चेहरा देश की एकता और अखंडता को तोड़ने वाला लगता है।
मेरा चेहरा आतंकवादी लगता है।
मेरा चेहरा देशद्रोही लगता है।

मेरा अपना ही तो था वह. सो एक दिन मैं उसकी पकड़ में आ गई।
वह मुझे ऑपरेशन थिएटर में ले गया और मेरा चेहरा बदलना शुरू कर दिया।
बहुत जल्दी में वह मुझे एनेस्थीसिया देना भी भूल गया । इसलिए जब उसने मेरे चेहरे की काट पीट शुरू की तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन मैं मजबूर थी।
वह मेरे चेहरे को काटता- छांटता रहा। काफी समय लगा।
फिर उसने कहा कि देखो तुम्हारा चेहरा अब बिल्कुल ठीक हो गया।
उसने मुझे आईना दिखाया।
मुझे अपना चेहरा उसके चेहरे जैसा लगा। मैंने उससे कहा- तुम भी तो आईना देखो।
उसने आईना देखा। उसका चेहरा बिल्कुल मेरे वैसे चेहरे जैसा हो गया था, जैसा वह मेरा चेहरा देखता था।
{चेतना विकास मिशन)

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